मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के गैस सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एलपीजी की संभावित कमी के असर से अब लोग तेजी से पीएनजी की ओर रुख कर रहे हैं। कई राज्यों में PNG की मांग अचानक बढ़ी है, जिससे पुराने बंद पड़े कनेक्शन भी दोबारा सक्रिय किए जा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 16 अप्रैल तक देशभर में 4.7 लाख से ज्यादा निष्क्रिय PNG कनेक्शन फिर से चालू किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं, जहां करीब 1.2 लाख कनेक्शन दोबारा सक्रिय हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में लगभग 1 लाख कनेक्शन री-एक्टिवेट किए गए।
सिर्फ पुराने कनेक्शन ही नहीं, नए कनेक्शन लेने वालों की संख्या में भी तेजी आई है। देशभर में 5.2 लाख नए PNG कनेक्शन जारी किए गए हैं। इस मामले में भी महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश आगे हैं, जबकि गुजरात में करीब 76 हजार नए रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी के अंत तक देश में 1.6 करोड़ से अधिक घरेलू PNG कनेक्शन थे, जिनमें से 1 करोड़ से ज्यादा सक्रिय हैं। इसके अलावा कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी PNG का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, जिससे इसकी कुल मांग में लगातार इजाफा हो रहा है।
सरकार ने भी इस बदलाव को देखते हुए PNG नेटवर्क के विस्तार पर जोर बढ़ा दिया है। 110 इलाकों में पाइप गैस कनेक्शन तेजी से देने के निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के 25 और महाराष्ट्र के 12 क्षेत्र शामिल हैं। PNG विस्तार अभियान को 30 जून तक बढ़ा दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक यह सुविधा पहुंच सके।
सरकार और गैस कंपनियां उन जिलों में भी काम तेज कर रही हैं, जहां अभी तक 10 हजार से कम कनेक्शन हैं। इसके लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है और जरूरी मंजूरियों को तेजी से पूरा किया जा रहा है।
इस बदलाव के पीछे एक रणनीतिक पहल भी है। केंद्र सरकार ने राज्यों को कमर्शियल LPG का 10 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा देने की पेशकश की है, ताकि वे PNG को अपनाने में सहयोग करें। फिलहाल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अतिरिक्त कोटा मिल रहा है।
हमारी राय में
LPG संकट के बीच PNG की ओर बढ़ता रुझान एक दीर्घकालिक बदलाव का संकेत है। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुविधाजनक और स्थिर विकल्प भी साबित हो सकता है। हालांकि, इसके लिए बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार और बेहतर योजना जरूरी होगी, ताकि हर घर तक यह सुविधा पहुंच सके।