Makar Sankranti 2026: आज मकर संक्रांति, श्रद्धा और आस्था के साथ देशभर में पर्व का उल्लास
नई दिल्ली। 15 जनवरी यानी आज देशभर में मकर संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व सूर्यदेव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है और ऋतु परिवर्तन का दौर भी यहीं से आरंभ हो जाता है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान, दान और सूर्य उपासना कई गुना पुण्य फल प्रदान करती है। शरद ऋतु के क्षीण होने और बसंत ऋतु के आगमन का संकेत भी इसी पर्व से मिलता है।
मकर संक्रांति 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज के अनुसार, आज मकर संक्रांति पर सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्नान और दान का विशेष मुहूर्त है। श्रद्धालु इस अवधि में किसी भी समय स्नान-दान कर सकते हैं।
इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है, जिसका समय सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक है।
मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल का समय
ज्योतिषियों के अनुसार, सूर्य ने 14 जनवरी की रात 9 बजकर 35 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश किया था। ऐसे में संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी की सुबह रहेगा। पुण्यकाल ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होकर कम से कम सुबह 7:15 से 8 बजे तक रहेगा, जबकि कुछ मान्यताओं के अनुसार इसे दोपहर 12 बजे तक भी माना जा सकता है।
मकर संक्रांति 2026 पूजन विधि
मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है। यदि तीर्थ स्थल पर जाना संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्घ्य दें। जल में रोली, अक्षत और गुड़ डालकर अर्घ्य देने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। इसके बाद सूर्य मंत्र का जाप करें और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा करें।
मकर संक्रांति 2026 दान का महत्व
मकर संक्रांति को दान का पर्व भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और कंबल का दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन तिल-गुड़ से बनी चीजों का सेवन, खिचड़ी या तिल के पकवान बनाना शुभ माना गया है। साथ ही आपसी विवाद से दूर रहकर मधुर वाणी का प्रयोग करने की भी सलाह दी जाती है।
हमारी राय
मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, विज्ञान और जीवनशैली से जुड़ा हुआ उत्सव है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा और नए आरंभ का संदेश मिलता है। स्नान, दान और सूर्य उपासना के पीछे आत्मशुद्धि और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव छिपा है। आज के समय में जब जीवन तेज और तनावपूर्ण हो गया है, ऐसे पर्व हमें संयम, सेवा और सद्भाव की याद दिलाते हैं। मकर संक्रांति का संदेश है कि हम न केवल अपने लिए, बल्कि जरूरतमंदों के लिए भी सोचें और जीवन में संतुलन बनाए रखें।

