Bangladesh Election 2026: 299 सीटों पर मतदान जारी, दो जगह धमाके; दोपहर तक 32.88% वोटिंग
बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव और रेफरेंडम-2026 के लिए देशभर के 299 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान जारी है। वोटिंग सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और यह शाम 4:30 बजे तक बिना किसी ब्रेक के चलेगी। चुनाव आयोग के अनुसार दोपहर 12 बजे तक 32,789 मतदान केंद्रों पर 32.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। हालांकि इस बीच दो स्थानों पर क्रूड बम धमाकों की खबर सामने आई है।
देशभर में कुल 42,651 पोलिंग सेंटर बनाए गए हैं। इलेक्शन कमीशन के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने कहा कि अब तक किसी भी सेंटर पर मतदान पूरी तरह नहीं रोका गया है। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है।
गोपालगंज के निचुपारा इलाके में रेशमा इंटरनेशनल स्कूल पोलिंग सेंटर पर सुबह करीब 9 बजे क्रूड बम धमाका हुआ। एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस मोहम्मद सरवर हुसैन के अनुसार, इस घटना में अंसार के दो सदस्य और एक बच्चा घायल हुए हैं।
मुंशीगंज सदर उपजिला के मखाती गुरुचरण हाई स्कूल में भी सुबह लगभग 10 बजे धमाका हुआ। सदर थाना प्रभारी मोहम्मद मोमिनुल इस्लाम ने पुष्टि की कि यह घटना दो विरोधी उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच झड़प के दौरान हुई।
निर्दलीय उम्मीदवार तस्नीम जारा ने आरोप लगाया कि ढाका-9 क्षेत्र में महिला पोलिंग एजेंट्स को कई केंद्रों में प्रवेश से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा अलग-अलग बहानों से रुकावटें डाली जा रही हैं।
चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने का दावा किया है और कहा है कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी है।
मतदान के शुरुआती आंकड़े उत्साहजनक माने जा रहे हैं, लेकिन छिटपुट हिंसक घटनाओं और आरोपों ने चुनावी माहौल को संवेदनशील बना दिया है। शाम तक अंतिम मतदान प्रतिशत और आधिकारिक रिपोर्ट से स्थिति और स्पष्ट होगी।
Our Final Thoughts
बांग्लादेश का 13वां संसदीय चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मजबूती की एक अहम परीक्षा भी है। शुरुआती मतदान प्रतिशत से यह संकेत मिलता है कि मतदाताओं में उत्साह है और वे अपने अधिकार का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, गोपालगंज और मुंशीगंज में हुई घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि चुनावी प्रक्रिया में सुरक्षा और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
महिला पोलिंग एजेंट्स से जुड़े आरोप भी गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे प्रत्येक मतदाता को बिना डर और बाधा के मतदान का अवसर सुनिश्चित करें।
लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण, पारदर्शी और सभी के लिए समान हो। अब नजर अंतिम मतदान प्रतिशत और आधिकारिक नतीजों पर रहेगी, जो बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
