बांग्लादेश की 'आयरन लेडी' का अंत—बेगम खालिदा जिया नहीं रहीं, खराब सेहत के बावजूद चुनाव लड़ने की थी जिद, अब कौन संभालेगा बोगरा-7?File: Andrew Biraj/Reuters
ढाका/नई दिल्ली, दिनांक: 30 दिसंबर 2025 — दक्षिण एशिया की राजनीति के सबसे प्रभावशाली और जुझारू चेहरों में से एक, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया (Begum Khaleda Zia) का मंगलवार को निधन हो गया। 80 वर्ष की आयु में उन्होंने ढाका के अपोलो अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। उनका जाना केवल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक युग की समाप्ति है।
खालिदा जिया का निधन ऐसे नाजुक समय में हुआ है जब बांग्लादेश फरवरी में होने वाले आम चुनावों के मुहाने पर खड़ा है। उनके समर्थक उम्मीद लगाए बैठे थे कि 'मैडम जिया' एक बार फिर सत्ता में वापसी करेंगी, लेकिन नियति ने कुछ और ही तय कर रखा था।
फज्र की नमाज के बाद विदाई: 36 दिन की जंग हारीं
बीएनपी के आधिकारिक बयान के मुताबिक, बेगम जिया ने मंगलवार सुबह 6 बजे अंतिम सांस ली। पार्टी ने बताया कि उनका निधन फज्र (सुबह) की नमाज के ठीक बाद हुआ।
- अस्पताल में भर्ती: वे पिछले 36 दिनों से अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं। उन्हें 23 नवंबर को दिल और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण (Infection) की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
- स्वास्थ्य संघर्ष: खालिदा जिया का शरीर कई पुरानी बीमारियों का घर बन चुका था। वे लंबे समय से लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis), गंभीर गठिया, अनियंत्रित मधुमेह और किडनी की समस्याओं से जूझ रही थीं। इसके अलावा, उनकी आंखों और दिल पर भी उम्र और बीमारी का गहरा असर था।
पार्टी ने भावुक अपील करते हुए कहा, "हम उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और देशवासियों से अनुरोध करते हैं कि वे हमारी नेता के लिए दुआ करें।"
ऐतिहासिक विरासत: मुस्लिम दुनिया की दूसरी महिला पीएम
खालिदा जिया का कद बांग्लादेश की राजनीति में कितना बड़ा था, इसका अंदाजा उनके रिकॉर्ड्स से लगाया जा सकता है।
- बांग्लादेश की पहली महिला पीएम: 1991 में प्रधानमंत्री बनकर उन्होंने इतिहास रचा था। वे बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं।
- वैश्विक पहचान: पाकिस्तान की बेनजीर भुट्टो के बाद, खालिदा जिया मुस्लिम दुनिया की दूसरी महिला प्रधानमंत्री थीं जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से किसी देश का नेतृत्व किया।
- कार्यकाल: उन्होंने 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक दो बार देश की बागडोर संभाली।
चुनावी दांव: खराब सेहत के बावजूद मैदान में थीं
खालिदा जिया की इच्छाशक्ति का प्रमाण यह था कि इतनी गंभीर बीमारियों के बावजूद पार्टी ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया था।
- बोगरा-7 का किला: उन्होंने आगामी चुनावों के लिए बोगरा-7 सीट से नामांकन दाखिल किया था। यह सीट बीएनपी के संस्थापक और उनके पति जियाउर रहमान का गृह क्षेत्र है, जिसे पार्टी का अभेद्य किला माना जाता है। खालिदा यहां से 1991, 1996 और 2001 में जीत चुकी थीं।
- बैकअप प्लान: पार्टी को उनकी नाजुक हालत का अंदाजा था, इसलिए एक रणनीतिक फैसला लिया गया था। बीएनपी ने स्पष्ट किया था कि खालिदा जिया की उम्मीदवारी को आगे बढ़ाया जाएगा, लेकिन अगर वे चुनाव लड़ने में पूरी तरह असमर्थ होती हैं, तो ऐन मौके पर दूसरा उम्मीदवार (डमी कैंडिडेट) मैदान में उतारा जाएगा। अब उनके निधन के बाद पार्टी को इसी 'प्लान बी' पर काम करना होगा।
BNP के सामने अस्तित्व का संकट
खालिदा जिया केवल एक नेता नहीं, बल्कि बीएनपी की 'गोंद' थीं जिन्होंने पार्टी को बिखराव से बचाए रखा। चुनाव से ठीक पहले उनका जाना पार्टी के मनोबल को तोड़ने वाला है।
- नेतृत्व की शून्यता: उनके बेटे तारिक रहमान के निर्वासन में होने के कारण, पार्टी के सामने जमीनी स्तर पर नेतृत्व का संकट खड़ा हो सकता है।
- सहानुभूति की लहर: हालांकि, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि उनका निधन चुनावों में बीएनपी के पक्ष में एक बड़ी 'सहानुभूति लहर' (Sympathy Wave) पैदा कर सकता है। जनता अपनी दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए भारी संख्या में वोट कर सकती है।
हमारी राय
बेगम खालिदा जिया का जीवन संघर्ष और सत्ता का एक अद्भुत मिश्रण था। एक घरेलू महिला से लेकर तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर उतरने और फिर प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक रहा है।
The Trending People का मानना है कि उनका निधन बांग्लादेश की राजनीति में 'शक्ति संतुलन' (Balance of Power) को बदल सकता है। शेख हसीना की सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलनों को अब एक नया भावनात्मक आधार मिल सकता है। बोगरा-7 सीट अब केवल एक चुनाव क्षेत्र नहीं, बल्कि खालिदा जिया की विरासत की लड़ाई का मैदान बन जाएगी। बांग्लादेश ने आज अपनी राजनीति का एक ऐसा स्तंभ खो दिया है, जिसके इर्द-गिर्द पिछले तीन दशकों का इतिहास लिखा गया था।
