JP Morgan का बड़ा अनुमान, सोना 6,300 डॉलर तक जा सकता है
बिजनेस डेस्क। सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म JPMorgan Chase & Co. गोल्ड को लेकर मीडियम से लॉन्ग टर्म में काफी सकारात्मक नजर आ रही है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि साल के अंत तक सोने की कीमतें बढ़कर 6,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
जेपी मॉर्गन के मुताबिक, सेंट्रल बैंकों और निवेशकों की मजबूत मांग आने वाले समय में गोल्ड को सपोर्ट करती रहेगी।
ग्लोबल मार्केट में फिलहाल दबाव में सोना
वैश्विक बाजार में इस समय सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार—
- मौजूदा कीमत: 4,677.17 डॉलर प्रति औंस
- शुरुआती सेशन में गिरावट: 5% से ज्यादा
- हालिया ऑल-टाइम हाई: 5,594.82 डॉलर प्रति औंस
तेज गिरावट के बावजूद ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है और लंबी अवधि में ट्रेंड मजबूत बना रहेगा।
JP Morgan क्यों है गोल्ड पर बुलिश?
जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वह मीडियम टर्म में सोने को लेकर पूरी तरह बुलिश बना हुआ है।
ब्रोकरेज के अनुसार—
- दुनिया भर में रिजर्व डायवर्सिफिकेशन का ट्रेंड बढ़ रहा है
- देश डॉलर पर निर्भरता कम कर रहे हैं
- रियल एसेट्स की मांग बढ़ रही है
- पेपर एसेट्स की तुलना में गोल्ड ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है
इन्हीं वजहों से गोल्ड आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
2026 में सेंट्रल बैंक खरीद सकते हैं 800 टन सोना
जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि साल 2026 में सेंट्रल बैंकों द्वारा करीब 800 टन सोने की खरीद की जा सकती है।
ब्रोकरेज का कहना है कि—
- डॉलर आधारित रिजर्व से दूरी बनाने की रणनीति
- भू-राजनीतिक अनिश्चितता
- वैश्विक आर्थिक जोखिम
जैसे फैक्टर सोने की मांग को लगातार सपोर्ट कर रहे हैं।
यही कारण है कि गोल्ड को सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
चांदी को लेकर JP Morgan का सतर्क रुख
जहां गोल्ड को लेकर ब्रोकरेज काफी पॉजिटिव है, वहीं चांदी पर उसका रुख थोड़ा सतर्क नजर आ रहा है।
हालिया स्थिति—
- स्पॉट सिल्वर गिरावट: 6% से ज्यादा
- मौजूदा कीमत: 78.90 डॉलर प्रति औंस
- रिकॉर्ड हाई: 121.64 डॉलर प्रति औंस
जेपी मॉर्गन का मानना है कि चांदी में सेंट्रल बैंकों की खरीद स्थिर नहीं रहती, जिससे इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
गोल्ड-सिल्वर रेश्यो बढ़ने का खतरा
ब्रोकरेज के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में गोल्ड-सिल्वर रेश्यो और बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि—
- सोना चांदी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकता है
- सिल्वर कमजोर पड़ सकता है
- निवेशकों को चांदी में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है
हालांकि JP Morgan अब भी चांदी के लिए 75 से 80 डॉलर प्रति औंस का सपोर्ट लेवल मान रहा है, जो पहले के अनुमान से बेहतर है।
भारत में भी सोना-चांदी दबाव में
भारत में भी कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।
2 फरवरी को Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर—
- अप्रैल गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट:
- करीब 7% गिरकर 1,37,065 रुपये प्रति 10 ग्राम
- मार्च सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट:
- करीब 15% गिरकर 2,25,805 रुपये प्रति किलो
पर पहुंच गया।
इस गिरावट से घरेलू निवेशकों में भी चिंता बढ़ी है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक—
- गोल्ड में लॉन्ग टर्म निवेश फायदेमंद हो सकता है
- गिरावट पर खरीदारी का मौका मिल सकता है
- चांदी में फिलहाल सावधानी जरूरी है
- पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए अवसर बन सकती है।
बाजार पर किन फैक्टर्स का रहेगा असर?
आने वाले समय में सोने-चांदी की कीमतों पर इन बातों का असर रहेगा—
- अमेरिकी ब्याज दरें
- डॉलर की मजबूती या कमजोरी
- सेंट्रल बैंक की खरीद
- वैश्विक राजनीतिक हालात
- महंगाई के आंकड़े
इन फैक्टर्स के आधार पर ही कीमतों की दिशा तय होगी।
हमरी राय में
हमरी राय में, JP Morgan का गोल्ड को लेकर सकारात्मक रुख यह संकेत देता है कि लंबी अवधि में सोना अब भी सुरक्षित निवेश बना रहेगा। सेंट्रल बैंकों की बढ़ती खरीद और वैश्विक अनिश्चितता गोल्ड को मजबूती दे सकती है
हालांकि, चांदी में उतार-चढ़ाव का जोखिम ज्यादा बना हुआ है, इसलिए निवेशकों को इसमें सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए। अगर कोई निवेशक लॉन्ग टर्म रणनीति के साथ चलता है, तो मौजूदा गिरावट उसके लिए बेहतर मौका साबित हो सकती है।

