मस्क के 'X' को मेटा का 'चैकमेट'—मोबाइल की दुनिया में पिछड़ा ट्विटर, Threads ने मारी बाजी; क्या बदल रहा है सोशल मीडिया का किंग?
नई दिल्ली, दिनांक: 20 जनवरी 2026 — सोशल मीडिया के अखाड़े में चल रही दुनिया की सबसे बड़ी कॉरपोरेट जंग में एक नया और निर्णायक मोड़ आ गया है। एलन मस्क (Elon Musk) के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म 'X' (जिसे हम ट्विटर के नाम से जानते थे) को उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) की कंपनी मेटा (Meta) ने तगड़ा झटका दिया है। ताजा आंकड़ों ने उस दावे पर मुहर लगा दी है जिसकी भविष्यवाणी टेक पंडित पिछले एक साल से कर रहे थे—मोबाइल फोन की दुनिया में मेटा का 'Threads' ऐप अब X से ज्यादा लोकप्रिय और व्यस्त हो गया है।
मार्केट इंटेलिजेंस फर्म Similarweb के नवीनतम डेटा के मुताबिक, कई महीनों की लगातार ग्रोथ के बाद Threads ने iOS और Android दोनों प्लेटफॉर्म पर डेली एक्टिव यूजर्स (DAU) के मामले में X को पीछे छोड़ दिया है। यह बदलाव रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि यह यूजर्स के बदलते व्यवहार और X के गिरते भरोसे का नतीजा है।
आंकड़ों का सच: 14 करोड़ बनाम 12.5 करोड़
टेकक्रंच (TechCrunch) की रिपोर्ट और सिमिलरवेब के डेटा ने सोशल मीडिया के नए समीकरण पेश किए हैं। 7 जनवरी 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि मोबाइल यूजर्स का झुकाव तेजी से बदल रहा है।
- Threads की उड़ान: iOS और Android पर Threads के करीब 141.5 मिलियन (14.15 करोड़) डेली एक्टिव यूजर्स दर्ज किए गए।
- X का संघर्ष: वहीं, इसी अवधि में X के मोबाइल डिवाइसेज पर डेली एक्टिव यूजर्स की संख्या करीब 125 मिलियन (12.5 करोड़) रही।
वेब पर अब भी X का दबदबा: हालांकि, मस्क के लिए राहत की बात यह है कि वेब प्लेटफॉर्म (Web/Desktop) पर X की बादशाहत अभी भी कायम है। डेस्कटॉप या ब्राउज़र के जरिए एक्सेस करने वाले यूजर्स की संख्या में X, थ्रेड्स से काफी आगे है। लेकिन तकनीक की दुनिया का नियम है—"भविष्य मोबाइल है", और वहां X पिछड़ रहा है।
क्यों फिसला X? विवादों का 'ग्रहण'
X की ग्रोथ थमने के पीछे केवल थ्रेड्स की सफलता नहीं, बल्कि खुद X के विवाद भी जिम्मेदार हैं। हालिया महीनों में मस्क के प्लेटफॉर्म को कई मोर्चों पर आलोचना झेलनी पड़ी है।
- AI मॉडल Grok का विवाद: X में इंटीग्रेट किए गए एआई मॉडल Grok को लेकर भारी बवाल हुआ। आरोप लगे कि यह बिना सहमति के महिलाओं की अश्लील और आपत्तिजनक तस्वीरें (Deepfakes) बनाने में सक्षम है।
- कानूनी पेंच: इस मुद्दे ने आग में घी का काम किया। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल से लेकर यूके, यूरोपीय यूनियन, भारत और ब्राज़ील जैसे देशों में जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई।
- नेगेटिव माहौल: लगातार बदलते नियम, ब्लू टिक के लिए पैसे और मॉडरेशन की कमी ने गंभीर यूजर्स को निराश किया। इसका सीधा फायदा Bluesky और Threads जैसे विकल्पों को मिला, जिनके डाउनलोड्स में इसी दौरान उछाल देखा गया।
मेटा की रणनीति: विवाद से पहले ही शुरू हो गई थी 'जीत'
डेटा एक दिलचस्प कहानी और बयां करता है। Threads की मोबाइल ग्रोथ X के हालिया विवादों से पहले ही शुरू हो चुकी थी। यह मेटा की उस आक्रामक रणनीति का परिणाम है जिसे मार्क जुकरबर्ग ने बहुत सधे हुए तरीके से लागू किया।
- क्रॉस-प्रमोशन: इंस्टाग्राम और फेसबुक के अरबों यूजर्स को Threads पर लाने के लिए लगातार क्रॉस-प्रमोशन किया गया। इंस्टाग्राम पर दिखने वाले थ्रेड्स के सजेशन ने यूजर्स को ऐप खोलने पर मजबूर किया।
- क्रिएटर्स पर फोकस: मेटा ने जानबूझकर क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को प्लेटफॉर्म पर एंगेज करने के लिए टूल्स दिए, जिससे कंटेंट की विविधता बढ़ी।
नए फीचर्स बने 'चुंबक'
शुरुआत में Threads को 'ट्विटर की कॉपी' कहा गया, लेकिन पिछले एक साल में इसने अपनी अलग पहचान बना ली है। मेटा ने तेजी से वो फीचर्स जोड़े जिनकी यूजर्स मांग कर रहे थे:
- बेहतर कंटेंट फिल्टर: यूजर्स को क्या देखना है, इस पर नियंत्रण।
- कम्युनिटी: रुचि आधारित कम्युनिटीज़ (जैसे Reddit) का अनुभव।
- डायरेक्ट मैसेजिंग (DM): जो पहले नदारद थी।
- लंबे पोस्ट: अपनी बात विस्तार से कहने की आजादी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन बदलावों ने मोबाइल यूजर्स को ऐप पर ज्यादा समय बिताने (Screen Time) के लिए प्रेरित किया है और इसे उनकी रोजमर्रा की आदत (Habit) बना दिया है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
सोशल मीडिया अब केवल 'संवाद' का माध्यम नहीं, बल्कि 'आदत' का खेल है। Threads ने मोबाइल पर बाजी मारकर यह साबित कर दिया है कि अगर विकल्प बेहतर और कम विवादास्पद हो, तो यूजर स्विच करने में देर नहीं लगाते।
The Trending People का विश्लेषण है कि एलन मस्क के लिए यह एक 'वेक-अप कॉल' (Wake-up Call) है। 'सुपर ऐप' बनाने का उनका सपना तभी सच होगा जब प्लेटफॉर्म पर भरोसा (Trust) और सुरक्षा (Safety) होगी। वेब पर पकड़ मजबूत होना अच्छी बात है, लेकिन अगली पीढ़ी मोबाइल पर ही रहती है। अगर X ने अपनी रणनीति और कंटेंट मॉडरेशन पर दोबारा विचार नहीं किया, तो वह दिन दूर नहीं जब यह सिर्फ 'खबरों' का नहीं, बल्कि 'इतिहास' का हिस्सा बन जाएगा। फिलहाल, मोबाइल की जंग में जुकरबर्ग का पलड़ा भारी है।
