ताइवान स्ट्रेट में ड्रैगन का 'वॉर गेम'—5 साल में 15 गुना बढ़ी चीन की घुसपैठ, 5709 लड़ाकू विमानों ने भरी उड़ान, 'ग्रे जोन' रणनीति से घिरता ताइवान
ताइपे/बीजिंग, दिनांक: 2 फरवरी 2026 — हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदलने और अपने पड़ोसी ताइवान (Taiwan) को मुख्यभूमि में मिलाने की चीन की महत्वाकांक्षा अब एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। ताइवान की शासक पार्टी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के चीन मामलों के विभाग द्वारा जारी एक विस्तृत और चौंकाने वाली रिपोर्ट ने बीजिंग की आक्रामक रणनीतियों की कलई खोल दी है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में चीन के सैन्य विमानों की ताइवान के हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में घुसपैठ लगभग 15 गुना बढ़ गई है। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उस मनोवैज्ञानिक और सैन्य दबाव का प्रमाण है जो चीन लगातार ताइपे पर बना रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ताइवान स्ट्रेट अब बीजिंग की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं का 'शुरुआती बिंदु और परीक्षण स्थल' बन गया है, जहां वह रोज नई रेड लाइन्स को पार कर रहा है।
डीपीपी की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में ताइवान स्ट्रेट में चीनी विमानों की 380 सॉर्टीज (Sorties/उड़ानें) दर्ज की गई थीं। लेकिन साल 2025 के अंत तक यह संख्या आसमान छूते हुए 5,709 के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट का विश्लेषण बताता है कि जहां पहले यह उड़ानें कभी-कभार होने वाली घटनाएं (Non-regular) थीं, वहीं अब यह ताइवान स्ट्रेट में एक 'नियमित ऑपरेशन' (Regular Operation) बन गई हैं। चीन धीरे-धीरे और सुनियोजित तरीके से क्षेत्रीय 'स्टेटस क्वो' (यथास्थिति) को बदलने की रणनीति पर काम कर रहा है और ताइवान उसकी इस दीर्घकालिक सैन्य रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील लिंक है।
रिपोर्ट में चीन की इन गतिविधियों को 'ग्रे जोन' (Grey Zone) ऑपरेशंस का हिस्सा बताया गया है। आसान शब्दों में कहें तो यह खुली जंग और शांति के बीच की स्थिति है। इसका उद्देश्य ताइवान के रक्षा संसाधनों को लगातार अलर्ट पर रखकर थकाना, उसकी निरोधक क्षमता (Deterrence) का परीक्षण करना और सुरक्षा सीमाओं को धीरे-धीरे आगे बढ़ाकर ताइपे को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर करना है। आंकड़ों की समयरेखा देखें तो घुसपैठ का ग्राफ लगातार ऊपर गया है—2020 में 380, 2021 में 960, 2022 में 1,738, 2023 में 4,734, 2024 में 5,107 और 2025 में 5,709 सॉर्टीज। यह वृद्धि दर किसी भी संप्रभु राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अलार्म बेल है।
वर्ष 2025 ताइवान के लिए विशेष रूप से तनावपूर्ण रहा। रिपोर्ट में चीन के बड़े और उकसावे वाले सैन्य अभ्यासों का विशेष उल्लेख किया गया है, जिनमें संयुक्त ऑपरेशंस, समुद्री और हवाई नाकेबंदी तथा सटीक स्ट्राइक (Precision Strikes) का अभ्यास शामिल था। उदाहरण के तौर पर, अप्रैल में आयोजित 'स्ट्रेट थंडर-2025A' और दिसंबर में हुए 'जस्टिस मिशन 2025' जैसे अभ्यासों के दौरान चीनी नौसेना और वायुसेना ने कई बार ताइवान की 12-नॉटिकल-माइल (22.2 किलोमीटर) की संप्रभु समुद्री और हवाई सीमा रेखाओं के बेहद करीब अपने अभ्यास क्षेत्र बनाए। विभाग ने कहा है कि यह कदम न केवल ताइवान बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। चीन की रणनीतिक महत्वाकांक्षाएं ताइवान से परे डाइयोयुताई द्वीप, जापान सागर, पीली सागर और दक्षिण चीन सागर तक फैली हुई हैं, जहां वह उच्च-तीव्रता वाले सैन्य और अर्ध-सैन्य ऑपरेशंस को अंजाम दे रहा है।
