मुलताई की सड़कों पर 'जाम' का जंजाल—बिना पार्किंग चल रहे बैंक और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सरकारी जमीन पर कब्जा और नियमों की उड़ रही धज्जियांAi generated image
मुलताई (बैतूल), दिनांक: 30 दिसंबर 2025 | ग्राउंड रिपोर्ट: रवि खवसे — पवित्र ताप्ती नगरी मुलताई (Multai), जो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए जानी जाती है, इन दिनों एक गंभीर नागरिक समस्या से जूझ रही है। शहर का विकास तो हो रहा है, लेकिन यह विकास अनियोजित और नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। शहर के हृदय स्थल और मुख्य मार्गों पर संचालित हो रहे कई प्रमुख बैंक और विशाल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बिना पार्किंग व्यवस्था के चल रहे हैं। इसका खामियाजा आम जनता को रोजमर्रा के ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय जागरूक नागरिक रवि खवसे ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि शहर में कई व्यावसायिक संस्थान न केवल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर उसे अपनी 'निजी पार्किंग' की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
मुनाफा अंदर, मुसीबत सड़क पर: बैंकों की मनमानी
मुलताई में बैंकिंग सेवाएं विस्तार ले रही हैं, लेकिन इन बैंकों ने अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया है।
- ग्राहकों की परेशानी: रवि खवसे का कहना है कि शहर में कुछ बैंक और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां पार्किंग के लिए या तो जगह ही नहीं है, या फिर वह नाममात्र की है जो वाहनों की संख्या के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
- सड़क बनी पार्किंग: जब ग्राहक बैंक या शॉपिंग के लिए आते हैं, तो मजबूरन उन्हें अपने दोपहिया और चार पहिया वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़ते हैं। इससे मुख्य सड़क संकरी हो जाती है और आवागमन बाधित होता है।
सवाल यह उठता है कि जिस भवन में बैंक संचालित हो रहा है, उसे अनुमति देते समय पार्किंग की शर्त का पालन क्यों नहीं सुनिश्चित किया गया? यह सीधे तौर पर नगर पालिका और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों का उल्लंघन है।
जानलेवा होता ट्रैफिक और अतिक्रमण का खेल
बिना पार्किंग वाले इन भवनों के कारण मुलताई की यातायात व्यवस्था (Traffic System) वेंटिलेटर पर आ गई है।
- दुर्घटनाओं का खतरा: सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहनों की वजह से आए दिन जाम लगता है। कई बार पैदल चलने वालों और स्कूली बच्चों के लिए रास्ता इतना कम बचता है कि वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
- सरकारी जमीन पर कब्जा: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों ने अपनी पार्किंग जगह नहीं छोड़ी, उन्होंने बड़ी चालाकी से सरकारी जमीन (सड़क और फुटपाथ) पर पक्का अतिक्रमण कर लिया है। रवि खवसे का आरोप है कि कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर रैंप या सीढ़ियां बनाकर कब्जा जमा लिया है, जिससे सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हो रहा है।
बेसमेंट का 'काला सच': पार्किंग की जगह दुकानें?
इस पूरे मामले में एक बड़ा भ्रष्टाचार 'बेसमेंट' (Basement) के उपयोग को लेकर भी नजर आता है। नियमानुसार, कमर्शियल बिल्डिंग्स में बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोरेज के लिए होना चाहिए।
- नक्शे और हकीकत: आरोप है कि कुछ व्यावसायिक भवनों के नक्शे तो पार्किंग दिखाकर पास करवा लिए गए, लेकिन हकीकत में वहां दुकानें बना दी गईं या गोदाम संचालित हो रहे हैं।
- मिलीभगत: यह जांच का विषय है कि बिना पार्किंग स्पेस छोड़े, इन बहुमंजिला इमारतों के नक्शे कैसे पास हो गए? क्या अधिकारियों ने मौका मुआयना नहीं किया? कुछ बेसमेंट तो बिना अनुमति के ही खोद दिए गए हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक हैं।
जांच की मांग: प्रशासन कब तोड़ेगा नींद?
रवि खवसे और शहर के अन्य नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मुलताई में संचालित सभी बैंकों और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की पार्किंग व्यवस्था की तत्काल और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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जांच के बिंदु:
- किन बैंकों के पास अपनी वैध पार्किंग है?
- किन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स ने बेसमेंट का व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया है?
- सरकारी जमीन पर किसने कितना अतिक्रमण किया है?
नागरिकों का कहना है कि केवल चालान काटने से समस्या हल नहीं होगी। जिन भवनों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए।
हमारी राय
मुलताई में पार्किंग की समस्या केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत है। जब एक आम आदमी छोटा सा घर बनाता है, तो उसे नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और बैंक बिना पार्किंग के धड़ल्ले से चल रहे हैं।
The Trending People का मानना है कि जिला प्रशासन और नगर पालिका को तत्काल एक विशेष दल गठित कर 'सर्वेक्षण' कराना चाहिए। जो बैंक या कॉम्प्लेक्स पार्किंग उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं, उन्हें शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से बाहर शिफ्ट करने या सील करने की कार्रवाई होनी चाहिए। सड़क जनता के चलने के लिए है, किसी निजी संस्थान की मुफ्त पार्किंग के लिए नहीं। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मुलताई की सड़कें चलने लायक नहीं रह जाएंगी।

