कृषि शिक्षा को मिलेगी नई दिशा—IVRI को शिखर पर पहुंचाने वाले डॉ. त्रिवेणी दत्त अब मेरठ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, संभाली कमान
मेरठ/बरेली, दिनांक: 14 जनवरी 2026 — उत्तर प्रदेश की कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव हुआ है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज्जतनगर के निदेशक एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. त्रिवेणी दत्त (Dr. Triveni Dutt) को सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SVP University of Agriculture and Technology), मेरठ के कुलपति (Vice-Chancellor) का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। 34 वर्षों से अधिक के अपने शानदार करियर में डॉ. दत्त ने न केवल एक उत्कृष्ट शिक्षक और शोधकर्ता के रूप में, बल्कि एक कुशल प्रशासक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। उनके नेतृत्व में आईवीआरआई ने जो बुलंदियां छुई हैं, उससे उम्मीद जगी है कि मेरठ कृषि विश्वविद्यालय भी अब विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।
प्राथमिकताएं तय: "बी प्लस से ए प्लस तक का सफर"
नवनियुक्त कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कार्यभार संभालते ही अपना विजन और रोडमैप स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने विश्वविद्यालय की एकेडमिक गुणवत्ता और रैंकिंग को सुधारना अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
NAAC और रैंकिंग: डॉ. दत्त ने कहा, "मेरा लक्ष्य विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय कृषि शिक्षा मान्यता बोर्ड (ICAR-NAEAB) द्वारा प्रदत्त 'बी डबल प्लस' (B++) श्रेणी से अपग्रेड कर 'ए डबल प्लस' (A++) श्रेणी में लाना है। साथ ही नैक (NAAC) की रेटिंग में भी सुधार करना है।"
NIRF में छलांग: उन्होंने संकल्प लिया है कि वे विश्वविद्यालय को नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की सूची में टॉप-10 में स्थान दिलाएंगे।
कौन हैं डॉ. त्रिवेणी दत्त? (प्रोफाइल)
डॉ. दत्त की शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा कृषि और पशु विज्ञान के प्रति उनके समर्पण की कहानी है।
- शिक्षा: उन्होंने कृषि विज्ञान में स्नातक करने के बाद आईवीआरआई (IVRI) से ही पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन में परास्नातक और पशु प्रजनन में पीएचडी (PhD) की उपाधि प्राप्त की।
- अनुभव: वे 23 वर्षों से अधिक समय तक प्रोफेसर और प्रधान वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत रहे। इसके अलावा, उनके पास 27 वर्षों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है।
- नेतृत्व कौशल: संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक), अधिष्ठाता (Dean) और संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) जैसे पदों पर रहते हुए उन्होंने आईवीआरआई को नैक में 'ए डबल प्लस' ग्रेड दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
शोध और नवाचार के 'पुरोधा'
डॉ. दत्त का कार्यकाल वैज्ञानिक उपलब्धियों से भरा रहा है। उनके काम ने न केवल प्रयोगशालाओं में वाहवाही बटोरी, बल्कि किसानों के जीवन को भी आसान बनाया।
- नस्ल विकास: उन्होंने 8 नई पशु नस्लों (जैसे रुहेलखंडी बकरी) का विकास किया है, जो कम लागत में अधिक उत्पादन देती हैं।
- पेटेंट और उत्पाद: उनके नाम 18 उत्पादों (6 टीके और 12 उपकरण), 2 पेटेंट, 9 पंजीकृत डिजाइन और 41 कॉपीराइट दर्ज हैं।
- राजस्व मॉडल: उनके द्वारा विकसित तकनीकों का व्यावसायीकरण करके संस्थान ने लगभग 4.42 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम था।
डिजिटल पहल: शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए उन्होंने 142 आईसीटी (ICT) टूल्स विकसित किए, जिनमें मोबाइल ऐप्स और चैटबॉट्स शामिल हैं, जो छात्रों और किसानों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध हुए हैं।
मेरठ के लिए विजन: "लैब टू लैंड"
मेरठ विश्वविद्यालय के लिए डॉ. दत्त ने 'लैब टू लैंड' (Lab to Land) की रणनीति तैयार की है।
- एकीकरण: वे शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार (Extension) का प्रभावी एकीकरण करेंगे।
- किसान केंद्रित: उनका जोर समस्या-उन्मुख अनुसंधान पर होगा जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की आय बढ़ा सके।
- साझेदारी: उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग बढ़ाकर वे छात्रों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।
बरेली में डॉ. एसके सिंह को कमान
डॉ. त्रिवेणी दत्त के मेरठ जाने के बाद, आईवीआरआई इज्जतनगर में निदेशक का प्रभार संस्थान के सबसे वरिष्ठ संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. एस.के. सिंह को सौंपा गया है।
द ट्रेंडिंग पीपल की राय (The Trending People Analysis)
डॉ. त्रिवेणी दत्त की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि सरकार अब कृषि विश्वविद्यालयों को 'ब्यूरोक्रेटिक' जकड़न से निकालकर 'वैज्ञानिक नेतृत्व' देना चाहती है। आईवीआरआई में उनके सफल प्रयोग और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की नीति यह बताती है कि वे लकीर के फकीर नहीं, बल्कि नवाचार के पक्षधर हैं।
The Trending People का मानना है कि मेरठ कृषि विश्वविद्यालय के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है। डॉ. दत्त का अनुभव, विशेषकर तकनीकों का व्यावसायीकरण और डिजिटल विस्तार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक सकता है। उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय केवल डिग्रियां बांटने का केंद्र नहीं, बल्कि कृषि क्रांति का अग्रदूत बनेगा।
