दिल्ली में हत्याएं और खुले नालों पर सियासत तेज: Arvind Kejriwal का भाजपा पर हमला, एलजी पर भी उठे सवाल
राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ती हत्याओं और खुले नालों में गिरने से हो रही मौतों को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा की “चार इंजन सरकार” पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में बुनियादी ढांचे और कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो चुकी है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भाजपा ने एक साल में दिल्ली की स्थिति बिगाड़ दी है और सवाल उठाया कि सरकार और कितनी जानें जाने के बाद जागेगी।
प्रमुख आरोप और राजनीतिक बयान
दिल्ली सरकार में मंत्री रहे सौरभ भारद्वाज ने उपराज्यपाल Vinai Kumar Saxena पर निशाना साधते हुए कहा कि डीडीए के अधीन आने वाले खुले नालों में गिरकर लोगों की मौत हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में सरकारी विभागों की लापरवाही से “मौत का जाल” बिछा हुआ है।
भारद्वाज ने दावा किया कि 24 घंटे के भीतर छह हत्याओं की घटनाएं सामने आईं, जिनमें एक 14 वर्षीय छात्र की हत्या भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर घटनाओं पर उपराज्यपाल और केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली सरकार, एमसीडी और डीडीए जैसे प्रमुख विभाग अब भाजपा के नियंत्रण में हैं, ऐसे में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
भाजपा और प्रशासन की स्थिति
भाजपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि खुले नालों को कवर करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं।
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर दिल्ली पुलिस, जो केंद्र के अधीन आती है, ने हालिया घटनाओं की जांच तेज करने और गश्त बढ़ाने का दावा किया है।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
दिल्ली में बुनियादी ढांचे और कानून व्यवस्था को लेकर पहले भी राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। बीते वर्षों में मानसून के दौरान जलभराव और खुले नालों से जुड़े हादसों ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजधानी में बढ़ती आपराधिक घटनाएं और नागरिक सुरक्षा का मुद्दा आगामी चुनावी परिदृश्य में प्रमुख विषय बन सकता है।
Final Thoughts
दिल्ली की सुरक्षा और बुनियादी ढांचा केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ा सवाल है। खुले नालों में गिरकर होने वाली मौतें और बढ़ती आपराधिक घटनाएं प्रशासनिक जवाबदेही की मांग करती हैं। आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में आम नागरिक ठोस समाधान की उम्मीद कर रहा है। जरूरी है कि संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम करें, जोखिम वाले स्थानों की तत्काल मरम्मत हो और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर यदि पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई होती है, तो ही जनता का भरोसा कायम रह सकेगा। राजधानी की साख और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
