आमलकी एकादशी 2026: 4 दुर्लभ संयोगों के साथ आ रही है रंगभरी एकादशी; जानें शुभ मुहूर्त और किस्मत बदलने वाले अचूक उपाय
धर्म-कर्म डेस्क | हिंदू पंचांग में यूं तो हर एकादशी का अपना विशेष महत्व है, लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का स्थान सबसे अनूठा है। इसे आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ शिव-पार्वती और आंवले (Amla) के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है।
वर्ष 2026 में यह एकादशी बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन 4 अत्यंत शुभ और दुर्लभ योगों का निर्माण हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और वे चमत्कारी उपाय जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं।
आमलकी एकादशी 2026: 4 अत्यंत शुभ संयोग (Shubh Sanyog)
इस वर्ष एकादशी के दिन ग्रहों और नक्षत्रों की चाल 4 बेहद मंगलकारी योग बना रही है, जो इस प्रकार हैं:
- आयुष्मान योग: प्रात:काल से लेकर शाम 07:44 बजे तक। (इस योग में किए गए कार्य लंबी आयु और स्वास्थ्य देते हैं।)
- सौभाग्य योग: शाम 07:45 बजे से प्रारंभ। (यह योग जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य लाता है।)
- सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 10:48 बजे से अगले दिन (28 फरवरी) सुबह 06:47 बजे तक। (इस योग में मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।)
- रवि योग: सुबह 06:48 बजे से सुबह 10:48 बजे तक। (यह योग सभी दोषों का नाश करने वाला माना जाता है।)
पूजा का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
यदि आप व्रत कर रहे हैं या केवल पूजा का लाभ लेना चाहते हैं, तो इन मुहूर्तों का ध्यान अवश्य रखें:
- आंवले के पेड़ की पूजा का शुभ समय: सुबह 06:48 बजे से लेकर दिन में 11:08 बजे तक।
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 08:15 बजे से सुबह 09:41 बजे तक। (यह समय किसी भी नए संकल्प या उपाय के लिए श्रेष्ठ है।)
किस्मत बदलने वाले 4 अचूक उपाय (Upay)
इस पावन दिन पर अपनी मनोकामना के अनुसार निम्नलिखित उपाय करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है:
1. आर्थिक समृद्धि और धन प्राप्ति के लिए
एकादशी के दिन पीले कपड़े में 5 या 11 ताजे आंवले बांधकर भगवान श्री हरि विष्णु के चरणों में अर्पित करें। अगले दिन पूजा के बाद इन आंवलों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और उनमें से एक आंवले को अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। मान्यता है कि इससे घर में कभी धन की कमी नहीं होती और मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
2. करियर और नौकरी में सफलता के लिए
यदि कार्यक्षेत्र में बाधाएं आ रही हैं या प्रमोशन रुका हुआ है, तो आंवले के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध और शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद वृक्ष की 7 बार परिक्रमा (Circumambulation) करें और अपनी मनोकामना मन ही मन दोहराएं। इससे नौकरी और व्यापार में उन्नति के योग बनते हैं।
3. दांपत्य जीवन में मधुरता के लिए
आमलकी एकादशी को 'रंगभरी एकादशी' भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन से काशी में होली का पर्व शुरू हो जाता है। यदि पति-पत्नी के बीच अनबन रहती है, तो इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (या शिव-पार्वती) का एक साथ अभिषेक करें और उन्हें अबीर-गुलाल अर्पित करें। रंगों का यह प्रयोग दांपत्य जीवन में प्रेम और सौभाग्य लेकर आता है।
4. उत्तम स्वास्थ्य और रोग मुक्ति के लिए
शास्त्रों के साथ-साथ आयुर्वेद में भी आंवले को 'आरोग्य का कारक' और 'अमृत फल' माना गया है। एकादशी के दिन नहाने के पानी में थोड़ा सा आंवले का रस या चूर्ण डालकर स्नान करें। इसके अलावा, तांबे के लोटे में जल और थोड़ा सा आंवला डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे त्वचा संबंधी रोगों और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
संपादकीय विश्लेषण
आमलकी एकादशी भारतीय संस्कृति की उस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सोच का प्रतीक है, जहाँ प्रकृति (वृक्षों) को देवता तुल्य मानकर उनका संरक्षण किया जाता है। आंवले का वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर होता है, और बदलते मौसम (फाल्गुन) में इसके सेवन और स्पर्श को धर्म से जोड़कर हमारे पूर्वजों ने स्वास्थ्य रक्षा का एक बेहतरीन संदेश दिया है। 2026 के इन 4 शुभ संयोगों में की गई पूजा निश्चित ही शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों रूप से फलदायी सिद्ध होगी।
.jpg)