टाटा समूह द्वारा कृत्रिम मेधा (AI) चिप का स्वदेशी विकास: रणनीतिक साझेदारियां एवं तकनीकी अवसंरचना का विस्तार
व्यावसायिक रिपोर्ट, नई दिल्ली | टाटा समूह कृत्रिम मेधा (AI) एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने हेतु सुनियोजित कदम उठा रहा है। राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के अवसर पर टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन ने आधिकारिक रूप से यह उद्घोषणा की है कि समूह वर्तमान में अपनी उद्योग-विशिष्ट एआई चिप्स (Industry-specific AI Chips) के विकास पर कार्य कर रहा है। इसके अतिरिक्त, डेटा सेंटर और एआई अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु कई वैश्विक तकनीकी संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारियां स्थापित की गई हैं।
उद्योग-विशिष्ट एआई चिप एवं ऑटोमोटिव क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना
श्री चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि एआई के बहुआयामी प्रभावों के दृष्टिगत, टाटा समूह का कार्यक्षेत्र केवल सॉफ्टवेयर विकास तक सीमित नहीं रहेगा, अपितु हार्डवेयर एवं चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में भी समूह अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।
- नवीन पहल: समूह द्वारा विभिन्न औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप एआई-आधारित चिप्स विकसित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
- प्रारंभिक उपयोग: विकसित की जा रही प्रारंभिक सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग मुख्य रूप से ऑटोमोटिव क्षेत्र (Automotive Sector) में किए जाने की संभावना है, विशेषकर स्मार्ट एवं इलेक्ट्रिक वाहनों में, जहाँ इनकी अत्यधिक मांग परिलक्षित हो रही है।
वैश्विक साझेदारियां: OpenAI एवं AMD के साथ तकनीकी सहयोग
भारत में एक सुदृढ़ एआई पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के निर्माण हेतु टाटा समूह ने विश्व की अग्रणी तकनीकी कंपनियों के साथ रणनीतिक समझौते किए हैं:
OpenAI के साथ समझौता: एआई अवसंरचना (AI Infrastructure) विकसित करने के उद्देश्य से अमेरिकी संस्था ओपनएआई के साथ साझेदारी स्थापित की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में 100 मेगावाट क्षमता की स्थापना की जाएगी, जिसे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप 1 गीगावाट (GW) तक विस्तारित किए जाने की योजना है।
AMD के साथ सहयोग: समूह की सूचना प्रौद्योगिकी इकाई, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), एवं अमेरिकी चिप विनिर्माता AMD संयुक्त रूप से भारत में वैश्विक मानकों के अनुरूप उच्च-घनत्व वाली एआई क्षमता विकसित करने हेतु कार्यरत हैं।
एजेंटिक एआई (Agentic AI): टीसीएस एवं टाटा कम्युनिकेशंस के संयुक्त तत्वावधान में औद्योगिक अनुप्रयोगों हेतु एक नवीन 'एआई ऑपरेटिंग सिस्टम' का विकास किया जा रहा है, जो विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्वचालित समाधान उपलब्ध कराएगा।
गुजरात एवं असम में वृहद निवेश योजनाएं
सेमीकंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा दो प्रमुख परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है:
- धोलेरा (गुजरात) विनिर्माण संयंत्र: ताइवान स्थित PSMC के तकनीकी सहयोग से लगभग 91,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ भारत की प्रथम वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब इकाई की स्थापना की जा रही है। इस संयंत्र में प्रारंभिक तौर पर 28 नैनोमीटर (nm) तकनीक आधारित चिप्स का उत्पादन होगा, जिनका उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, इंटरनेट-आधारित उपकरणों एवं नेटवर्किंग प्रणालियों में किया जाएगा।
- असम पैकेजिंग इकाई: असम राज्य में 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से एक चिप पैकेजिंग इकाई (OSAT) की स्थापना प्रक्रियाधीन है। इस परियोजना से पूर्वोत्तर भारत में 27,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों के सृजन का अनुमान है।
वैश्विक साझेदारी का दृष्टिकोण
सेमीकंडक्टर विनिर्माण जैसी जटिल प्रक्रिया में तकनीकी उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु टाटा समूह वैश्विक सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है। अध्यक्ष महोदय ने सूचित किया कि कंपनी ASML, टोक्यो इलेक्ट्रॉन, अप्लाइड मैटेरियल्स, क्वालकॉम एवं इंटेल जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर रही है, ताकि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का एक अभिन्न अंग बनाया जा सके।
विश्लेषणात्मक निष्कर्ष
टाटा समूह का कृत्रिम मेधा एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यह रणनीतिक विस्तार भारत की 'डिजिटल संप्रभुता' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम प्रतीत होता है। ओपनएआई और एएमडी जैसी संस्थाओं के साथ गठजोड़ यह प्रदर्शित करता है कि टाटा समूह विनिर्माण के साथ-साथ एक वैश्विक एआई नवप्रवर्तक के रूप में स्थापित होने हेतु प्रयासरत है। धोलेरा एवं असम स्थित प्रस्तावित संयंत्रों से न केवल प्रौद्योगिकी आयात पर भारत की निर्भरता में कमी आने की संभावना है, अपितु यह उच्च-तकनीकी रोजगार सृजन के दृष्टिकोण से भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
