डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक: NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले भारत में 'टेलीग्राम' बैन, दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा विवाद, 15 करोड़ यूजर्स प्रभावित
नई दिल्ली: देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET-UG 2026) के पेपर लीक विवाद ने अब एक अभूतपूर्व डिजिटल टकराव का रूप ले लिया है। शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और पेपर सॉल्वर गैंग्स की कमर तोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद कड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाते हुए लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप 'टेलीग्राम' (Telegram) पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। 21 जून को होने वाली NEET-UG की पुनर्परीक्षा (Re-Exam) के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है, लेकिन इस फैसले ने भारत के करोड़ों इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और तकनीकी जगत में खलबली मचा दी है।
अब यह मामला देश की न्यायपालिका की चौखट पर पहुँच गया है। बैन लगाए जाने के खिलाफ टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर आज ही एक अहम सुनवाई होनी है।
दिल्ली हाईकोर्ट की चौखट पर टेलीग्राम: आज क्या होगा?
सरकार के इस औचक प्रतिबंध के खिलाफ मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम ने तत्काल कानूनी राहत की मांग की है। बुधवार को टेलीग्राम की कानूनी टीम की ओर से इस अत्यावश्यक मामले को दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस करिया (Justice Tejas Karia) की बेंच के समक्ष पेश किया गया।
टेलीग्राम की दलील है कि लाखों छात्रों की परीक्षा के नाम पर देश के 15 करोड़ से अधिक सामान्य यूजर्स के अभिव्यक्ति के अधिकार और संचार के माध्यम को इस तरह रातों-रात बंद नहीं किया जा सकता। जस्टिस तेजस करिया ने मामले की गंभीरता और ऐप के व्यापक यूज़रबेस को देखते हुए याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी है। बुधवार (आज) ही इस मामले पर कोर्ट में विस्तृत सुनवाई होगी, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
प्ले स्टोर से हटा टेलीग्राम, सरकार ने किया 'धारा 69A' का इस्तेमाल
सरकारी आदेश की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के निर्देश मिलते ही दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) ने भारत में अपने 'गूगल प्ले स्टोर' (Google Play Store) से टेलीग्राम ऐप को हटा दिया है। सूत्रों के अनुसार, एप्पल (Apple) का ऐप स्टोर भी जल्द ही इस सरकारी आदेश का पालन करते हुए ऐप को डाउन कर सकता है।
मंत्रालय ने यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A (Section 69A of IT Act) के तहत की है, जो भारत की संप्रभुता, अखंडता या सार्वजनिक व्यवस्था के हित में डिजिटल सामग्री को ब्लॉक करने का अधिकार देती है। इसके तहत टेलीग्राम को 22 जून तक यानी नीट-यूजी की परीक्षा समाप्त होने के अगले दिन तक के लिए सीमित अवधि के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
आखिर क्यों लगा बैन? घटना की पृष्ठभूमि और कारण
इस अभूतपूर्व कदम की जड़ें पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे 'नीट पेपर लीक' महाघोटाले में छिपी हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा पहले आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा में भारी अनियमितताओं और पेपर लीक के पुख्ता सुराग मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट के दखल से 21 जून को री-एग्जाम तय किया गया है।
जांच एजेंसियों और साइबर सेल की रिपोर्ट्स में यह बात प्रमुखता से सामने आई थी कि पेपर लीक माफिया, सॉल्वर गैंग और ठग सबसे ज्यादा टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहे थे। टेलीग्राम पर मौजूद 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन', बड़े ग्रुप्स बनाने की सुविधा और 'अनाम (Anonymous)' रहने की आजादी के कारण यह अपराधियों का पसंदीदा अड्डा बन गया था। अफवाहों, फर्जी प्रश्नपत्रों की बिक्री और छात्रों को गुमराह करने वाले लाखों मैसेज इसी प्लेटफॉर्म से फैलाए जा रहे थे। इन्हीं सब पर लगाम कसने के लिए सरकार ने परीक्षा से ठीक पहले 'कंबल प्रतिबंध' (Blanket Ban) का रास्ता चुना।
