जनरल डिब्बे के यात्रियों के लिए 'गुड न्यूज़'—RailOne ऐप से टिकट बुक करने पर मिलेगी 3% की छूट, लाइन में लगने का झंझट खत्म और पैसे की बचत भी
नई दिल्ली, दिनांक: 31 दिसंबर 2025 — भारतीय रेलवे (Indian Railways), जिसे देश की जीवन रेखा कहा जाता है, ने अपने सबसे बड़े यात्री वर्ग यानी सामान्य श्रेणी (General Class) के मुसाफिरों को नए साल का एक बेहतरीन तोहफा दिया है। अगर आप भी उन लाखों लोगों में शामिल हैं जो रोजाना जनरल टिकट के लिए लंबी लाइनों में धक्का-मुक्की सहते हैं, तो यह खबर आपको राहत की सांस देगी। रेलवे ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म 'RailOne App' को बढ़ावा देने और कैशलेस ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहित करने के लिए एक बड़ी घोषणा की है।
रेलवे के नए आदेश के मुताबिक, अब RailOne ऐप के जरिए अनारक्षित (Unreserved) जनरल टिकट बुक करने पर यात्रियों को तीन प्रतिशत (3%) की छूट दी जाएगी। यह सुविधा मकर संक्रांति के शुभ अवसर यानी 14 जनवरी 2026 से शुरू होकर 14 जुलाई 2026 तक छह महीने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू रहेगी। इस फैसले का सीधा असर न केवल यात्रियों की जेब पर पड़ेगा, बल्कि स्टेशनों पर लगने वाली भीड़ को भी कम करने में मदद मिलेगी।
14 जनवरी से लागू होगा 'बचत' का फॉर्मूला
रेल मंत्रालय ने इस योजना को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए कमर कस ली है। मंत्रालय ने रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS - Centre for Railway Information Systems) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि RailOne ऐप में जरूरी सॉफ्टवेयर अपडेट तत्काल प्रभाव से किए जाएं।
- ऑटोमैटिक डिस्काउंट: 14 जनवरी से जैसे ही आप ऐप पर टिकट बुक करेंगे, सिस्टम अपने आप किराए में 3% की कटौती कर देगा। आपको इसके लिए कोई कूपन कोड लगाने की जरूरत नहीं होगी।
- उद्देश्य: अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अनारक्षित टिकटिंग प्रक्रिया को सुगम बनाने (Ease of Ticketing) और डिजिटल इंडिया मिशन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए उठाया गया है।
R-Wallet की बाध्यता खत्म: अब UPI से भी मिलेगी छूट
इस नई घोषणा में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव भुगतान के तरीकों को लेकर है। पहले डिजिटल छूट के नियम काफी सीमित थे, लेकिन अब दायरा बढ़ा दिया गया है।
पुराना नियम: इससे पहले, RailOne ऐप पर जनरल टिकट बुकिंग के दौरान केवल R-Wallet (रेलवे वॉलेट) से भुगतान करने पर ही कैशबैक या बोनस का प्रावधान था। इसके लिए यात्रियों को पहले वॉलेट रिचार्ज करना पड़ता था, जो कई लोगों को झंझट लगता था।
नया नियम: नई योजना के तहत अब यह सुविधा केवल R-Wallet तक सीमित नहीं रहेगी।
मल्टीपल ऑप्शन: यात्री अब यूपीआई (UPI), डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग जैसे किसी भी डिजिटल माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। भुगतान का तरीका चाहे जो भी हो, 3 प्रतिशत की छूट हर हाल में मिलेगी। यह लचीलापन (Flexibility) डिजिटल पेमेंट्स को नई रफ्तार देगा।
भीड़तंत्र से मुक्ति: मेट्रो और सबअर्बन यात्रियों को बड़ा फायदा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस नए प्रावधान का सबसे बड़ा असर मेट्रो शहरों और उपनगरीय (Suburban) इलाकों में दिखेगा। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और दिल्ली जैसे शहरों में जहां लाखों लोग रोजाना लोकल ट्रेनों या पैसेंजर ट्रेनों से सफर करते हैं, वहां टिकट काउंटरों पर सुबह-शाम भारी भीड़ रहती है।
- समय की बचत: 3% की छूट एक प्रोत्साहन (Incentive) है जो लोगों को लाइन छोड़कर मोबाइल की तरफ मोड़ेगी। जब मोबाइल से टिकट बुक करना सस्ता और तेज होगा, तो काउंटर पर भीड़ अपने आप कम हो जाएगी।
- पेपरलेस सफर: इससे कागज की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
RailOne ऐप: रेलवे का 'डिजिटल काउंटर'
RailOne ऐप को रेलवे ने अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट और सीजन पास (MST) के लिए एक 'सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म' के रूप में विकसित किया है।
- सुविधाएं: यात्री अब स्टेशन से एक निश्चित दूरी (जियो-फेंसिंग के दायरे में) पर रहते हुए भी अपना टिकट बुक कर सकते हैं।
- आसानी: ऐप का इंटरफेस यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है ताकि कम पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से टिकट बुक कर सकें। अब यात्रियों को ट्रेन छूटने के डर से घंटों पहले स्टेशन पहुंचने की जरूरत नहीं होगी; मोबाइल निकाला, टिकट बुक किया और सफर शुरू।
हमारी राय
भारतीय रेलवे का यह कदम 'डिजिटल समावेशन' (Digital Inclusion) की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है। अक्सर देखा गया है कि डिजिटल सुविधाएं एसी और रिजर्वेशन क्लास तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन जनरल क्लास के यात्रियों को सीधे आर्थिक लाभ देना एक सराहनीय पहल है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 3% की छूट भले ही छोटी लगे, लेकिन एक दैनिक यात्री के लिए महीने भर में यह एक अच्छी बचत बन सकती है। सबसे बड़ी बचत 'समय' और 'सम्मान' की है—लाइन में धक्के खाने से मुक्ति। हालांकि, रेलवे को यह सुनिश्चित करना होगा कि RailOne ऐप का सर्वर पीक आवर्स में लोड संभाल सके और दूर-दराज के इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या इस सुविधा में बाधा न बने। अगर यह सफल रहा, तो यह भारतीय रेल की छवि बदलने वाला कदम साबित होगा।
