रेलवे परिवारों को राहत: माता-पिता के निधन के बाद आश्रित बेटियों को मिलेंगी सभी सुविधाएं, बोर्ड का बड़ा फैसला
रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी के निधन के बाद अब उनकी आश्रित बेटियों को चिकित्सा सुविधा और रेलवे पास के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ऐसी बेटियां रेलवे परिवार का हिस्सा मानी जाएंगी और उन्हें वही बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी, जो उनके माता-पिता को मिलती थीं।
इस फैसले से उन हजारों परिवारों को राहत मिलेगी, जो अब तक नियमों की अस्पष्टता के कारण परेशान थे।
उम्मीद कार्ड और इलाज की सुविधा होगी आसान
रेलवे बोर्ड के निर्देश के अनुसार अब सेकेंडरी फैमिली पेंशन प्राप्त कर रहीं अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियों का उम्मीद कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाएगा। इससे वे बिना किसी बाधा के रेलवे अस्पतालों में इलाज करा सकेंगी।
रायबरेली जिले में वर्तमान में 1202 रेलवे कर्मचारी तैनात हैं, जबकि 399 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन सभी कर्मचारियों और उनके आश्रितों का इलाज रायबरेली स्टेशन स्थित रेलवे अस्पताल में किया जाता है।
विंडो पास भी नहीं होगा बंद
रेलवे बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि माता-पिता के निधन के बाद विंडो पास बंद नहीं किया जाएगा। अब यह पास परिवार की सबसे बड़ी पात्र लाभार्थी बेटी के नाम पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इस पास में अन्य आश्रित सदस्य भी शामिल हो सकेंगे।
अब तक यह सुविधा न मिलने के कारण आश्रित बेटियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। रेलवे संगठनों की ओर से पिछले तीन वर्षों से इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा था।
संगठनों की मांग पर आया फैसला
रेलवे मेंस यूनियन के लखनऊ मंडल अध्यक्ष सुधीर तिवारी ने बताया कि संगठन लंबे समय से इस मांग को रेलवे बोर्ड के सामने रख रहा था। अब स्पष्ट आदेश जारी होने से बड़ी संख्या में रेलकर्मियों के परिवारों को लाभ मिलेगा।
मंडल रेल प्रबंधक सुनील कुमार वर्मा ने भी पुष्टि की कि यह सुविधा लागू कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।
इन स्टेशनों के कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
रायबरेली स्टेशन के रेलवे अस्पताल से रायबरेली, बछरावां, कुंदनगंज, हरचंदपुर, गंगागंज, रूपामऊ, दरियापुर, लक्ष्मणपुर, रामचंद्रपुर, ऊंचाहार, अरखा, जलालपुरधई, मंझलेपुर, ईश्वरदासपुर, डलमऊ, लालगंज, रघुराज सिंह और अमेठी जिले के फुरसतगंज स्टेशन के रेलवे कर्मचारियों व उनके आश्रितों का इलाज किया जाता है।
हमारी की राय में
रेलवे बोर्ड का यह फैसला आश्रित बेटियों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा। इससे न केवल उन्हें सम्मान और अधिकार मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य और यात्रा जैसी बुनियादी सुविधाओं तक उनकी आसान पहुंच भी सुनिश्चित होगी। यह निर्णय सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार प्रशासन का अच्छा उदाहरण है।
