सोशल मीडिया पर 'गंदगी' फैलाने वालों की खैर नहीं—सरकार ने चलाया डंडा, कंपनियों को अल्टीमेटम: "अश्लील कंटेंट हटाओ या मुकदमे के लिए तैयार रहो"
नई दिल्ली, दिनांक: 31 दिसंबर 2025 — डिजिटल दुनिया में अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में परोसे जा रहे अश्लील, आपत्तिजनक और गैरकानूनी कंटेंट (Obscene Content) पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने अब 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपना ली है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया दिग्गजों और ऑनलाइन इंटरमीडियरीज को एक बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। सरकार ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म से गंदगी साफ करें, अन्यथा उन्हें गंभीर कानूनी परिणामों और मुकदमों का सामना करना पड़ेगा।
29 दिसंबर 2025 को जारी हुई इस नई और कड़ी एडवाइजरी ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के मुख्यालयों में हड़कंप मचा दिया है। सरकार का यह कदम डिजिटल स्पेस को सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में अब तक का सबसे आक्रामक प्रयास माना जा रहा है।
29 दिसंबर की एडवाइजरी: क्या है सरकार का फरमान?
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने अपनी नवीनतम एडवाइजरी में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे तत्काल प्रभाव से अपने नियमों और तकनीकी सिस्टम की समीक्षा करें।
- सफाई अभियान: एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी तरह के अश्लील, भद्दे, पोर्नोग्राफिक (Pornographic) और भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को बिना किसी देरी के हटाया जाए।
- समय सीमा: सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि "समीक्षा कर रहे हैं" जैसा बहाना अब नहीं चलेगा। कार्रवाई तुरंत और प्रभावी होनी चाहिए।
'सेफ हार्बर' पर खतरा: ढिलाई बरती तो ढाल छिन जाएगी
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 79 की याद दिलाई है, जो उन्हें कानूनी सुरक्षा कवच या 'सेफ हार्बर' (Safe Harbor) प्रदान करती है।
- क्या है नियम: धारा 79 के तहत, इंटरमीडियरीज (बिचौलिए) तीसरे पक्ष (यूजर्स) द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए जिम्मेदार नहीं होते, बशर्ते वे 'उचित सावधानी' (Due Diligence) बरतें।
- चेतावनी: सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर प्लेटफॉर्म्स ने अश्लील कंटेंट रोकने की अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो यह कानूनी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म को भी अपराधी की तरह ही जिम्मेदार माना जाएगा और उन पर सीधे मुकदमे चलेंगे।
BNS और IT एक्ट का डबल अटैक
सरकार ने केवल चेतावनी नहीं दी है, बल्कि सजा का प्रावधान भी गिना दिया है। एडवाइजरी के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने पर प्लेटफॉर्म्स, उनके अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर यूजर्स के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
- आईटी एक्ट: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भारी जुर्माना और प्रतिबंध।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS): नए आपराधिक कानूनों (BNS 2023) के तहत अश्लीलता फैलाने और समाज में वैमनस्य पैदा करने की धाराओं में आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं, जिनमें जेल की सजा का भी प्रावधान है।
कंटेंट मॉडरेशन: "एल्गोरिदम सुधारे या इंसान बिठाएं"
MeitY ने कंपनियों से कहा है कि वे अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम (Content Moderation System) और आंतरिक कंप्लायंस फ्रेमवर्क की तुरंत समीक्षा करें।
- शिकायत: सरकार का मानना है कि ऑटोमेटेड फिल्टर्स (AI) अक्सर स्थानीय संदर्भों और अश्लील कंटेंट को पकड़ने में विफल हो रहे हैं। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सिस्टम भारतीय कानूनों और सामाजिक मर्यादाओं के अनुरूप हों।
- आदेश का पालन: कोर्ट या सरकारी एजेंसी से कंटेंट हटाने का आदेश (Take-down Notice) मिलते ही तय समय सीमा (अक्सर 24 से 36 घंटे) के भीतर कार्रवाई अनिवार्य होगी। देरी को अब 'तकनीकी खामी' नहीं, बल्कि 'जानबूझकर की गई लापरवाही' माना जाएगा।
क्यों पड़ी इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' की जरूरत?
यह एडवाइजरी अचानक नहीं आई है। इसके पीछे शिकायतों का एक लंबा पुलिंदा है।
- डीपफेक और अश्लीलता: हाल के दिनों में डीपफेक (Deepfake) वीडियो और रील के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता ने आम लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया था।
- न्यायालय का दबाव: कई उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट ने भी सोशल मीडिया पर अनियंत्रित कंटेंट को लेकर चिंता जताई थी और सरकार से सख्त कदम उठाने को कहा था। संसद के शीतकालीन सत्र में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई थी।
हमारी राय
डिजिटल क्रांति ने हमें अभिव्यक्ति की आजादी दी है, लेकिन आजादी का मतलब अराजकता या अश्लीलता नहीं हो सकता। केंद्र सरकार की यह एडवाइजरी सही दिशा में उठाया गया एक अनिवार्य कदम है। सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जनमत बनाने वाला हथियार है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 'बिग टेक' कंपनियों की मनमानी पर लगाम कसना जरूरी था। वे अक्सर अमेरिकी कानूनों की दुहाई देकर भारतीय कानूनों की अनदेखी करते रहे हैं। धारा 79 के तहत सुरक्षा कवच हटाना सरकार का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है। हालांकि, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि 'अश्लीलता' की परिभाषा स्पष्ट हो ताकि इसका दुरुपयोग कलात्मक अभिव्यक्ति या वाजिब आलोचना को दबाने के लिए न किया जाए। सफाई जरूरी है, लेकिन सेंसरशिप और विनियमन के बीच की लकीर भी साफ होनी चाहिए।
