नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने और निर्यात को पंख लगाने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को एक बड़ा बयान देते हुए घोषणा की है कि भारत अगले छह महीनों के भीतर कम से कम दो से तीन नए मुक्त व्यापार समझौते (FTA - Free Trade Agreements) लागू करने जा रहा है। इसके साथ ही, वर्ष 2027 में ऐसे तीन से चार और महत्वपूर्ण समझौते लागू होने की प्रबल उम्मीद है।
वाणिज्य मंत्री ने मुंबई में आयोजित 'सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026' को ऑनलाइन (वर्चुअली) संबोधित करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था, वैश्विक कूटनीति और व्यापारिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
9-10 महीने में लागू होंगे सभी 9 मुक्त व्यापार समझौते
पीयूष गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया, "आने वाले छह महीनों में आप कम से कम दो या तीन और बहुत महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते लागू होते देखेंगे। इसके बाद, अगले एक वर्ष में हम कम से कम तीन या चार अन्य महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों को लागू कर रहे होंगे। हमारा लक्ष्य है कि अगले नौ से 10 महीनों में सभी नौ मुक्त व्यापार समझौते पूरी तरह से प्रभाव में आ जाएं।"
घटना की पृष्ठभूमि: किन देशों के साथ हुए हैं समझौते?
पिछले साढ़े तीन वर्षों के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए वाणिज्य मंत्री ने बताया कि भारत ने नौ एफटीए (FTA) को अंतिम रूप देने में सफलता हासिल की है। इन देशों और संघों में मॉरीशस, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, ओमान, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए), ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका शामिल हैं।
वर्तमान स्थिति:
- मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और ईएफटीए (EFTA) संघ के साथ व्यापार समझौते पहले ही लागू हो चुके हैं।
- ओमान: 1 जून को ओमान-एफटीए आधिकारिक तौर पर लागू हो चुका है।
- ब्रिटेन और न्यूजीलैंड: इन दोनों देशों के साथ अलग-अलग व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
उद्योग जगत से दीर्घकालिक निवेश की अपील
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने घरेलू उद्योग जगत और कॉरपोरेट घरानों को भी बड़ा संदेश दिया। उन्होंने उद्योगों से भारत की विकास गाथा पर भरोसा जताते हुए 'दीर्घकालिक पूंजी निवेश' (Long-term Capital Investment) करने का आग्रह किया। मंत्री ने आश्वस्त किया कि जो निवेशक और कंपनियां शुरुआती दौर में अपनी पूंजी का निवेश करेंगी, उन्हें भविष्य में निश्चित रूप से कहीं बेहतर रिटर्न (मुनाफा) प्राप्त होगा। एफटीए लागू होने से भारतीय निर्माताओं के लिए विश्व बाजार के दरवाजे खुल जाएंगे, जिसका सीधा फायदा उद्योगों को मिलेगा।
पश्चिम एशिया संकट और भारत की ऊर्जा रणनीति
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए वाणिज्य मंत्री ने भारत की मजबूत रणनीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने देखा है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान वैश्विक ऊर्जा संकट का भारत ने कितनी कुशलता से सामना किया है। जहां एक ओर पूरी दुनिया गंभीर मुद्रास्फीति (महंगाई) से जूझ रही है, वहीं भारत इसे नियंत्रण में रखने में पूरी तरह सक्षम रहा है।
गोयल ने कहा, ''जब दुनिया संकट से आशंकित थी, खासकर खाड़ी क्षेत्र पर हमारी निर्भरता और वहां से आने वाली ऊर्जा जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरती है... वह प्रभावित हो रही थी, तब भारत ने पहले ही अपने ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण (Diversification) की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।"
इसी कूटनीतिक और रणनीतिक कदम के कारण देश में पेट्रोल-डीजल, विमानन ईंधन (एटीएफ), कारखानों के लिए एलएनजी और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रही। इसके अलावा, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि संकट के समय में भी किसानों के लिए उचित मूल्य पर उर्वरक (Fertilizers) की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
आर्थिक मामलों के जानकारों और ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी तेजी से मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लागू होना भारत को एक 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब' बनाने में गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न केवल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में भारी वृद्धि होगी, बल्कि एमएसएमई (MSME) सेक्टर को भी नए और बड़े बाजार मिलेंगे। पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद भारत की 'ऊर्जा कूटनीति' की भी विशेषज्ञ काफी सराहना कर रहे हैं, क्योंकि इसी वजह से देश में महंगाई की दर बेकाबू नहीं हुई।
हमारी राय (Final Thoughts)
हमारी राय में: भारत सरकार द्वारा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर उठाए जा रहे ये कदम बेहद दूरदर्शी और सराहनीय हैं। एक तरफ जहां FTA के माध्यम से भारतीय उत्पादों (खासकर कपड़ा, आभूषण, और कृषि उत्पादों) की पहुंच अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसान होगी, वहीं ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण देश की आंतरिक आर्थिक सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। हालांकि, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन बड़े व्यापार समझौतों का जमीनी लाभ देश के छोटे व्यापारियों, लघु उद्योगों और किसानों तक सीधे पहुंचे। वर्ष 2026 और 2027 के ये व्यापारिक लक्ष्य निश्चित ही भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेंगे।
