Delhi Assembly ‘Fansi Ghar’ Row: केजरीवाल सरकार का ऐतिहासिक दावा गलत, समिति ने कहा—कोई प्रमाण नहींदिल्ली विधानसभा में बना फांसी घर.
दिल्ली विधानसभा परिसर में ‘ऐतिहासिक फांसी घर’ होने के दावे पर बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने जांच के बाद साफ किया है कि परिसर में फांसी घर होने का दावा ऐतिहासिक तथ्यों से प्रमाणित नहीं होता। समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस दस्तावेज या रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि विधानसभा परिसर में कभी फांसी घर मौजूद था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस स्थान को ‘फांसी घर’ के रूप में प्रचारित किया गया, वह वास्तव में किसी अन्य उद्देश्य—जैसे सेवा या टिफिन कक्ष—के लिए इस्तेमाल होता था। समिति ने माना कि ऐतिहासिक दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना इस स्थान को फांसी घर बताना गंभीर चूक है।
समिति ने यह भी बताया कि मामले की जांच के लिए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, राम निवास गोयल और राखी बिड़ला को 13 और 20 नवंबर को बैठक में बुलाया गया था, लेकिन कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। समिति ने इसे सदन और समिति की अवमानना करार दिया और कहा कि बिना कारण समन की अनदेखी करना विधानसभा के विशेषाधिकारों का उल्लंघन है।
दरअसल, अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री रहते यह दावा किया गया था कि विधानसभा भवन में ब्रिटिश काल का एक रहस्यमयी ‘फांसी घर’ मिला है, जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी। इस स्थान को सजाकर पर्यटकों के लिए खोला गया था। बाद में सरकार बदलने पर जांच हुई, जिसमें यह दावा तथ्यहीन पाया गया।
हमारी राय
इतिहास से जुड़े दावे भावनाओं को छूते हैं, लेकिन बिना प्रमाण के उन्हें स्थापित करना लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के खिलाफ है। समिति की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास को प्रस्तुत करने में सावधानी जरूरी है। जवाबदेही और पारदर्शिता ही ऐसे विवादों का स्थायी समाधान है।