चांदी की चमक हुई 'काली'—4 दिन में 2 लाख रुपये टूटी कीमतें, 50 साल का रिकॉर्ड टूटा, निवेशकों के उड़े होश
नई दिल्ली/मुंबई, दिनांक: 2 फरवरी 2026— कमोडिटी बाजार के इतिहास में पिछला हफ्ता एक ऐसा अध्याय जोड़ गया है जिसे निवेशक शायद ही कभी भूल पाएंगे। 'गरीबों का सोना' कही जाने वाली चांदी (Silver) ने पहले तो आसमान की ऊंचाइयों को छूकर सबको चौंकाया, और फिर वहां से ऐसी गोता लगाया कि बाजार में हाहाकार मच गया। देश के वायदा बाजार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी ने एक ऐसा 'रोलर-कोस्टर' राइड दिखाया है जो पिछले 50 वर्षों में कभी नहीं देखा गया।
29 जनवरी को चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का अपना लाइफ टाइम हाई (All-time High) रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन इसके बाद महज 70 से 80 घंटों यानी 4 दिनों के भीतर चांदी की कीमतें ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं। भाव में 46% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार के जानकारों के मुताबिक 1980 के बाद की सबसे तेज और भयानक गिरावट है।
4 दिन, 2 लाख का नुकसान: हर घंटे 2400 रुपये स्वाहा
गिरावट का मंजर कितना खौफनाक था, इसे आंकड़ों से समझा जा सकता है।
- गिरावट का गणित: 29 जनवरी को 4.20 लाख रुपये प्रति किलो के शिखर पर पहुंची चांदी, 4 दिनों के भीतर लुढ़ककर 2.25 लाख रुपये के स्तर पर आ गई।
- शुद्ध नुकसान: इसका मतलब है कि प्रति किलो चांदी की कीमत में सीधे 1.94 लाख रुपये की कमी आई।
- प्रति घंटा नुकसान: अगर इसे समय के हिसाब से देखें, तो इन चार दिनों में हर घंटे चांदी की कीमत में करीब 2,400 रुपये की कमी दर्ज हुई।
इतनी तेज गिरावट ने न केवल भारतीय निवेशकों को, बल्कि वैश्विक बाजार के दिग्गजों को भी सन्न कर दिया है। 1980 में भी चांदी में ऐसी ही जबरदस्त गिरावट आई थी, लेकिन तब कीमतें 5 महीने में 70% गिरी थीं। इस बार यह तबाही केवल 4 दिनों में मच गई, जो आधुनिक ट्रेडिंग के दौर में 'अभूतपूर्व' है।
2 लाख के नीचे जा सकती है चांदी?
सोमवार (2 फरवरी) को भी बाजार में भारी दबाव देखा गया। दोपहर 1:45 बजे चांदी के दाम 2,35,339 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे थे, जो कि निचले स्तरों से थोड़ी रिकवरी थी।
- चेतावनी: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिकवाली का यह दबाव जारी रहा, तो चांदी के दाम मनोवैज्ञानिक स्तर 2 लाख रुपये से भी नीचे जा सकते हैं। ट्रेडिंग डे के दौरान वोलैटिलिटी (Volatility) इतनी ज्यादा है कि इंट्रा-डे में 50% तक की गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
- क्यों फूटा चांदी का गुब्बारा? (3 बड़े कारण)
बाजार विश्लेषकों और केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने इस गिरावट के पीछे तीन मुख्य ट्रिगर्स (Triggers) की पहचान की है:
- गोल्ड-सिल्वर रेश्यो (Gold-Silver Ratio): यह अनुपात सोने और चांदी की कीमतों के बीच के संबंध को दर्शाता है। वर्तमान में यह रेश्यो 61 के स्तर को पार कर गया है और तकनीकी चार्ट्स पर इसके 70 तक जाने के संकेत हैं। जब यह रेश्यो बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि चांदी, सोने के मुकाबले कमजोर हो रही है।
- फेड रिजर्व की नीतियां: अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ने ब्याज दरों में कटौती पर अपने हाथ खींच लिए हैं। बाजार को उम्मीद थी कि कटौती जल्दी होगी, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि अगर कटौती होती भी है, तो वह जून या जुलाई से पहले नहीं होगी। ऊंची ब्याज दरें कमोडिटी मार्केट के लिए नकारात्मक होती हैं।
- डॉलर इंडेक्स और आर्थिक तनाव: डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक तनाव में आई कमी ने सुरक्षित निवेश की मांग को घटा दिया है। जब डर कम होता है, तो लोग सोना-चांदी बेचकर इक्विटी की तरफ भागते हैं।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
चांदी में आई यह गिरावट 'सट्टेबाजी' (Speculation) का सबसे बड़ा उदाहरण है। 4.20 लाख का भाव मौलिक कारणों (Fundamentals) से नहीं, बल्कि अत्यधिक खरीदारी और फोमो (FOMO) से बना था।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह गिरावट उन छोटे निवेशकों के लिए एक सबक है जो बिना रिसर्च के बहती गंगा में हाथ धोने कूद पड़ते हैं। 46% की गिरावट किसी भी पोर्टफोलियो को तबाह करने के लिए काफी है। फिलहाल, बाजार में 'चाकू गिर रहा है' (Falling Knife), इसलिए इसे पकड़ने की कोशिश न करें। जब तक स्थिरता नहीं आती, तब तक निवेश से दूर रहना ही समझदारी है। यह 'करेक्शन' नहीं, बल्कि 'क्रैश' है।
