अजित दादा के बाद NCP में 'उत्तराधिकार' की जंग—अध्यक्ष पद पर सस्पेंस, प्रफुल्ल पटेल ने झाड़ा पल्ला, कार्यकर्ताओं की जिद- "सुनेत्रा भाभी ही संभालें कमान
मुंबई, दिनांक: 2 फरवरी 2026 — महाराष्ट्र की राजनीति में 28 जनवरी 2026 का दिन एक काला अध्याय बनकर दर्ज हो गया, जब राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार का एक विमान हादसे में आकस्मिक निधन हो गया। इस वज्रपात ने न केवल उनके परिवार को तोड़ दिया, बल्कि उनकी पार्टी को भी नेतृत्व विहीन कर दिया है। अजित पवार के जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरने की कवायद अब एक नए सियासी घमासान में बदल गई है। जहां एक तरफ उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने आनन-फानन में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सरकार में स्थिरता लाने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी संगठन के भीतर 'अध्यक्ष पद' को लेकर मतभेद की दरारें गहरी होती जा रही हैं। एनसीपी के गलियारों में अब 'पवार बनाम पटेल' की दबी जुबान में चर्चा शुरू हो गई है, जिसने पार्टी को दो धड़ों में बांटने की नौबत ला दी है।
पार्टी के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि अब एनसीपी का 'बॉस' कौन होगा? अजित पवार के निधन के बाद यह पद रिक्त है और इसे भरने के लिए पार्टी के भीतर एक शीत युद्ध सा छिड़ गया है। सियासी गलियारों में पहले यह चर्चा जोरों पर थी कि पार्टी की कमान अनुभवी नेता और राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल को सौंपी जा सकती है। पटेल पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं और दिल्ली की राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। लेकिन जैसे ही उनके नाम की अटकलें शुरू हुईं, पार्टी के एक बड़े धड़े और जमीनी कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। उनका मानना है कि पार्टी की कमान 'पवार परिवार' के पास ही रहनी चाहिए, अन्यथा पार्टी बिखर जाएगी।
मामले को तूल पकड़ता देख खुद प्रफुल्ल पटेल को सामने आना पड़ा और उन्होंने डैमेज कंट्रोल की कमान संभाली। पटेल ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की खबरें निराधार और बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि एनसीपी एक लोकतांत्रिक पार्टी है और नेतृत्व का फैसला बंद कमरों में नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और विधायकों की भावनाओं के आधार पर लिया जाएगा। पटेल का यह बयान इस बात का संकेत है कि वे इस समय पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी या विद्रोह का जोखिम नहीं उठाना चाहते। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा और पार्टी की स्थापित परंपराओं का पालन किया जाएगा।
दूसरी ओर, विधायकों और पदाधिकारियों का एक बड़ा वर्ग लामबंद होकर सुनेत्रा पवार को ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहा है। सिन्नर से विधायक और पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे ने तो यहां तक कह दिया है कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ और सिर्फ सुनेत्रा पवार ही होंगी, कोई बाहरी व्यक्ति इस पद पर स्वीकार नहीं होगा। उनका तर्क है कि अजित पवार ने जिस मेहनत से पार्टी को खड़ा किया था, उसे उनका परिवार ही आगे ले जा सकता है। कोकाटे ने यह भी दावा किया कि अगर भविष्य में शरद पवार और अजित पवार गुटों का विलय भी होता है, तब भी सुनेत्रा पवार की भूमिका केंद्रीय रहेगी। यह बयान दर्शाता है कि अजित गुट अब अपनी पहचान और नियंत्रण खोना नहीं चाहता।
पार्टी के भीतर चल रही इस मुहिम को अब लिखित रूप भी दिया जा रहा है। एनसीपी के सांस्कृतिक सेल के अध्यक्ष बाबासाहेब पाटील के नेतृत्व में 30 से अधिक पदाधिकारियों ने वरिष्ठ नेताओं सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को एक पत्र सौंपा है। इस पत्र में भावुक अपील की गई है कि अजित पवार के निधन के बाद पार्टी को एक मजबूत और भावनात्मक नेतृत्व की जरूरत है, जो केवल सुनेत्रा पवार दे सकती हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह विपरीत परिस्थितियों में, पति के निधन के महज 80 घंटे के भीतर सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की जिम्मेदारी संभाली, उसने उनकी क्षमता और साहस को साबित कर दिया है। वे मानते हैं कि सहानुभूति की लहर और अजित पवार की विरासत को सहेजने के लिए सुनेत्रा ही एकमात्र विकल्प हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति के लिए यह समय बेहद नाजुक है। 28 जनवरी को बारामती में चुनाव प्रचार के दौरान हुए विमान हादसे ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं। अजित पवार राज्य की राजनीति के चाणक्य माने जाते थे और उनके बिना एनसीपी (अजित गुट) का भविष्य अधर में है। विलय की चर्चाओं के बीच अध्यक्ष पद का यह विवाद पार्टी के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है। अगर प्रफुल्ल पटेल या किसी अन्य वरिष्ठ नेता को कमान सौंपी जाती है, तो विधायकों की टूट का डर है। वहीं, सुनेत्रा पवार को अध्यक्ष बनाने से पार्टी पर 'परिवारवाद' का ठप्पा और गहरा होगा, लेकिन यह फिलहाल एकता बनाए रखने का सबसे सुरक्षित रास्ता नजर आ रहा है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहां से एक रास्ता बिखरने की ओर जाता है और दूसरा पुनर्गठन की ओर। सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना एक प्रशासनिक आवश्यकता थी, लेकिन पार्टी अध्यक्ष बनना एक राजनीतिक चुनौती होगी।
The Trending People का विश्लेषण है कि एनसीपी कैडर आधारित पार्टी कम और नेताओं आधारित पार्टी ज्यादा है। ऐसे में 'पवार' सरनेम ही वह फेविकोल है जो इसे जोड़े रख सकता है। प्रफुल्ल पटेल का पीछे हटना उनकी राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है, क्योंकि वे जानते हैं कि जनाधार पवार परिवार के साथ है। अब देखना यह होगा कि क्या सुनेत्रा पवार एक साथ सरकार और संगठन की दोहरी जिम्मेदारी निभा पाती हैं, या यह बोझ पार्टी में नई दरारें पैदा करेगा। फिलहाल, सहानुभूति की लहर उनके पक्ष में है, लेकिन राजनीति में लहरें बहुत जल्दी बदल जाती हैं।
