भारत में ड्रोन इकोसिस्टम का विस्तार: 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन, 39,890 प्रमाणित रिमोट पायलट
नई दिल्ली। भारत में ड्रोन इकोसिस्टम तेजी से मुख्यधारा में प्रवेश कर चुका है। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश में पंजीकृत ड्रोन की संख्या 38,500 के पार पहुंच गई है, जबकि फरवरी 2026 तक डीजीसीए-प्रमाणित रिमोट पायलटों की संख्या 39,890 हो गई है।
सरकार का कहना है कि ड्रोन क्षेत्र अब पायलट प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर एक नवाचार-आधारित और मुख्यधारा का सेक्टर बन चुका है, जिसे प्रगतिशील नीतियों और वित्तीय प्रोत्साहन का समर्थन मिल रहा है।
240 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान तैयार कर रहे कुशल जनशक्ति
आधिकारिक बयान के अनुसार, ड्रोन संचालन और रखरखाव के लिए 240 से अधिक मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए गए हैं। ये संस्थान कुशल रिमोट पायलट और तकनीकी विशेषज्ञ तैयार कर रहे हैं।
सरकार का मानना है कि कौशल विकास के इस मॉडल से युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो रहा है।
मजबूत इकोसिस्टम का संकेत
सरकार ने कहा कि ड्रोन का बढ़ता उपयोग एक मजबूत और एकीकृत इकोसिस्टम को दर्शाता है। इस इकोसिस्टम में ड्रोन निर्माता, सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट डेवलपर, सेवा प्रदाता, प्रशिक्षण संस्थान, प्रमाणित पायलट, स्टार्टअप, शोध संस्थान और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
यह पूरा ढांचा एक समान नियामक व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा है, जिससे पारदर्शिता और मानकीकरण सुनिश्चित हो रहा है।
कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन तक बढ़ता उपयोग
ड्रोन अब केवल प्रयोगात्मक तकनीक नहीं रह गए हैं। कृषि क्षेत्र में फसल निगरानी और कीटनाशक छिड़काव से लेकर भूमि एवं संपत्ति सर्वेक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग, आपदा आकलन और विभिन्न सरकारी सेवाओं में इनका सक्रिय उपयोग हो रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, स्वामित्व योजना के तहत अब तक 3.28 लाख गांवों का ड्रोन से सर्वेक्षण किया जा चुका है। 31 राज्यों के 1.82 लाख गांवों में 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के रिकॉर्ड को लेकर पारदर्शिता और कानूनी स्पष्टता बढ़ी है।
‘नमो ड्रोन दीदी’ से महिलाओं को लाभ
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक 1,094 ड्रोन महिला स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए हैं, जिनमें से 500 से अधिक ‘नमो ड्रोन दीदी’ पहल के तहत दिए गए हैं।
सरकार का दावा है कि इससे खेती की उत्पादकता बढ़ी है और महिलाओं की आय में सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सशक्तिकरण का यह मॉडल सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
रेलवे और राजमार्ग निगरानी में भी उपयोग
ड्रोन तकनीक का उपयोग रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी में भी किया जा रहा है। इससे समय की बचत और सटीक निरीक्षण संभव हो रहा है।
सरकार का कहना है कि बढ़ते बजट आवंटन, नवाचार अनुदान और स्वदेशी निर्माण को प्रोत्साहन के जरिए भारत मानव रहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियामक ढांचे और डेटा सुरक्षा मानकों को संतुलित रखा गया, तो ड्रोन तकनीक सामाजिक-आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हमरी राय
भारत में ड्रोन इकोसिस्टम का यह विस्तार संकेत देता है कि तकनीक अब केवल शहरी सीमाओं तक सीमित नहीं है। गांवों में संपत्ति सर्वेक्षण से लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराने तक, यह पहल जमीनी स्तर पर असर डाल रही है।
हालांकि आगे की चुनौती गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा मानकों और दीर्घकालिक नीति स्थिरता की होगी। यदि कौशल विकास और स्वदेशी निर्माण को समान गति से आगे बढ़ाया गया, तो भारत ड्रोन तकनीक में न केवल आत्मनिर्भर बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी भी बन सकता है।
