भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर मुहर! मार्च में होंगे हस्ताक्षर, अप्रैल से होगा लागू; जानें ब्रिटेन और ओमान FTA पर पीयूष गोयल का बड़ा ऐलान
नेशनल डेस्क, नई दिल्ली | भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों के मोर्चे पर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित 'अंतरिम व्यापार समझौते' (Interim Trade Agreement) पर मार्च के महीने में आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो जाएंगे और इसके अप्रैल 2026 से लागू होने की प्रबल संभावना है।
यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और द्विपक्षीय व्यापार को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अंतिम चरण में तैयारी
भारत और अमेरिका के बीच इस समझौते की रूपरेखा इसी महीने की शुरुआत में जारी एक संयुक्त बयान (Joint Statement) के जरिए तय कर ली गई थी।
- कानूनी मसौदा (Legal Draft): अब इस अंतरिम व्यापार समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच अमेरिका में 23 फरवरी से एक उच्च-स्तरीय तीन दिवसीय बैठक शुरू होने जा रही है।
- फायदे: इस समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में व्यापक पहुंच मिलेगी, विशेषकर आईटी, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स में।
ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ FTA पर बड़ा अपडेट
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख देशों के साथ चल रही मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं पर भी स्थिति स्पष्ट की:
- ब्रिटेन (UK) और ओमान (Oman): इन दोनों देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है। मंत्री ने उम्मीद जताई है कि ये समझौते भी अप्रैल 2026 में पूरी तरह से लागू हो जाएंगे।
- न्यूजीलैंड (New Zealand): प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक पैठ बढ़ाने के उद्देश्य से न्यूजीलैंड के साथ चल रहे व्यापार समझौते के सितंबर 2026 तक लागू होने की संभावना है।
भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति
लगातार कई देशों के साथ एफटीए (FTA) और अंतरिम समझौते करना भारत की एक आक्रामक और सोची-समझी व्यापारिक रणनीति का हिस्सा है। केंद्र सरकार का लक्ष्य भारतीय उत्पादों के लिए नए वैश्विक बाजार खोलना और विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करना है।
संपादकीय विश्लेषण
भारत द्वारा एक ही वर्ष (2026) में अमेरिका, ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ व्यापार समझौतों को धरातल पर उतारना ऐतिहासिक है। विशेष रूप से अमेरिका के साथ 'अंतरिम समझौता' भारतीय व्यापार जगत के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित होगा। हालांकि, इन समझौतों की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय घरेलू उद्योग इन नए खुले बाजारों का लाभ उठाने के लिए खुद को कितनी जल्दी अपग्रेड कर पाते हैं। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन समझौतों से घरेलू विनिर्माण और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को कोई नुकसान न पहुंचे।
