Parliament Budget Session: बजट चर्चा में Rahul Gandhi का AI, डेटा सुरक्षा और ट्रंप डील पर हमला
लोकसभा में बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार की आर्थिक और विदेश नीति पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने मार्शल आर्ट के उदाहरण से की और कहा कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है, जहां डेटा सबसे बड़ी संपत्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि जैसे इंजन के लिए पेट्रोल जरूरी होता है, वैसे ही AI के लिए डेटा जरूरी है, लेकिन बजट में डेटा सुरक्षा को लेकर ठोस प्रावधान नहीं दिखते।
राहुल गांधी ने गाजा-इजरायल संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया में पारंपरिक शक्ति संतुलन बदल रहा है और पुराने सिस्टम को चुनौती दी जा रही है। उनका कहना था कि आर्थिक और तकनीकी प्रभुत्व अब नई वैश्विक राजनीति का केंद्र है।
ट्रंप डील पर सवाल
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हालिया व्यापार समझौते पर राहुल गांधी ने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने “नौकर की तरह” डील की। राहुल ने दावा किया कि यदि INDIA ब्लॉक सत्ता में होता तो डेटा संप्रभुता, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाती।
उन्होंने कहा कि भारतीय डेटा देश की रणनीतिक पूंजी है और इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में संतुलित और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
डॉलर और ऊर्जा का ‘वेपनाइजेशन’
राहुल गांधी ने सदन में कहा कि आज युद्ध केवल मिसाइलों से नहीं लड़े जाते, बल्कि डॉलर और ऊर्जा संसाधनों का भी हथियार की तरह उपयोग हो रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 140 करोड़ भारतीयों के डेटा और मेहनत को अमेरिका के सामने सरेंडर कर दिया है।
सरकार की ओर से इस मुद्दे पर जवाब आने की उम्मीद है। बजट सत्र के दौरान डेटा संरक्षण, व्यापार नीति और वैश्विक कूटनीति जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा में रह सकते हैं।
Our Final Thoughts
बजट सत्र में उठे मुद्दे केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक आर्थिक और तकनीकी बदलावों की ओर भी इशारा करते हैं। डेटा संप्रभुता, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते जैसे विषय आज हर देश की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल हैं। विपक्ष जहां सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार के लिए भी यह अवसर है कि वह अपनी नीति स्पष्टता और दीर्घकालिक रणनीति को सदन के सामने रखे। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर खुली और तथ्य आधारित बहस हो। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बजट चर्चा के दौरान इन मुद्दों पर क्या ठोस नीति संकेत सामने आते हैं और सरकार किस तरह जवाब देती है।
