2025 बना बीजेपी का 'गोल्डन ईयर'—दिल्ली का सूखा खत्म, बिहार में बंपर जीत और दक्षिण में सेंध, इन 5 बड़ी उपलब्धियों ने बदली देश की सियासी तस्वीर
नई दिल्ली, दिनांक: 30 दिसंबर 2025 — भारतीय राजनीति के इतिहास में साल 2025 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए 'विजय वर्ष' के रूप में याद किया जाएगा। यह वह साल रहा जब भाजपा ने न केवल अपने पुराने किलों को मजबूत किया, बल्कि उन दुर्गों को भी ध्वस्त कर दिया जहाँ उसका प्रवेश असंभव माना जाता था। दिल्ली की सत्ता पर तीन दशकों बाद काबिज होने से लेकर बिहार में प्रचंड बहुमत और दक्षिण के अभेद्य किले केरल में ऐतिहासिक सेंध लगाने तक—भाजपा ने अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया है।
साल के अंतिम महीनों में मिली सफलताओं ने पार्टी के लिए एक 'वॉटरशेड मोमेंट' (Watershed Moment) तैयार किया है। आइए विस्तार से जानते हैं साल 2025 की उन 5 बड़ी उपलब्धियों के बारे में जिन्होंने भाजपा को अजेय बना दिया है।
1. केरल में 'लाल किले' पर चोट: तिरुवनंतपुरम में ऐतिहासिक जीत
साल का सबसे चौंकाने वाला और रणनीतिक परिणाम दक्षिण भारत से आया। केरल, जिसे वामपंथी दलों का अभेद्य गढ़ माना जाता है, वहां भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनावों में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई।
- तिरुवनंतपुरम फतह: राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए वामपंथी दलों के वर्चस्व को चुनौती दी। यह जीत केवल एक नगर निगम की नहीं थी, बल्कि यह दक्षिण भारत में भाजपा की स्वीकार्यता का प्रमाण थी।
- भविष्य की राह: विश्लेषकों का मानना है कि साल 2025 के अंत में मिली यह सफलता केरल और तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक 'लॉन्चपैड' साबित होगी। भाजपा ने साबित कर दिया है कि वह दक्षिण में अब केवल एक 'वोट कटवा' पार्टी नहीं, बल्कि सत्ता की दावेदार है।
2. बिहार विधानसभा: 200+ सीटों के साथ 'सुनामी'
अक्टूबर-नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों ने विपक्ष के होश उड़ा दिए। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतकर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया।
- आंकड़ों का खेल: भाजपा को 89 और जदयू को 85 सीटें मिलीं। अन्य सहयोगियों के साथ यह आंकड़ा 200 के पार चला गया।
- विपक्ष धराशायी: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायकों की संख्या आधी रह गई और कांग्रेस का अस्तित्व नगण्य हो गया। 2010 के बाद यह एनडीए का सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, जिसने यह स्थापित कर दिया कि बिहार की जनता अब भी डबल इंजन सरकार पर भरोसा करती है।
3. दिल्ली का 'बनवास' खत्म: 32 साल बाद सत्ता में वापसी
भाजपा के लिए सबसे भावुक और प्रतीक्षित जीत देश की राजधानी दिल्ली में रही। 1993 के बाद से दिल्ली की सत्ता से दूर रही भाजपा ने 2025 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 48 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
पुनरुत्थान: यह जीत भाजपा के संगठनात्मक संघर्ष और प्रधानमंत्री मोदी के विजन की जीत थी। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को हराकर सत्ता में लौटना भाजपा के 'राजनीतिक पुनरुत्थान' का प्रतीक बन गया। दिल्ली की जीत ने यह संदेश दिया कि शहरी मतदाता अब राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दे पर भाजपा के साथ खड़ा है।
4. उपराष्ट्रपति चुनाव: एनडीए की कूटनीतिक जीत
अगस्त महीने में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव ने एनडीए की एकजुटता और रणनीतिक कौशल को प्रदर्शित किया। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया।
- मुकाबला: विपक्ष ने बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा था, लेकिन राधाकृष्णन ने उन्हें भारी मतों से शिकस्त दी।
- दक्षिण संदेश: एक दक्षिण भारतीय नेता को उपराष्ट्रपति बनाकर भाजपा ने 'उत्तर-दक्षिण' के विभाजनकारी नैरेटिव को भी करारा जवाब दिया। यह जीत एनडीए की बढ़ती राजनीतिक मजबूती का स्पष्ट संकेत थी।
5. 'विकसित भारत' की गारंटी: रोजगार का नया कानून
चुनावी जीतों से परे, भाजपा सरकार ने नीतिगत मोर्चे पर भी एक ऐतिहासिक कदम उठाया। दिसंबर 2025 में संसद ने 'विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम' (VB-G RAM G Act, 2025) पारित किया।
- क्या है एक्ट: यह अधिनियम मनरेगा (MGNREGA) का आधुनिक और सशक्त संस्करण है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करना है।
- आर्थिक सुरक्षा: इस कानून के तहत ग्रामीण समुदायों को स्थिर रोजगार और कौशल विकास के अवसर मिलेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इसे मोदी सरकार का 'गेमचेंजर' मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
हमारी राय
साल 2025 भाजपा के लिए केवल चुनावी जीतों का साल नहीं था, बल्कि यह उसके 'पैन इंडिया' (Pan-India) विस्तार का साल था। दिल्ली और बिहार की जीत ने जहां हिंदी पट्टी (Hindi Belt) पर उसकी पकड़ को और मजबूत किया, वहीं केरल के नतीजों ने यह मिथक तोड़ दिया कि भाजपा दक्षिण में विस्तार नहीं कर सकती।
The Trending People का विश्लेषण है कि 'VB-G RAM G Act' जैसे कानूनों को पारित करना यह दर्शाता है कि सरकार चुनावों के साथ-साथ 'अंत्योदय' के अपने मूल मंत्र के प्रति भी समर्पित है। 2025 की ये उपलब्धियां न केवल भाजपा का मनोबल बढ़ाएंगी, बल्कि 2029 के आम चुनावों के लिए एक ठोस नींव भी रखेंगी। विपक्ष के लिए यह साल आत्ममंथन का है, क्योंकि भाजपा अब एक अजेय चुनावी मशीन बन चुकी है।
