चांदी की चाल ने उड़ाए होश—1 दिन में 21 हजार टूटी, अगले दिन 12 हजार उछली; क्या 2026 में 3 लाख का आंकड़ा छू पाएगी 'गरीबों की सोना'?
नई दिल्ली/मुंबई, दिनांक: 30 दिसंबर 2025 — साल 2025 निवेशकों के लिए किसी रोमांचक थ्रिलर फिल्म से कम नहीं रहा है, और इस फिल्म की सबसे बड़ी स्टार साबित हुई है— चांदी (Silver)। सफेद धातु ने इस साल जो रिटर्न दिया है, उसने सोने की चमक को भी फीका कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में साल 2011 के बाद पहली बार चांदी ने 50 डॉलर प्रति औंस का महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया है, जिसका सीधा और जोरदार असर भारतीय घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है।
हालांकि, पिछले 48 घंटों में चांदी ने जो 'रोलर-कोस्टर' राइड दिखाई है, उसने नए निवेशकों के दिलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। रिकॉर्ड हाई छूने के बाद अचानक भारी गिरावट और फिर मंगलवार को जबरदस्त वापसी—बाजार की यह चाल सवाल खड़ा करती है कि क्या चांदी की यह रैली अभी और आगे जाएगी? क्या वाकई चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलो का जादुई आंकड़ा छू पाएगी? आइए समझते हैं बाजार का पूरा गणित और विशेषज्ञों की राय।
रिकॉर्ड हाई, फिर क्रैश और अब 'कमबैक'
सप्ताह की शुरुआत (सोमवार) चांदी के लिए बेहद नाटकीय रही।
- ऑल टाइम हाई: सोमवार सुबह करीब 9 बजकर 2 मिनट पर एमसीएक्स (MCX) पर चांदी ने इतिहास रच दिया। कीमतें 2,54,174 रुपये प्रति किलो के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं।
- महा-गिरावट: लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिक पाई। मुनाफावसूली (Profit Booking) और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते महज कुछ घंटों में चांदी औंधे मुंह गिरी। भाव अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 8.28 फीसदी टूट गए। यानी देखते ही देखते चांदी में 21,000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
मंगलवार की वापसी (30 दिसंबर 2025): गिरकर संभलना ही बाजार की फितरत है। मंगलवार को एमसीएक्स पर चांदी ने फिर से दहाड़ लगाई।
- पिछले सत्र में 2,24,429 रुपये पर बंद होने के बाद, आज बाजार 2,31,100 रुपये पर खुला।
- देखते ही देखते कीमतों में करंट दौड़ गया और चांदी करीब 12,500 रुपये की बढ़त के साथ 2,36,907 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई। यह उतार-चढ़ाव बताता है कि बाजार में खरीदार (Bulls) अभी भी हावी हैं।
क्या कहती है अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल?
चांदी की इस तेजी की स्क्रिप्ट ग्लोबल मार्केट में लिखी जा रही है। 2011 के बाद यह पहला मौका है जब चांदी ने 50 डॉलर प्रति औंस के रेजिस्टेंस लेवल (प्रतिरोध स्तर) को तोड़ा है। जानकारों का कहना है कि यह केवल सट्टेबाजी नहीं है। इसके पीछे ठोस कारण हैं:
- औद्योगिक मांग: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और 5G तकनीक में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
- सप्लाई की कमी: खदानों से उत्पादन उस रफ्तार से नहीं बढ़ रहा जिस रफ्तार से मांग बढ़ रही है।
एक्सपर्ट्स की भविष्यवाणी: "अभी तो पार्टी शुरू हुई है"
बाजार के दिग्गज विश्लेषकों का मानना है कि जो लोग गिरावट से डर रहे हैं, वे बड़ी तस्वीर नहीं देख पा रहे। चांदी की मौजूदा रैली अभी खत्म नहीं हुई है।
- शॉर्ट टर्म टारगेट: विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 डॉलर के ऊपर टिके रहना एक 'बुलिश' (तेजी का) संकेत है। उनका अनुमान है कि शॉर्ट टर्म में चांदी 75 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है।
- लॉन्ग टर्म विजन: अगले दो वर्षों का नजरिया और भी सकारात्मक है। अनुमान है कि चांदी 100 डॉलर प्रति औंस का स्तर भी छू सकती है। हालांकि, यह सफर सीधा नहीं होगा; बीच-बीच में 10-15% के करेक्शन आते रहेंगे।
घरेलू बाजार: क्या 2026 में दिखेगा 3 लाख का भाव?
भारतीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या चांदी 3 लाख रुपये होगी? विशेषज्ञों का जवाब है— हाँ, संभावना प्रबल है।
- 2026 का लक्ष्य: विश्लेषकों का मानना है कि यदि रुपये में कमजोरी और ग्लोबल मांग बनी रही, तो साल 2026 के अंत तक चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर सकती है।
- दीर्घकालिक लक्ष्य: और आगे देखें तो लंबी अवधि में (अगले 3-4 सालों में) चांदी के 3 से 4 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की भविष्यवाणी की जा रही है।
निवेशकों के लिए सलाह: 'एक मुश्त' पैसा न लगाएं
जब किसी एसेट में इतनी तेजी आती है, तो FOMO (छूट जाने का डर) के चलते लोग अपनी सारी जमापूंजी लगा देते हैं। विशेषज्ञों ने इससे बचने की सलाह दी है।
- SIP मोड: एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय गिरावट पर खरीदारी (Buy on Dips) की रणनीति अपनाएं। स्टेप-बाय-स्टेप निवेश करें।
- धैर्य: चांदी में सोने से ज्यादा वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) होती है। अगर आप 20-30 हजार की गिरावट देखकर घबराते हैं, तो यह निवेश आपके लिए नहीं है। यह खेल 'लॉन्ग टर्म' खिलाडि़यों का है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
चांदी अब केवल पायल या बर्तन बनाने वाली धातु नहीं रह गई है; यह भविष्य की तकनीक (Green Tech) का ईंधन बन चुकी है। 2.5 लाख से गिरकर 2.3 लाख पर आना और फिर उछलना एक स्वस्थ बाजार का संकेत है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 2026 चांदी के निवेशकों के लिए 'गोल्डन ईयर' साबित हो सकता है। औद्योगिक मांग इस धातु को सोने से बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगी। हालांकि, 3 लाख का सपना देखने वालों को अपनी सीट बेल्ट बांधकर रखनी होगी, क्योंकि यह सफर काफी हिचकोले भरा होने वाला है। हमारी सलाह है कि अपने पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा ही चांदी में रखें और गिरावट को अवसर समझें, न कि आपदा।
