ऑटोमैटिक टोल वसूली की तैयारी: कैमरे से कटेगा टोल, लेकिन FASTag अभी रहेगा जरूरी
नेशनल डेस्क: एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए राहत की खबर है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अगले महीने मार्च से चुनिंदा एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटोमैटिक टोल वसूली प्रणाली शुरू करने जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। हाई-रेजोल्यूशन कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और तय दूरी के आधार पर टोल राशि सीधे खाते से कट जाएगी।
देश में फिलहाल करीब 1.5 लाख किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में से लगभग 45,000 किलोमीटर हिस्से पर टोल वसूला जा रहा है। पूरे देश में 1,000 से अधिक टोल प्लाजा हैं, जहां खासकर FASTag न होने या ब्लॉक होने की स्थिति में लंबी कतारें लग जाती हैं और यात्रियों का समय बर्बाद होता है। सरकार का मानना है कि नई तकनीक से यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, नई प्रणाली में न तो टोल बैरियर होंगे और न ही GPS आधारित टोल कलेक्शन अपनाया जाएगा। इसके बजाय ANPR यानी ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के लिए कुछ हाईवे सेक्शनों पर टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं और इसे धीरे-धीरे पूरे देश में लागू करने की योजना है।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल FASTag को लेकर है। मंत्रालय ने साफ किया है कि कैमरे से टोल वसूली शुरू होने के बाद भी FASTag अनिवार्य बना रहेगा। वजह यह है कि अभी ज्यादातर FASTag सीधे बैंक खातों से नहीं, बल्कि वॉलेट सिस्टम से जुड़े हैं। ऐसे में नई व्यवस्था के बावजूद मौजूदा FASTag आधारित सिस्टम समानांतर रूप से चलता रहेगा।
सरकार का कहना है कि फिलहाल यह एक ट्रांजिशन फेज है। आने वाले समय में जब सभी अकाउंट और सिस्टम पूरी तरह इंटीग्रेट हो जाएंगे, तब FASTag की भूमिका पर दोबारा फैसला लिया जा सकता है। अभी के लिए वाहन चालकों को FASTag लगाए रखना जरूरी होगा।
Our Final Thoughts
ऑटोमैटिक टोल वसूली की दिशा में यह कदम भारत के सड़क परिवहन सिस्टम को ज्यादा आधुनिक और सुचारू बनाने की ओर बड़ा संकेत है। टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें सिर्फ समय की बर्बादी नहीं हैं, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण भी बढ़ाती हैं। ANPR आधारित टोल कलेक्शन से इन तीनों समस्याओं पर एक साथ काम हो सकता है।
हालांकि FASTag को फिलहाल बनाए रखना सरकार की व्यावहारिक मजबूरी है, क्योंकि देशभर में करोड़ों वाहन अभी भी वॉलेट-बेस्ड सिस्टम से जुड़े हुए हैं। एक झटके में पूरी व्यवस्था बदलना न तो तकनीकी रूप से आसान है और न ही प्रशासनिक रूप से।
यह साफ है कि सरकार चरणबद्ध तरीके से टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और बैरियर-फ्री बनाना चाहती है। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में टोल प्लाजा इतिहास बन सकते हैं। फिलहाल वाहन चालकों के लिए यही समझदारी है कि वे FASTag को एक्टिव रखें और नए सिस्टम के लिए तैयार रहें।
