#MotivationalStory: पिता को कैंसर ने छीना, मां ने गहने गिरवी रख और सिलाई कर बेटे को भेजा कोटा, अब बना गांव का पहला IITian
कोटा (विशेष रिपोर्ट): शिक्षा की काशी और 'कॅरियर एवं केयर सिटी' के रूप में मशहूर कोटा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में जान हो, तो गरीबी की बेड़ियां भी किसी का रास्ता नहीं रोक सकतीं। कोटा के कोचिंग संस्थानों का सामाजिक बदलाव में क्या योगदान है, इसकी एक जीती-जागती मिसाल ओडिशा के गंजम जिले के एक छोटे से गांव बाकलीकोड़ा से सामने आई है।
यह कहानी है जिगर नायक की और उससे भी ज्यादा यह कहानी है एक मां की अदम्य इच्छाशक्ति की, जिसने अपने जिगर के टुकड़े के लिए हर उस संघर्ष को पार किया, जिसके आगे अक्सर लोग हार मान लेते हैं। अपने गांव और परिवार का पहला आइआइटीयन (IITian) बनने जा रहे जिगर ने यह साबित कर दिया है कि सफलता सुविधाओं की नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत की मोहताज होती है।
कैंसर ने छीन लिया पिता का साया, खत्म हो गई थी जमा पूंजी
जिगर के पिता जूरीनाथ गुजरात की एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करके अपने परिवार का पेट पालते थे। जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी कि अचानक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जूरीनाथ को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया। इलाज के दौरान घर की पाई-पाई और सारी जमा पूंजी खर्च हो गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वर्ष 2020 में पिता का निधन हो गया। घर की माली हालत पहले से ही खस्ता थी, लेकिन पिता के जाने के बाद परिवार पूरी तरह से बिखर गया।
मां ने गिरवी रखे गहने, घर-घर जाकर की सिलाई
पिता के निधन के बाद परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई का पूरा बोझ जिगर की मां अपूर्वा के कंधों पर आ गया। लेकिन अपूर्वा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बेटे के सपनों को मरने नहीं दिया। 'दैनिक जागरण' और 'अमर उजाला' जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में अक्सर ऐसी संघर्ष की कहानियां छपती हैं, लेकिन जिगर की मां का संघर्ष जमीन पर लड़ी गई एक असली जंग है। अपूर्वा ने गोल्ड लोन लिया और घर-घर जाकर सिलाई का काम (टेलरिंग) शुरू किया। दिनभर मशीन चलाकर वे घर का खर्च निकालतीं और एक-एक पैसा जोड़कर जिगर की पढ़ाई के लिए रखती थीं।
सोशल मीडिया से मिली JEE की जानकारी और कोटा का सफर
जिगर को 10वीं कक्षा तक इंजीनियरिंग की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा 'जेईई' (JEE) के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी। एक दिन सोशल मीडिया पर उसने जेईई एग्जाम से जुड़ा एक वीडियो देखा और वहीं से उसके मन में IITian बनने का सपना जाग उठा। जिगर ने ठान लिया कि वह सिर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि अपनी मां की भी जिंदगी बदलकर रहेगा।
वह कोटा आया और लगातार दो साल तक एक रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट के रूप में दिन-रात एक कर दिया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कोचिंग संस्थान ने भी उसकी प्रतिभा को पहचाना और 11वीं-12वीं कक्षा में उसे फीस में छूट प्रदान की।
सफलता ने चूमे कदम: हासिल की शानदार रैंक
दो साल की इस तपस्या का परिणाम बेहद शानदार रहा। जिगर नायक ने जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 17783 और ओबीसी-एनसीएल (OBC-NCL) कैटेगिरी में 4597 रैंक हासिल कर अपना परचम लहराया है। इससे पहले जेईई मेन में भी उसने 98.6143 पर्सेन्टाइल का शानदार स्कोर किया था।
जिगर का कहना है कि उसका संघर्ष सिर्फ अपने लिए नहीं था। उसका एक छोटा भाई भी है जो अभी सातवीं कक्षा में पढ़ रहा है। जिगर भावुक होते हुए कहता है, "मैं चाहता हूं कि मेरी IIT की पढ़ाई पूरी होने के बाद मेरी मां को कभी भी संघर्ष न करना पड़े और मेरे छोटे भाई की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके।"
हमारी राय में
hindi.thetrendingpeople.com के संपादकीय डेस्क की राय में, जिगर नायक और उनकी मां अपूर्वा की यह कहानी केवल एक 'सक्सेस स्टोरी' नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है जो जरा सी असफलता या सुविधाओं की कमी का रोना रोकर अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। यह कहानी बताती है कि सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल किसी की जिंदगी को क्या से क्या बना सकता है। जब एक मां अपने बच्चे के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती है, तो बच्चे का भी फर्ज बनता है कि वह अपनी सफलता से उस मां के हर आंसू की कीमत चुकाए। जिगर ने ठीक वैसा ही किया है। पूरे देश को इस होनहार छात्र और उसकी वीर मां पर गर्व है!
