पंजाब केसरी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, AAP सरकार पर विपक्ष का तीखा हमला
पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और मीडिया समूह पंजाब केसरी के बीच चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। अदालत के इस निर्णय के बाद विपक्षी दलों ने AAP सरकार और उसके शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विपक्ष का स्वागत
मीडिया समूह के खिलाफ पंजाब सरकार की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के रुख को अनुचित ठहराया है। विपक्ष का कहना है कि यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की स्वायत्तता के पक्ष में एक अहम संदेश देता है। राजनीतिक हलकों में इसे AAP सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
भाजपा का सीधा हमला
भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया विभाग प्रमुख अनिल बलूनी ने इस फैसले को “केजरीवाल एंड कंपनी के मुंह पर करारा तमाचा” करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि पंजाब की AAP सरकार लगातार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही थी, जिसे सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया।
केजरीवाल–मान सरकार पर सवाल
भाजपा नेताओं का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल के इशारे पर चल रही भगवंत मान सरकार ने सत्ता का दुरुपयोग किया। उनका कहना है कि मीडिया के खिलाफ कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सियासी तापमान तेज
इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने का अवसर बता रहा है, जबकि AAP की ओर से अब तक विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
हमारी राय
सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतांत्रिक संस्थाओं के संतुलन और मीडिया की स्वतंत्रता को मजबूत करता है। किसी भी सरकार को आलोचना सहने और संवैधानिक मर्यादाओं में रहकर कार्य करने की जरूरत है।
