नई दिल्ली/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही हैं। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच दो सप्ताह के सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति बनने के चंद घंटों बाद ही युद्ध के शोले फिर भड़क उठे हैं। बुधवार को ईरान के लावन द्वीप (Lavan Island) स्थित एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर संदिग्ध हमला हुआ, जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों— कुवैत, यूएई और बहरीन पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए।
स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि सीजफायर की शर्तों को लेकर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है और सभी पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं।
लावन द्वीप की तेल रिफाइनरी पर 'दुश्मन' का हमला
ईरानी अधिकारियों ने लावन द्वीप पर हुए इस हमले को सीधे तौर पर "दुश्मन की साजिश" करार दिया है। ईरानी तेल मंत्रालय के आधिकारिक न्यूज आउटलेट 'शाना' (Shana) और नेशनल ईरानी ऑयल रिफाइनिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा जारी बयान के अनुसार, बुधवार सुबह स्थानीय समय के अनुसार लगभग 10:00 बजे रिफाइनरी केंद्र पर हवाई हमला किया गया।
राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी कर्मचारी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। कंपनी ने बताया कि हमले के तुरंत बाद सुरक्षाबलों और अग्निशमन टीमों को तैनात कर दिया गया, जिन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया और रिफाइनरी परिसर को सुरक्षित कर लिया। हालांकि, इस हमले ने ईरान को भड़का दिया।
ईरान का खौफनाक पलटवार: कुवैत, UAE और बहरीन निशाने पर
लावन द्वीप की घटना का बदला लेते हुए तेहरान ने खाड़ी देशों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। ईरान की सरकारी मीडिया ने गर्व के साथ घोषणा की है कि उसने अमेरिका के सहयोगी देशों कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर नए मिसाइल और ड्रोन दागे हैं।
हमले का असर जमीन पर स्पष्ट देखा जा रहा है:
- कुवैत में भारी नुकसान: कुवैत सरकार ने पुष्टि की है कि घंटों तक चले इन हमलों की ताजा लहर में उसकी अहम तेल फैसिलिटी (Oil Facilities), पावर ग्रिड और डीसैलिनेशन प्लांट (Desalination Plant) को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कुवैत ने ईरान से तत्काल हमले रोकने की सख्त मांग की है।
- यूएई का बचाव अभियान: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को हवा में ही नष्ट कर रहा है और अपनी सीमाओं की रक्षा कर रहा है।
- बहरीन की राजधानी पर खतरा: इस क्षेत्रीय संघर्ष की आंच बहरीन तक भी पहुंच गई है। बहरीन सरकार ने बयान जारी कर बताया कि उनकी राजधानी 'मनामा' (Manama) पर भी हमला किया गया है।
ट्रंप का यू-टर्न और जेडी वेंस का 'नाजुक युद्धविराम'
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि बेहद नाटकीय रही है। कुछ ही दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सभ्यता को पूरी तरह मिटा देने की धमकी दी थी। लेकिन अंतिम समय में वह पीछे हट गए और ईरान, अमेरिका व इजरायल के बीच 14 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति बनी।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने कूटनीतिक यथार्थ को स्वीकार करते हुए इसे एक "नाजुक युद्धविराम" (Fragile Ceasefire) बताया है। पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों ने इस समझौते में मध्यस्थता की थी। लेकिन समझौते की शर्तें पूरी तरह से अस्पष्ट हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान मोर्चे पर पेंच
ईरान ने दावा किया है कि इस सीजफायर समझौते के तहत उसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर शुल्क (Toll) लगाने की नई व्यवस्था को लागू करने की अनुमति मिल गई है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। हालांकि, अमेरिका या किसी अन्य पश्चिमी देश ने इस शर्त पर सहमति की कोई पुष्टि नहीं की है।
वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों का मानना था कि इस समझौते से लेबनान में भी लड़ाई रुक जाएगी। लेकिन इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान समर्थित हिजबुल्लाह (Hezbollah) आतंकवादी समूह के खिलाफ उसका जमीनी आक्रमण और हवाई हमले जारी रहेंगे।
TheTrendingPeople की राय में
ईरान और अमेरिका के बीच हुआ यह सीजफायर कूटनीतिक विजय कम और समय काटने की रणनीति ज्यादा नजर आता है। TheTrendingPeople.com का मानना है कि जब तक सीजफायर की शर्तों (जैसे होर्मुज में जहाजों पर टैक्स और लेबनान पर इजरायली रुख) को लेकर पारदर्शिता नहीं आती, तब तक यह युद्धविराम टिकने वाला नहीं है। कुवैत और लावन द्वीप के तेल केंद्रों पर हुए हमले दर्शाते हैं कि अगला वैश्विक संकट ऊर्जा आपूर्ति (Oil Supply) को लेकर हो सकता है, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। खाड़ी देशों का सीधे युद्ध में घसीटा जाना तीसरे विश्व युद्ध की आहट को और तेज कर रहा है।