पावेल दुरोव का कड़ा ऐतराज: "अपराधी कहीं और चले जाएंगे"
टेलीग्राम के संस्थापक एवं सीईओ पावेल दुरोव (Pavel Durov) ने भारत सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी हताशा जाहिर करते हुए दुरोव ने इसे पूरी तरह से 'अनुचित' करार दिया।
दुरोव ने लिखा, "भारत में हमारे लगभग 15 करोड़ से ज्यादा सक्रिय यूजर्स हैं। इस रोक का सीधा और नकारात्मक असर उन आम नागरिकों पर पड़ रहा है जो काम, परिवार और पढ़ाई के लिए टेलीग्राम पर निर्भर हैं। इस तरह की कार्रवाई से पेपर लीक की वास्तविक समस्या खत्म नहीं होती है। जो अपराधी हैं, वे अपनी गतिविधियों को रोकने वाले नहीं हैं, वे बस दूसरे मैसेजिंग मंचों या डार्क वेब पर शिफ्ट हो जाएंगे।"
NTA का बचाव: "पारदर्शिता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता"
दूसरी ओर, परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने सरकार के इस कदम का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाखों छात्रों के भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
अभिषेक सिंह ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "यह कड़ा कदम परीक्षा को पूरी तरह से निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के एकमात्र उद्देश्य से उठाया गया है। पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए, किसी भी तरह की डिजिटल अनियमितता और अफवाहों के बाजार को रोकने के लिए जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी, हम करेंगे।"
सूत्रों ने यह भी बताया है कि पूर्ण प्रतिबंध से पहले सरकार टेलीग्राम के साथ 'मैसेज एडिट' (Edit Message) करने की सुविधा को अस्थायी रूप से रोकने पर चर्चा कर रही थी। पेपर लीक गैंग अक्सर कोई फर्जी मैसेज डालकर बाद में उसे असली पेपर बताकर एडिट कर देते थे। लेकिन सहमति न बनने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
अन्य प्रमुख मीडिया संस्थानों का नज़रिया
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर देश-विदेश की मीडिया भी बारीकी से नजर रखे हुए है। 'बीबीसी हिंदी' (BBC Hindi) ने अपनी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में डिजिटल अधिकार संगठनों (Digital Rights Organizations) की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल एक्टिविस्ट्स का मानना है कि परीक्षा सुरक्षा के नाम पर पूरे ऐप को बैन करना एक तानाशाही भरा कदम है, जो समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और यह नागरिकों के 'डिजिटल राइट्स' का उल्लंघन है।
वहीं, भारत के प्रमुख अखबार 'अमर उजाला' ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में छात्रों और अभिभावकों की मानसिक स्थिति को बयां किया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, कई छात्र जो अपनी पढ़ाई और नोट्स साझा करने के लिए टेलीग्राम के 'स्टडी ग्रुप्स' पर निर्भर थे, वे इस अचानक बैन से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और उनके लिए परीक्षा से ठीक पहले रिवीजन का संकट खड़ा हो गया है।
हमारी राय में
hindi.thetrendingpeople.com के संपादकीय डेस्क की राय में, नीट पेपर लीक जैसी घटनाएं हमारे शिक्षा तंत्र पर एक बदनुमा दाग हैं और NTA की साख इस समय दांव पर है। सरकार द्वारा पेपर माफियाओं पर नकेल कसने की मंशा बिल्कुल सही है, लेकिन 'मच्छर मारने के लिए तोप चलाने' वाली कहावत यहाँ सटीक बैठती है। कुछ हजार अपराधियों को रोकने के लिए 15 करोड़ आम यूजर्स के संचार माध्यम को रातों-रात ठप कर देना, एक परिपक्व डिजिटल लोकतंत्र का संकेत नहीं है। पावेल दुरोव की यह बात काफी हद तक सही है कि अपराधी वॉट्सऐप (WhatsApp), सिग्नल (Signal) या अन्य किसी प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो जाएंगे। असली जरूरत टेलीग्राम को बैन करने की नहीं, बल्कि अपने सिस्टम के उन 'भीतरघातियों' को पकड़ने की है जहां से पेपर असल में लीक होता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आज दिल्ली हाईकोर्ट छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और नागरिकों के डिजिटल अधिकारों के बीच कैसे संतुलन स्थापित करता है।