8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में 66% उछाल की तैयारी! दिल्ली में JCM की महाबैठक, फिटमेंट फैक्टर पर होगा बड़ा फैसला
नई दिल्ली, 25 फरवरी: केंद्र सरकार के करीब 1.15 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आज यानी 25 फरवरी की तारीख भारतीय श्रम इतिहास के पन्नों में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। देश की राजधानी दिल्ली में आज नेशनल काउंसिल (JCM) की स्टाफ साइड की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हो रही है। इस बैठक का एकमात्र और सबसे बड़ा एजेंडा '8वें वेतन आयोग' के समक्ष रखे जाने वाले मांगों के अंतिम ड्राफ्ट को मंजूरी देना है।
शिव गोपाल मिश्रा की अध्यक्षता वाली ड्राफ्टिंग कमेटी आज उन सभी प्रस्तावों को अंतिम रूप देगी, जो सरकारी कर्मचारियों के अगले 10 सालों का भविष्य तय करेंगे। इस बार कर्मचारी संगठनों ने केवल वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि गणना के तरीकों में भी बड़े बदलाव की मांग की है, जिससे न्यूनतम वेतन में ऐतिहासिक उछाल आने की उम्मीद है।
फिटमेंट फैक्टर और सालाना इंक्रीमेंट पर 'आर-पार' की रणनीति
7वें वेतन आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर को लेकर कर्मचारियों में काफी असंतोष था। वर्तमान में यह 2.57 गुना है, जिसे कर्मचारी यूनियन बढ़ाकर 3.25 करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी नेताओं का तर्क है कि बीते दशक में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में जिस अनुपात में वृद्धि हुई है, उसके मुकाबले मौजूदा वेतन वृद्धि नाकाफी है।
इसके साथ ही, एक और क्रांतिकारी मांग 3% के सालाना इंक्रीमेंट (Annual Increment) को बढ़ाकर 7% करने की है। यदि सरकार इस मांग पर विचार करती है, तो कर्मचारियों की करियर ग्रोथ की रफ्तार दोगुनी हो जाएगी। संगठनों का कहना है कि उच्च शिक्षा और कौशल विकास के इस दौर में कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ी है, इसलिए उन्हें मिलने वाला रिवॉर्ड भी बेहतर होना चाहिए।
परिवार की परिभाषा बदलने का तकनीकी दांव: बेसिक सैलरी में 66% का उछाल?
इस बार कर्मचारी महासंघ ने एक ऐसा तकनीकी प्रस्ताव तैयार किया है जो सरकार की गणना के आधार को ही चुनौती दे सकता है। वर्तमान में वेतन आयोग वेतन की गणना 'परिवार इकाई' (Family Unit) को 3 मानकर करता है (पति, पत्नी और दो बच्चे, जिसमें बच्चों को आधा गिना जाता है)।
यूनियन की मांग है कि:
- अब परिवार इकाई को 3 से बढ़ाकर 5 किया जाए।
- इसमें बुजुर्ग माता-पिता की निर्भरता को भी शामिल किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस '5 यूनिट' के फॉर्मूले को स्वीकार कर लेती है, तो 'न्यूनतम आवश्यकता' के आधार पर बेसिक सैलरी में सीधे तौर पर करीब 66% की वृद्धि हो सकती है। यह 7वें वेतन आयोग की तुलना में कहीं अधिक बड़ा वित्तीय लाभ होगा।
रिटायरमेंट बेनिफिट्स और भत्तों पर नए प्रस्तावों की झड़ी
बैठक के एजेंडे में केवल वर्तमान कर्मचारी ही नहीं, बल्कि भविष्य के रिटायर होने वाले कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखा गया है।
- अर्जित अवकाश (Leave Encashment): वर्तमान में रिटायरमेंट के समय अधिकतम 300 दिनों की छुट्टियों का पैसा मिलता है। इसे बढ़ाकर 400 दिन करने का प्रस्ताव है।
- फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA): उन क्षेत्रों में जहाँ CGHS (Central Government Health Scheme) की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ कर्मचारियों को मिलने वाला 1,000 रुपये का मेडिकल भत्ता अब गुजारे के लायक नहीं रह गया है। इसे सीधे 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग रखी जाएगी।
- LTC का नकद विकल्प: टिकट बुकिंग और लंबी प्रक्रिया की झंझट को खत्म करने के लिए Leave Travel Concession (LTC) को सीधे कैश के रूप में देने का विकल्प मांगा जा रहा है।
- शिक्षा भत्ता: बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाले भत्ते का दायरा स्नातक से बढ़ाकर पोस्ट ग्रेजुएशन और प्रोफेशनल कोर्सेज तक करने की सिफारिश की गई है।
रक्षा और डाक विभाग की विशिष्ट मांगें
ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) ने इस बार रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को अपनी प्राथमिकता बताया है। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि 30 साल की सेवा के दौरान कम से कम 5 पदोन्नति (Promotion) सुनिश्चित की जाएं, ताकि कर्मचारी एक ही पद पर रिटायर न हो।
वहीं, डाक विभाग के कर्मचारियों ने एक 'मल्टी-लेवल फिटमेंट फैक्टर' (3.0 से 3.25 तक) का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि निचले ग्रेड के कर्मचारियों को ऊपर के अधिकारियों की तुलना में अधिक प्रतिशत वृद्धि मिलनी चाहिए ताकि आर्थिक असमानता कम हो सके।
क्या है आगे का रास्ता?
आज की बैठक में तैयार होने वाले 'साझा ज्ञापन' (Common Memorandum) को 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा। जस्टिस देसाई और उनकी टीम इन मांगों का आर्थिक विश्लेषण करेगी और फिर अपनी सिफारिशें सरकार को भेजेगी। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर 8वें वेतन आयोग के गठन की समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन JCM की यह सक्रियता सरकार पर दबाव बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
TheTrendingPeople.com की राय में
8वें वेतन आयोग की मांग केवल कर्मचारियों के बैंक बैलेंस को बढ़ाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था में उपभोग (Consumption) बढ़ाने का एक बड़ा जरिया भी हो सकता है। यदि 54 लाख कर्मचारियों और 67 लाख पेंशनभोगियों के हाथ में अधिक पैसा आता है, तो बाजार में मांग बढ़ेगी। हालांकि, सरकार के लिए चुनौती राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करने की होगी। 'परिवार इकाई' को 5 करने की मांग तार्किक है क्योंकि भारत के सामाजिक ढांचे में माता-पिता की जिम्मेदारी बच्चों पर ही होती है। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह चुनावी समीकरणों और आर्थिक वास्तविकता के बीच कैसे संतुलन बिठाती है।
