बारामती विमान हादसा: राज ठाकरे का बड़ा खुलासा, पूछा- "FIR दर्ज करने से क्यों डर रही है सरकार? क्या कोई गहरी साजिश है?
मुंबई (नेशनल डेस्क): महाराष्ट्र की राजनीति में 28 जनवरी 2026 के दुर्भाग्यपूर्ण बारामती विमान हादसे को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री और दिग्गज नेता की इस हादसे में हुई असामयिक मृत्यु ने पहले ही पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन अब, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) की इस मामले में एंट्री और उनके द्वारा किए गए सनसनीखेज दावों ने पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ ला दिया है।
राज ठाकरे ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि इस मामले में कुछ तो ऐसा है जिसे छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि जब परिवार संतुष्ट नहीं है, तो एक निष्पक्ष जांच और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में क्या आपत्ति है? आइए, इस पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे की सियासी एवं तकनीकी बारीकियों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
शिवतीर्थ पर अहम मुलाकात: रोहित पवार और राज ठाकरे की मंत्रणा
यह पूरा राजनीतिक बवंडर तब उठा जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार गुट) के युवा और तेजतर्रार विधायक रोहित पवार (Rohit Pawar) ने दादर स्थित राज ठाकरे के आवास 'शिवतीर्थ' पर उनसे एक बेहद महत्वपूर्ण और गुप्त मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में रोहित पवार ने राज ठाकरे के साथ बारामती विमान हादसे से जुड़े कई चौंकाने वाले तकनीकी पहलुओं और सबूतों को साझा किया।
इस उच्च स्तरीय मुलाकात के तुरंत बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए राज ठाकरे ने बेबाकी से कहा, "रोहित ने मुझे जो तकनीकी जानकारियाँ दी हैं, वे गंभीर हैं। अब यह स्पष्ट होना बहुत जरूरी है कि यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण तकनीकी खराबी के कारण हुई दुर्घटना थी, या इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश काम कर रही थी।" राज ठाकरे का यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि विपक्षी दल अब इस मुद्दे को आसानी से शांत नहीं होने देंगे।
FIR दर्ज न होने का रहस्य: मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में क्या हुआ?
राज ठाकरे ने राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस तंत्र पर एक बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने मीडिया के सामने दावा किया कि दिवंगत नेता के भतीजे रोहित पवार ने न्याय की गुहार लगाते हुए मुंबई के तीन अलग-अलग पुलिस थानों में FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज कराने का कड़ा प्रयास किया, लेकिन उन्हें हर जगह से खाली हाथ लौटना पड़ा।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा करते हुए मनसे प्रमुख ने कहा, "रोहित पवार जब मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो वहां सब कुछ सामान्य था। पुलिस अधिकारी FIR का मसौदा तैयार कर रहे थे। लेकिन तभी अचानक ऊपर से किसी 'वरिष्ठ अधिकारी' का फोन आता है और पूरी प्रक्रिया को वहीं रोक दिया जाता है।" राज ठाकरे ने सीधे सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा, "आखिर वह वरिष्ठ अधिकारी कौन था? किसके आदेश पर FIR रोकी गई? अगर यह महज एक सामान्य विमान हादसा है, तो सरकार या पुलिस को किस बात का डर सता रहा है?" ## "ADR दर्ज है तो FIR से परहेज क्यों?": राज ठाकरे का कानूनी तर्क
कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए राज ठाकरे ने एक अत्यंत तार्किक सवाल उठाया। पुलिस ने इस मामले में पहले ही एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर ली है। ADR सामान्यतः किसी भी अप्राकृतिक मौत के मामले में दर्ज की जाती है। राज ठाकरे का तर्क है कि जब ADR दर्ज हो चुकी है और परिवार के सदस्यों (विशेषकर रोहित पवार) को हादसे के पीछे साजिश की आशंका है, तो पुलिस को CrPC (या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत FIR दर्ज कर एक आपराधिक जांच शुरू करने से परहेज क्यों होना चाहिए?
उन्होंने कहा, "जांच की मांग करना किसी भी पीड़ित परिवार का लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है। जब पीड़ित पक्ष संदेह जता रहा है, तो राज्य सरकार को खुद आगे बढ़कर FIR दर्ज करवानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।"
परिवार की पीड़ा: सुनेत्रा पवार और परिजनों को जवाब चाहिए
इस हादसे ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति को एक बड़ा झटका दिया है, बल्कि एक परिवार को भी गहरे शोक में डुबो दिया है। राज ठाकरे ने मानवीय पहलू को उठाते हुए कहा कि दिवंगत नेता की पत्नी सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) समेत परिवार के हर सदस्य को यह जानने का पूरा अधिकार है कि 28 जनवरी की उस मनहूस सुबह आखिर आसमान में क्या हुआ था।
मनसे चीफ ने जोर देकर कहा, "घटना उस समय हुई जब दिवंगत नेता राज्य के उपमुख्यमंत्री जैसे अति-संवेदनशील और महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर विराजमान थे। ऐसे में इस मामले की पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सिर्फ परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य के 13 करोड़ नागरिकों के लिए भी सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है।" उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मामले में 'राजनीति से ऊपर उठकर' केवल सच्चाई को सामने लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
घटना की पृष्ठभूमि: 28 जनवरी 2026 का वह काला दिन
पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि 28 जनवरी 2026 को बारामती हवाई पट्टी के पास एक चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में राज्य के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री का दुखद निधन हो गया था। शुरुआती रिपोर्टों में खराब मौसम और तकनीकी खराबी को कारण बताया गया था।
वर्तमान में इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) कर रही है। इसके अलावा नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) भी विमान के ब्लैक बॉक्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के डेटा का विश्लेषण कर रहा है। लेकिन, रोहित पवार द्वारा उठाए गए तकनीकी सवालों और अब राज ठाकरे के समर्थन के बाद, यह मामला सिर्फ 'तकनीकी खराबी' से आगे बढ़कर 'आपराधिक साजिश' के संदेह तक जा पहुंचा है।
संपादकीय विश्लेषण
hindi.thetrendingpeople.com के नेशनल डेस्क का मानना है कि राज ठाकरे का यह हस्तक्षेप महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण का संकेत है। रोहित पवार (जो एनसीपी-शरद पवार गुट के अहम रणनीतिकार हैं) का राज ठाकरे के पास जाना यह दर्शाता है कि विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने के लिए एकजुट हो रहा है।
एक उपमुख्यमंत्री की विमान हादसे में मौत कोई साधारण घटना नहीं है। इतिहास गवाह है कि भारत में जब भी किसी बड़े राजनेता (जैसे माधवराव सिंधिया, वाई.एस. राजशेखर रेड्डी, या संजय गांधी) की विमान या हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई है, तो साजिश के सिद्धांत (Conspiracy Theories) हमेशा पनपे हैं। प्रशासन को यह समझना होगा कि CID जांच अपनी जगह है, लेकिन अगर पुलिस FIR दर्ज करने से बचती है, तो जनता और विपक्ष के बीच 'लीपापोती' (Cover-up) का संदेश जाता है। मुख्यमंत्री और गृह विभाग को चाहिए कि वे इस मामले में पूर्ण पारदर्शिता अपनाएं। मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में आए उस 'रहस्यमयी फोन कॉल' की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि लोकतंत्र में जनता का विश्वास पुलिस और न्याय प्रणाली पर बना रहे।
