बंगाल चुनाव में BJP-TMC आमने-सामने, कई सीटों पर कड़ी टक्कर
नेशनल डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का प्रचार अब अंतिम दौर में पहुंच गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कई सीटों पर मुकाबला बेहद कांटेदार हो सकता है।
उत्तर दिनाजपुर, अलीपुरद्वार, साउथ दिनाजपुर, दार्जिलिंग, मुर्शिदाबाद, मालदा और न्यू जलपाईगुड़ी जैसे क्षेत्रों में दोनों दलों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है।
मुद्दों की लड़ाई: SIR और महिला आरक्षण केंद्र में
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने चाय बागानों के करीब साढ़े तीन लाख परिवारों को भूमि का मालिकाना हक देने, SIR (मतदाता सूची संशोधन) और सत्ता परिवर्तन जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है। वहीं ममता बनर्जी ने SIR और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों के जरिए सत्ता विरोधी लहर को संतुलित करने की कोशिश की है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान कई वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने से नाराजगी बढ़ी है, जिसका चुनावी असर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों की राय: किसे मिलेगा फायदा?
बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वाले प्रो. उदयन बंदोपाध्याय का मानना है कि भाजपा और TMC के बीच सीधी टक्कर है और किसी भी दल को फायदा मिल सकता है। उनका कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटने का मुद्दा बड़े स्तर पर विरोध का कारण बना है, जिससे सत्तारूढ़ दल को सहानुभूति मिल सकती है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषक एम. इस्लाम का कहना है कि उत्तर बंगाल में भाजपा का प्रदर्शन पहले मजबूत रहा है, लेकिन इस बार हिंदू वोटों का बंटवारा और SIR विवाद चुनावी समीकरण बदल सकता है।
पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। महिला आरक्षण, मतदाता सूची विवाद और विकास के मुद्दों को लेकर दोनों दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
चुनाव से पहले के अंतिम दिनों में मतदाताओं का रुख किस ओर झुकेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। खासकर जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनके परिवारों की नाराजगी भी अहम भूमिका निभा सकती है।
भाजपा ने हाल ही में दावा किया है कि 707 चाय बागानों के लाखों परिवारों को भूमि का मालिकाना हक देने का काम किया गया है। पार्टी का मानना है कि इससे उसे चुनाव में बढ़त मिल सकती है। हालांकि, इस दावे का वास्तविक असर मतदान के दिन ही स्पष्ट होगा।
हमारी राय में
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि मुद्दों और धारणा की भी परीक्षा है। SIR और महिला आरक्षण जैसे विषयों ने चुनाव को और जटिल बना दिया है। भाजपा जहां विकास और भूमि अधिकार के मुद्दों पर जोर दे रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस सामाजिक योजनाओं और महिला सशक्तिकरण को सामने रख रही है। अंतिम परिणाम काफी हद तक मतदाताओं के अंतिम फैसले और स्थानीय समीकरणों पर निर्भर करेगा।