सैन्य दबाव के साथ-साथ चीन 'सूचना युद्ध' (Information Warfare) का भी सहारा ले रहा है। ताइवान की शीर्ष खुफिया एजेंसी, नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो (NSB) ने इस महीने एक और बड़ा खुलासा किया है। एनएसबी के मुताबिक, चीन ने ताइवान के समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करने के लिए फर्जी समाचार साइटों, सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिसइन्फॉर्मेशन (दुष्प्रचार) फैलाने वाली चीनी आईटी और मार्केटिंग कंपनियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। एनएसबी की रिपोर्ट में वर्ष 2025 के दौरान 45,000 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और 2.314 मिलियन से अधिक गलत सूचना के टुकड़े (Pieces of Disinformation) पाए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि ये अकाउंट चीन के सेंट्रल पब्लिसिटी डिपार्टमेंट और मिनिस्ट्री ऑफ पब्लिक सिक्योरिटी के सीधे निर्देश पर बनाए और संचालित किए गए थे। इसके लिए Haixunshe, Haimai और Huya जैसी मार्केटिंग कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जिन्होंने फर्जी न्यूज वेबसाइटों पर राजनीतिक प्रोपेगेंडा फैलाया। इनका तरीका बेहद शातिर है—ये वेबसाइटें पहले क्लिकबेट और मनोरंजन कंटेंट से फॉलोअर्स जुटाती हैं और बाद में अपना गियर बदलकर राजनीतिक पोस्ट और ताइवान विरोधी नरेटिव परोसना शुरू कर देती हैं। एनएसबी का कहना है कि चीन का लक्ष्य ताइवान में आंतरिक विभाजन पैदा करना, लोगों की प्रतिरोध क्षमता को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को ताइवान का समर्थन करने से रोकना है। ताइवान की एजेंसियों ने अब फैक्ट-चेकिंग संगठनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर इस डिजिटल हमले का मुकाबला करने की तैयारी की है।
The Trending People Analysis
ताइवान स्ट्रेट में चीन की बढ़ती आक्रामकता आधुनिक भू-राजनीति का सबसे ज्वलनशील बिंदु है। 15 गुना घुसपैठ का बढ़ना यह बताता है कि बीजिंग अब 'शांतिपूर्ण एकीकरण' के वादों से दूर हटकर 'शक्ति प्रदर्शन' की नीति पर आ गया है। 'ग्रे जोन' रणनीति ताइवान के लिए एक अस्तित्व का संकट है, क्योंकि यह उसे बिना लड़े ही थका देने की चाल है।
The Trending People का विश्लेषण है कि चीन का यह 'टू-फ्रंट वॉर' (सैन्य और सूचना) ताइवान के लोकतंत्र के लिए कड़ी परीक्षा है। 5,709 सॉर्टीज का मतलब है कि ताइवान की वायुसेना को हर दिन औसतन 15 से ज्यादा बार अपने जेट्स को स्क्रैम्बल करना पड़ा होगा, जो संसाधनों और मनोबल पर भारी पड़ता है। दुनिया को यह समझना होगा कि ताइवान स्ट्रेट में अस्थिरता का असर केवल एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक सप्लाई चेन और सेमीकंडक्टर बाजार को भी ध्वस्त कर सकता है। ताइवान की सतर्कता और वैश्विक समुदाय का समर्थन ही इस विस्तारवादी लहर को रोकने का एकमात्र उपाय है।
