सर्राफा बाजार में 'ब्लैक मंडे'—चांदी में ऐतिहासिक गिरावट, 1 घंटे में 21,000 रुपये टूटे भाव, ट्रंप की एक कॉल ने बदला बाजार का मूड
नई दिल्ली/मुंबई, दिनांक: 29 दिसंबर 2025— कमोडिटी बाजार में निवेश करने वालों के लिए सोमवार का दिन किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा। सुरक्षित निवेश (Safe Haven) मानी जाने वाली चांदी की चमक अचानक फीकी पड़ गई और कीमतों में ऐसी जोरदार गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों की सांसें अटका दीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतें ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं। महज एक घंटे के भीतर चांदी करीब 21,000 रुपये प्रति किलो टूट गई।
इस भारी उथल-पुथल के पीछे का कारण कोई आर्थिक डेटा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक (Geopolitical) घटनाक्रम है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के बीच हुई सकारात्मक बातचीत ने युद्ध के बादलों को थोड़ा छांट दिया है, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित निवेश से पैसा निकालकर जोखिम वाले बाजारों में लगाना शुरू कर दिया है।
1 घंटे में 21,000 रुपये की गिरावट: आंकड़ों का खेल
बाजार के जानकारों के मुताबिक, सोमवार को चांदी में जो हुआ, वह विरले ही देखने को मिलता है।
- गिरावट का मंजर: एमसीएक्स पर चांदी ने दिन के कारोबार के दौरान 2,54,174 रुपये प्रति किलो का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर (All-Time High) छू लिया था। लेकिन जैसे ही भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिले, मुनाफावसूली (Profit Booking) की आंधी आ गई।
- ताजा भाव: देखते ही देखते भाव धड़ाम से गिरकर 2,33,120 रुपये प्रति किलो के नीचे आ गए। यानी जिसने ऊपरी स्तर पर खरीदारी की थी, उसे प्रति किलो 21,000 रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा।
ट्रंप-जेलेंस्की फैक्टर: क्यों पलटा बाजार?
बाजार की इस चाल को समझने के लिए हमें अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझना होगा।
सकारात्मक संकेत: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के बीच बातचीत हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बातचीत रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने या तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक रही।
रिस्क ऑन (Risk On): जब युद्ध का खतरा कम होता है, तो निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों (Safe Havens) से पैसा निकालकर शेयर बाजार या अन्य रिस्की एसेट्स में लगाते हैं। इसी 'पैनिक सेलिंग' ने चांदी को नीचे धकेल दिया।अंतरराष्ट्रीय बाजार: 80 डॉलर से 75 डॉलर का सफर
घरेलू बाजार की तरह वैश्विक बाजार में भी चांदी ने गोता लगाया।
- उतार-चढ़ाव: सोमवार को शुरुआती कारोबार में चांदी पहली बार 80 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई थी। लेकिन मुनाफावसूली के चलते यह गिरकर 75 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गई।
- निवेशकों का रुझान: इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि चांदी का फंडामेंटल अभी भी मजबूत है। औद्योगिक मांग और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी के उपयोग के कारण लंबी अवधि में निवेशक अभी भी इस पर भरोसा बनाए हुए हैं।
इससे पहले क्यों आई थी रिकॉर्ड तेजी?
गिरावट से ठीक पहले, सोमवार को चांदी ने लगातार छठे सत्र (Session) में तेजी दर्ज की थी।
कारण: मजबूत वैश्विक संकेत और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों ने निवेशकों को खरीदारी के लिए प्रेरित किया था। एमसीएक्स पर मार्च 2026 डिलीवरी वाला चांदी अनुबंध करीब 6 प्रतिशत उछलकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। व्यापारियों ने डर के माहौल में बड़े पैमाने पर खरीदारी की थी, जिसे अब उन्होंने प्रॉफिट बुक करने के लिए बेच दिया।
विरोधाभास: चांदी टूटी, पर सोना अब भी मजबूत
बाजार का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जहां चांदी में कोहराम मचा था, वहीं सोने की चाल अलग रही। पीली धातु (Gold) ने अपनी चमक बरकरार रखी।
- सोने का भाव: एमसीएक्स पर फरवरी 2026 डिलीवरी वाले सोने का भाव 357 रुपये की बढ़त के साथ 1,40,230 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
- रिकॉर्ड: इससे पहले सोना 1,40,465 रुपये का रिकॉर्ड स्तर भी छू चुका है।
- ग्लोबल गोल्ड: अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) पर सोने का वायदा भाव बढ़कर 4,536.80 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और मंदी की आशंका के चलते सोने पर भरोसा अभी भी कायम है।
हमारी राय
सोमवार को चांदी में आई गिरावट छोटे निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है। कमोडिटी बाजार, विशेषकर चांदी, अपनी अत्यधिक अस्थिरता (High Volatility) के लिए जानी जाती है। एक घंटे में 21,000 रुपये का उतार-चढ़ाव किसी भी निवेशक की पूंजी को साफ कर सकता है।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह गिरावट एक 'करेक्शन' (Correction) है, न कि मंदी। ट्रंप और जेलेंस्की की बातचीत ने बाजार को सांस लेने का मौका दिया है, लेकिन युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। जो निवेशक लंबी अवधि के लिए बने रहना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट खरीदारी का मौका हो सकती है, लेकिन इंट्रा-डे ट्रेड्स (Intra-day Traders) को अभी बेहद सावधान रहने की जरूरत है। सोने की मजबूती यह संकेत देती है कि बाजार में अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
