छत्तीसगढ़ में 'हड़ताल' का हाहाकार—इंद्रावती भवन में जड़े ताले, अफसरों को गेट पर रोका, 'मोदी की गारंटी' पूरी करने की मांग पर अड़े कर्मचारीSoure: HT Media
रायपुर/नवा रायपुर, दिनांक: 30 दिसंबर 2025— छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और प्रशासनिक केंद्र नवा रायपुर में सरकारी कामकाज पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन द्वारा बुलाई गई तीन दिवसीय हड़ताल (Three-Day Strike) ने सरकार की नाक में दम कर दिया है। स्थिति यह है कि राज्य सरकार के सबसे बड़े दूसरे विभाग संचालनालय, इंद्रावती भवन (Indravati Bhawan) में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।
हड़ताल का असर इतना व्यापक है कि इंद्रावती भवन के सभी प्रमुख विभागों में ताले लटके नजर आए। गुस्साए कर्मचारियों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि विभाग प्रमुखों (HODs) और वरिष्ठ अधिकारियों को भी दफ्तर के भीतर जाने से रोक दिया। यह प्रदर्शन अब साय सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
इंद्रावती भवन में तालाबंदी: "साहब, अंदर जाना मना है"
नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन, जहां सरकार के सभी विभागाध्यक्ष बैठते हैं, सोमवार सुबह से ही रणक्षेत्र बना रहा। सुबह 10:30 बजे जैसे ही अधिकारियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ, गेट नंबर-2 पर जमा फेडरेशन के पदाधिकारियों और कर्मचारी नेताओं ने उन्हें रोक दिया।
- घेराव: हड़तालियों ने स्पष्ट कर दिया कि "हड़ताल है, इसलिए कोई भी अंदर नहीं जाएगा।" कई बड़े अधिकारी अपनी गाड़ियों से उतरे और कुछ देर बहस के बाद वापस लौटने को मजबूर हो गए।
- जनता परेशान: दूर-दराज के इलाकों से अपने काम करवाने आए आम लोगों को सबसे ज्यादा निराशा हाथ लगी। घंटों इंतजार के बाद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
गूंजे नारे: "साय सरकार, मोदी गारंटी पूरी करो"
प्रदर्शनकारी कर्मचारी केवल वेतन वृद्धि की मांग नहीं कर रहे, बल्कि वे सरकार को उसके चुनावी वादों की याद दिला रहे हैं। गेट पर "मोदी की गारंटी पूरी करो" और "घोषणा पत्र के वादे निभाओ" के नारे गूंजते रहे।
फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा:
"यह तो सिर्फ तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल है। यदि साय सरकार कर्मचारियों की जायज मांगें पूरी नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। प्रदेश की जनता को होने वाली परेशानियों के लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार होगी।"
रायपुर से तहसील तक: कामकाज ठप
हड़ताल का असर केवल संचालनालय तक सीमित नहीं रहा। रायपुर के कलेक्टर कार्यालय, तहसील कार्यालय और रजिस्ट्री दफ्तरों में भी सन्नाटा पसरा रहा।
- तृतीय वर्ग कर्मचारी: सरकारी मशीनरी की रीढ़ माने जाने वाले तृतीय वर्ग के कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से काम बंद कर दिया।
- फाइलें अटकीं: दफ्तरों में केवल इक्का-दुक्का बड़े अफसर फाइलें निपटाते नजर आए, लेकिन बाबू और सहायकों के बिना कोई भी काम आगे नहीं बढ़ सका। राजस्व, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए।
अनियमित कर्मचारियों का शक्ति प्रदर्शन: "हमें पक्का करो"
एक तरफ नियमित कर्मचारी हड़ताल पर थे, तो दूसरी तरफ अनियमित कर्मचारियों ने नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर मोर्चा खोल दिया।
- मांग: छत्तीसगढ़ बिहान संयुक्त कैडर, संविदा शिक्षक संघ और विद्युत ठेका श्रमिक विकास जैसे संगठनों ने नियमितीकरण (Regularization) और निकाले गए साथियों की बहाली की मांग की।
- ज्ञापन: भारी भीड़ के साथ प्रदर्शन करते हुए इन कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांग है कि आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को बंद कर सभी को सरकारी सिस्टम में समायोजित किया जाए।
क्या हैं फेडरेशन की प्रमुख मांगें?
कर्मचारी संगठन आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनकी प्रमुख मांगों की सूची लंबी है:
- महंगाई भत्ता (DA): केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता लागू किया जाए और एरियर्स की राशि जीपीएफ (GPF) खाते में जमा हो।
- वेतनमान: सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
- वेतन विसंगति: पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर लिपिकों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों की वेतन विसंगति दूर की जाए।
- सेवा लाभ: शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए संपूर्ण लाभ मिले।
- अनुकंपा नियुक्ति: नियमों में 10 प्रतिशत सीलिंग को शिथिल किया जाए।
- सेवानिवृत्ति आयु: सभी विभागों में समानता लाते हुए रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष की जाए।
- कैशलेस इलाज: प्रदेश में कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू हो।
- अवकाश नकदीकरण: अर्जित अवकाश (Earned Leave) के नकदीकरण की सीमा 300 दिन की जाए।
हमारी राय
लोकतंत्र में हड़ताल कर्मचारियों का अधिकार है, लेकिन जब इससे आम जनता पिसने लगती है, तो सवाल उठना लाजमी है। इंद्रावती भवन में तालाबंदी और अधिकारियों को रोकना एक आक्रामक कदम है जो सरकार और कर्मचारियों के बीच की खाई को और चौड़ा कर सकता है।
The Trending People का मानना है कि 'मोदी की गारंटी' के नाम पर सत्ता में आई साय सरकार को कर्मचारियों के असंतोष को गंभीरता से लेना चाहिए। महंगाई भत्ता और नियमितीकरण जैसे मुद्दों पर टालमटोल रवैया प्रशासनिक दक्षता को दीमक की तरह चाट रहा है। वहीं, कर्मचारी नेताओं को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी लड़ाई में आम आदमी की मुसीबतें न बढ़ें। अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी प्रदेश की अर्थव्यवस्था और व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। संवाद का रास्ता ही एकमात्र विकल्प है।
