US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच 'इस्लामाबाद समझौता', पाकिस्तान बना मध्यस्थ, तुरंत खुलेगा 'होर्मुज स्ट्रेट'
इस्लामाबाद (विशेष रिपोर्ट): पश्चिम एशिया में मंडराते युद्ध के बादलों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बहुप्रतीक्षित 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MOU) पर डिजिटल हस्ताक्षर कर दिए हैं।
'अमर उजाला' और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरी शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस एमओयू पर सह-हस्ताक्षर किए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, हटेगी नौसैनिक नाकाबंदी
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस ऐतिहासिक कदम की पुष्टि की। पीएम शहबाज शरीफ ने बताया कि समझौते को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। इसके तहत, ईरान रणनीतिक रूप से अहम 'होर्मुज स्ट्रेट' को समुद्री यातायात के लिए तुरंत खोल देगा, जबकि अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी हटा लेगा। शरीफ ने शांति के प्रति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिबद्धता और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई सहित ईरानी वार्ताकारों के सब्र की जमकर सराहना की।
विशेषज्ञों के सवाल और शंकाएं
भले ही यह समझौता राहत देने वाला हो, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसके भविष्य को लेकर सशंकित हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराना अविश्वास इतनी जल्दी खत्म नहीं हो सकता। इसके अलावा, जिस पाकिस्तान की नीतियां हमेशा आतंकवाद को पनाह देने वाली रही हैं, उसका 'शांति दूत' बनना भी इस समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।
हमारी राय में (Final Thoughts)
hindi.thetrendingpeople.com के कूटनीतिक डेस्क की राय में, 'इस्लामाबाद एमओयू' वैश्विक बाजार (खासकर तेल आपूर्ति) के लिए एक बड़ी राहत है। होर्मुज स्ट्रेट का खुलना अर्थव्यवस्था को गति देगा। हालांकि, कूटनीति के मोर्चे पर यह देखना दिलचस्प होगा कि आतंकवाद की फैक्ट्री कहा जाने वाला पाकिस्तान, दो धुर विरोधी ताकतों (अमेरिका-ईरान) के बीच शांति की गारंटी कैसे सुनिश्चित करेगा। इस समझौते की असली अग्निपरीक्षा आने वाले कुछ महीनों में होगी।
