Farmers News: जंगली जानवरों से फसल बचाने के सस्ते देसी उपाय, बिना महंगी फेंसिंग के भी मिलेगा फायदाPti Via aajtak.in
नेशनल डेस्क: खेतों में किसानों की महीनों की मेहनत कई बार नीलगाय, जंगली सुअर और बंदरों जैसे जानवरों से बर्बाद हो जाती है। महंगी फेंसिंग या रातभर पहरा देना हर किसान के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में घरेलू सामान से बने कुछ सस्ते और आसान उपाय फसल की सुरक्षा में कारगर साबित हो सकते हैं।
कृषि विशेषज्ञों और किसानों के अनुभव के आधार पर कई ऐसे घोल बताए गए हैं, जिनकी तेज गंध जानवरों को खेत के पास आने से रोक सकती है।
लाल मिर्च पाउडर, नीम का तेल और फिनायल लिक्विड को पानी में मिलाकर घोल तैयार किया जा सकता है। इस घोल में पुराने कपड़े या जूट के बोरे भिगोकर खेत की मेड़ों पर बांस की सहायता से बांध दें। इसकी तीखी गंध जानवरों को दूर रखती है और यह उपाय लगभग 20 से 25 दिन तक असर दिखा सकता है।
मुर्गी के अंडों का घोल भी कई किसानों के अनुसार प्रभावी रहता है। 10 से 12 अंडों को 50 ग्राम वाशिंग पाउडर और 25 लीटर पानी में मिलाकर मेड़ों पर छिड़काव किया जा सकता है। सड़ांध जैसी गंध जानवरों को खतरे का संकेत देती है।
नीम की खली और ईंट भट्ठे की राख का मिश्रण भी दोहरा लाभ देता है। प्रति बीघा 3 किलो नीम खली और 3 किलो राख मिलाकर छिड़काव करने से न केवल जानवर दूर रहते हैं बल्कि कीट और रोग भी कम हो सकते हैं।
घर की लकड़ी की ठंडी राख को फसल में छिड़कना भी जीरो खर्च वाला उपाय है। गेहूं, चना, मक्का और सब्जियों में इसका उपयोग किया जा सकता है। शाम के समय गोबर के उपलों से हल्का धुआं करना भी आवारा पशुओं को दूर रखने में सहायक हो सकता है।
नीलगाय से बचाव के लिए 4 लीटर मट्ठे में आधा किलो पिसा लहसुन और 500 ग्राम रेत मिलाकर पांच दिन रखने के बाद छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। इसकी तेज गंध लगभग 15 से 20 दिन तक असर दिखा सकती है।
हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों को नियमित अंतराल पर दोहराना जरूरी है और बड़े स्तर की समस्या में वन विभाग या कृषि विभाग से संपर्क करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
