मोदी-MBZ की 'जादू की झप्पी' से इस्लामाबाद में हड़कंप—भारत-यूएई की दोस्ती देख पाकिस्तान ने सऊदी को मिलाया फोन, आतंकवाद पर 'संयुक्त बयान' बना गले की फांस
नई दिल्ली/इस्लामाबाद, दिनांक: 20 जनवरी 2026 — अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बिसात पर भारत ने एक ऐसी चाल चली है, जिससे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में बेचैनी का आलम है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) का हालिया और संक्षिप्त दिल्ली दौरा रणनीतिक रूप से इतना भारी साबित हुआ कि इसकी गूंज रावलपिंडी और इस्लामाबाद के गलियारों तक सुनाई दे रही है।
महज तीन घंटे के इस तूफानी दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति MBZ के बीच हुई केमिस्ट्री और उसके बाद जारी संयुक्त बयान ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। विशेष रूप से 'सीमा पार आतंकवाद' (Cross-border Terrorism) की कड़ी आलोचना को इस्लामाबाद के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। हालात यह हैं कि इस मुलाकात के तुरंत बाद पाकिस्तान को अपने पुराने संरक्षक सऊदी अरब का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।
3 घंटे का दौरा, संदेश दूरगामी: रक्षा और तकनीक पर जोर
यूएई के राष्ट्रपति का यह दौरा भले ही छोटा था, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे थे। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, डिफेंस टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
बदलते समीकरण: विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पश्चिम एशिया (West Asia) में बदलते समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। यूएई अब भारत को केवल एक व्यापारिक भागीदार नहीं, बल्कि एक सुरक्षा भागीदार (Security Partner) के रूप में भी देख रहा है।
आतंकवाद पर चोट: संयुक्त बयान में बिना नाम लिए पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए सीमा पार आतंकवाद की निंदा की गई। यह पहली बार नहीं है जब यूएई ने भारत के सुरक्षा हितों का समर्थन किया है, लेकिन पाकिस्तान के लिए एक 'मुस्लिम ब्रदर' देश का यह रुख पचाना मुश्किल हो रहा है।
पाकिस्तान की घबराहट: इशाक डार का 'सऊदी कॉल'
भारत और यूएई की इस जुगलबंदी का असर तुरंत देखने को मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में मोदी और MBZ की मुलाकात खत्म होते ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) ने आनन-फानन में सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान को फोन मिलाया।
आधिकारिक बयान: पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच 'ताजा घटनाक्रम और आपसी हितों' पर चर्चा हुई। हालांकि, उन्होंने इसका ब्यौरा साझा नहीं किया, लेकिन टाइमिंग अपने आप में पूरी कहानी बयां कर रही है।
डर की वजह: भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत–यूएई की बढ़ती नजदीकी पाकिस्तान को अलग-थलग (Isolate) कर रही है। पाकिस्तान को डर है कि कहीं यूएई के बाद सऊदी अरब भी भारत के साथ रक्षा और रणनीतिक मामलों में और करीब न चला जाए, जिससे 'कश्मीर एजेंडा' पूरी तरह हाशिए पर चला जाएगा।
विशेषज्ञ की राय: "भरोसेमंद साथी की तलाश में यूएई"
अमेरिका स्थित प्रमुख विश्लेषक डेरेक जे. ग्रॉसमैन (Derek J. Grossman) ने इस घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक, इस फोन कॉल को भारत–यूएई रिश्तों से उपजी पाकिस्तान की चिंता (Anxiety) के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
अंदरूनी कूटनीति: विशेषज्ञ यह भी इंगित करते हैं कि पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और यूएई के बीच भी वर्चस्व को लेकर एक अघोषित प्रतिस्पर्धा और संबंधों में उतार-चढ़ाव चल रहा है।
भारत का विकल्प: ऐसे में यूएई क्षेत्र से बाहर भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है, और भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरा है। भारत की विशाल अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत यूएई को आकर्षित करती है।
पाकिस्तान की चुनौती: यही कारण है कि दिल्ली–आबूधाबी रक्षा सहयोग को पाकिस्तान अपनी रणनीति के लिए सीधी चुनौती के रूप में देख रहा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है, जबकि भारत एक वैश्विक शक्ति बन रहा है—यह अंतर अब खाड़ी देशों की विदेश नीति में साफ दिख रहा है।
क्या है पाकिस्तान का अगला कदम?
पाकिस्तान अब कोशिश करेगा कि वह इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) जैसे मंचों का इस्तेमाल कर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखे। लेकिन यूएई और सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली देशों का भारत की ओर झुकाव यह बताता है कि 'धर्म' अब 'आर्थिकी और रणनीति' पर भारी नहीं पड़ रहा। पाकिस्तान के लिए यह एक 'चेक-मेट' (Check-Mate) जैसी स्थिति है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
भारत और यूएई के रिश्ते अब 'खरीदार और विक्रेता' से आगे बढ़कर 'सामरिक साझेदार' के स्तर पर पहुंच चुके हैं। एमबीजेड का दिल्ली आना और आतंकवाद पर भारत के सुर में सुर मिलाना भारतीय कूटनीति की बड़ी विजय है।
The Trending People का विश्लेषण है कि पाकिस्तान की बौखलाहट स्वाभाविक है। जिस यूएई और सऊदी अरब को वह अपना 'एटीएम' और 'संरक्षक' मानता था, वे अब भारत के साथ भविष्य देख रहे हैं। इशाक डार का फोन कॉल डैमेज कंट्रोल की कोशिश हो सकती है, लेकिन हकीकत यह है कि भू-राजनीति में भावनाएं नहीं, हित मायने रखते हैं। और आज के दौर में, हित भारत के साथ हैं। पाकिस्तान को अब यह स्वीकार करना होगा कि कश्मीर का राग अलापकर वह अपने पुराने दोस्तों को भी खो रहा है।
