एआर रहमान 'सांप्रदायिकता' विवाद: अनुराधा पौडवाल ने तोड़ी चुप्पी, संगीत के जादूगर को बताया 'संत'; मीडिया पर भी दागे सवाल
एंटरटेनमेंट डेस्क | भारतीय संगीत जगत के दो दिग्गजों के बीच की बॉन्डिंग और हालिया विवाद ने फिल्म इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है। ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान (A.R. Rahman) पर लगे 'सांप्रदायिक' बयानों के आरोपों के बीच, सुरों की मल्लिका अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) उनके बचाव में मजबूती से खड़ी हुई हैं। अनुराधा ने न केवल रहमान का समर्थन किया है, बल्कि उन्हें एक 'संत' की उपाधि भी दी है।
अनुराधा पौडवाल का बयान: "वह विवादों से बहुत ऊपर हैं"
न्यूज एजेंसी ANI से हुई एक खास बातचीत के दौरान अनुराधा पौडवाल ने एआर रहमान की शख्सियत पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी रहमान से कोई व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन उनके द्वारा रचित संगीत उनकी रूह की गवाही देता है।
अनुराधा ने कहा:
"मैं रहमान साहब को उनके संगीत की गहराई से पहचानती हूँ। जिस तरह की धुनें वह बनाते हैं, वह साफ दर्शाती हैं कि वह एक बहुत ही शांत और संत स्वभाव के इंसान हैं। उनके काम में एक रूहानियत (Spirituality) महसूस होती है। वह वास्तव में एक संत जैसे व्यक्ति हैं और उनका कद इन तमाम विवादों से कहीं बड़ा है।"
मीडिया की कार्यशैली पर उठाए सवाल
अनुराधा पौडवाल ने इस विवाद के पीछे मीडिया और इंटरव्यू लेने वालों की भूमिका को भी संदिग्ध बताया। उन्होंने अनुभवी कलाकार होने के नाते कहा कि अक्सर न्यूज़ चैनल और इंटरव्यूअर सीधे जवाबों से संतुष्ट नहीं होते। वे कुछ ऐसा मसाला या विवाद ढूंढते हैं जिससे सुर्खियाँ बन सकें। उनके अनुसार, कई बार कलाकारों की बातों को घुमा-फिराकर पेश किया जाता है ताकि विवाद पैदा हो, जबकि रहमान जैसे कलाकार इन छोटी सोच वाली बातों से बहुत ऊपर हैं।
क्या है पूरा विवाद? (Background)
विवाद की जड़ बीबीसी एशियन नेटवर्क (BBC Asian Network) को दिया गया एआर रहमान का एक इंटरव्यू है।
- सांप्रदायिकता का एंगल: जब रहमान से पूछा गया कि क्या उन्होंने बॉलीवुड में भेदभाव का सामना किया है, तो उन्होंने कहा कि पिछले 8 सालों में 'पावर शिफ्ट' होने की वजह से कुछ बदलाव आए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब सत्ता उन लोगों के हाथ में है जो रचनात्मक (Creative) नहीं हैं और इसमें सांप्रदायिकता का एंगल भी हो सकता है।
- 'छावा' की आलोचना: रहमान ने फिल्म 'छावा' (Chhava) के कुछ पहलुओं की भी आलोचना की थी, जबकि रोचक बात यह है कि इस फिल्म का संगीत स्वयं रहमान ने ही तैयार किया है। उनके इसी बयान को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया जा रहा था।
सुरों की मल्लिका का समर्थन: संगीत ही सबसे बड़ी गवाही
अनुराधा पौडवाल का मानना है कि रहमान ने भारतीय संगीत को वैश्विक पटल पर जो पहचान दिलाई है, वह बेमिसाल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक कलाकार की सबसे बड़ी गवाही उसका काम होता है। रहमान उस मुकाम पर पहुँच चुके हैं जहाँ किसी की छोटी बयानबाजी या विचारधारा उनके करियर को नुकसान नहीं पहुँचा सकती।
संपादकीय विश्लेषण
कला और राजनीति का टकराव हमेशा से संवेदनशील रहा है। एआर रहमान जैसे वैश्विक स्तर के कलाकार जब 'सांप्रदायिकता' या 'पावर शिफ्ट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो उसका विश्लेषण होना स्वाभाविक है। हालांकि, अनुराधा पौडवाल का बचाव यह याद दिलाता है कि कला को विचारधारा के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। अनुराधा का मीडिया पर लगाया गया आरोप भी गौर करने लायक है—क्या वास्तव में हम सुर्खियों की भूख में कलाकारों के वास्तविक अर्थों को खो रहे हैं? रहमान का संगीत रूहानी है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में दिए गए बयानों की व्याख्या अक्सर उनके संगीत से अलग सामाजिक संदर्भों में की जाती है। यह विवाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की आजादी और कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी के बीच की पतली रेखा को रेखांकित करता है।
