महाकुंभ से चर्चित IIT बाबा अभय सिंह ने रचाई शादी
महाकुंभ से “IIT वाले बाबा” के नाम से चर्चित हुए अभय सिंह ने विवाह कर लिया है। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आने वाली प्रीतिका को उन्होंने अपनी जीवनसंगिनी चुना है। इस विवाह का खुलासा तब हुआ जब वह सोमवार को अपनी पत्नी के साथ अपने पैतृक गांव पहुंचे।
अभय सिंह ने बताया कि उन्होंने 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित अघंजर महादेव मंदिर में विवाह किया था। इसके बाद 19 फरवरी को दोनों ने कोर्ट मैरिज भी की।
IIT से साधु बनने तक का सफर
अभय सिंह की पहचान उस समय बनी जब महाकुंभ में उन्हें साधु वेश में देखा गया। IIT से पढ़ाई करने वाले एक युवक का आध्यात्म की राह चुनना लोगों के लिए हैरानी का विषय बना। उनके विचार और जीवनशैली ने सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच खासा ध्यान खींचा।
अब उनके विवाह की खबर ने एक बार फिर लोगों में उत्सुकता बढ़ा दी है कि आध्यात्मिक जीवन जीने वाला व्यक्ति पारिवारिक जीवन कैसे संतुलित करेगा।
अघंजर महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
जिस अघंजर महादेव मंदिर में अभय सिंह ने विवाह किया, वह अपने आप में बेहद ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह मंदिर धर्मशाला से लगभग 8 किलोमीटर दूर खनियारा क्षेत्र में धौलाधार पर्वत श्रृंखला की वादियों में स्थित है।
“अघंजर” का अर्थ होता है पापों का नाश करने वाला। मंदिर के पास बहने वाली खड्ड और प्राकृतिक वातावरण इसे और भी आकर्षक बनाते हैं। यहां सदियों से एक अखंड धूनी जलती आ रही है, जहां साधु-संत तपस्या करते हैं।
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं और इतिहास
इस मंदिर से कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि बाबा गंगा भारती ने यहां पहली बार धूनी रमाई थी, जो आज तक निरंतर जल रही है।
इतिहास में उल्लेख मिलता है कि सिख साम्राज्य के शासक महाराजा रणजीत सिंह भी यहां आए थे। उनके बारे में यह मान्यता है कि उन्होंने यहां बाबा से आशीर्वाद लेकर अपनी बीमारी से मुक्ति पाई थी और मंदिर के लिए जमीन दान की थी।
संतों की समाधियां और धार्मिक आस्था
मंदिर परिसर में दशनामी जूना अखाड़े से जुड़े कई संतों की समाधियां भी मौजूद हैं। इस मंदिर का प्रबंधन भी जूना अखाड़ा ही देखता है।
हर साल महाशिवरात्रि के मौके पर यहां बड़े स्तर पर मेला आयोजित होता है, जिसमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और राजस्थान से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
अभय सिंह का यह विवाह केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि आध्यात्म और आधुनिक जीवन के संगम का उदाहरण भी बनता नजर आ रहा है। IIT जैसी प्रतिष्ठित पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उनका आध्यात्म की ओर झुकाव और अब विवाह का फैसला समाज में नई चर्चा को जन्म दे रहा है।
अभय सिंह की कहानी आज के युवाओं के लिए एक अलग दृष्टिकोण पेश करती है। जहां एक ओर लोग करियर और भौतिक सफलता के पीछे भागते हैं, वहीं अभय सिंह ने आध्यात्मिक मार्ग को चुना और अब विवाह के जरिए जीवन के दूसरे पहलू को भी अपनाया है। यह दिखाता है कि आध्यात्म और पारिवारिक जीवन एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि संतुलन के साथ दोनों को जिया जा सकता है। धर्मशाला जैसे आध्यात्मिक स्थल पर विवाह करना इस बात का संकेत है कि उनके लिए यह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक निर्णय भी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने इस अनोखे जीवन संतुलन को कैसे आगे बढ़ाते हैं।
