वेनेजुएला में 'तख्तापलट' के बाद अमेरिका का नया 'फरमान'—मादुरो जेल में, अब ट्रंप बोले "चीन-रूस को भूलो, तेल बेचना है तो अमेरिका की शर्त मानो
वाशिंगटन/कराकस, दिनांक: 7 जनवरी 2026 — लैटिन अमेरिका की राजनीति और वैश्विक तेल बाजार में एक ऐतिहासिक और नाटकीय भूचाल आ गया है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) की अमेरिकी विशेष बलों द्वारा गिरफ्तारी और उन्हें हथकड़ियों में न्यूयॉर्क ले जाए जाने की घटना ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है। इस 'ऑपरेशन' के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन ने वेनेजुएला की नई अंतरिम सरकार के लिए एक सख्त 'लक्ष्मण रेखा' खींच दी है।
ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के तेल खजाने की चाबी अपनी जेब में रखते हुए साफ संकेत दिए हैं कि अगर इस दक्षिण अमेरिकी देश को अपनी अर्थव्यवस्था बचानी है, तो उसे अपने पुराने दोस्तों—चीन, रूस, ईरान और क्यूबा—को अलविदा कहना होगा। यह कदम न केवल वेनेजुएला की विदेश नीति को 180 डिग्री घुमाने वाला है, बल्कि यह ऊर्जा की दुनिया में अमेरिका के वर्चस्व को भी स्थापित करता है।
ट्रंप का अल्टीमेटम: "इन 4 देशों से खत्म करो रिश्ता"
एबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज (Delcy Rodriguez) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
- शर्त: निर्देश में कहा गया है कि वेनेजुएला तेल उत्पादन और भारी कच्चे तेल (Heavy Crude Oil) की बिक्री में केवल और केवल अमेरिका को प्राथमिकता दे।
- चार देशों पर बैन: अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते पूरी तरह समाप्त करे।
- भारत का कोण: इन देशों में रूस भी शामिल है, जो भारत का करीबी और भरोसेमंद मित्र माना जाता है। अमेरिका की यह मांग वैश्विक समीकरणों को उलझाने वाली है।
अमेरिका का संदेश साफ है— "अगर तेल बेचना है और प्रतिबंधों से राहत चाहिए, तो इन चार देशों को अपने दरवाजे से बाहर करो।"
ह्यूगो शावेज के दौर का अंत?
अमेरिका की यह मांग ऐसे समय में आई है जब वेनेजुएला दशकों से इन चार देशों पर अपनी जीवनरेखा के लिए निर्भर रहा है।
- इतिहास: दिवंगत नेता ह्यूगो शावेज और बाद में निकोलस मादुरो के शासनकाल में चीन ने कर्ज दिया, रूस ने हथियार और सुरक्षा दी, ईरान ने ईंधन दिया और क्यूबा ने खुफिया सहायता प्रदान की।
- बदलाव: इन रिश्तों को तोड़ना वेनेजुएला के लिए अपनी रीढ़ की हड्डी तोड़ने जैसा है। यह वेनेजुएला की समाजवादी विदेश नीति में एक ऐतिहासिक और अनिवार्य बदलाव होगा।
तेल का खेल: 30 से 50 मिलियन बैरल का सौदा
मंगलवार शाम को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान देकर अपनी मंशा जाहिर कर दी। उन्होंने वेनेजुएला के तेल भंडार को लेकर एक बड़ी घोषणा की।
- आपूर्ति: ट्रंप ने कहा, "वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति करेगा।"
- कीमत: इस तेल की मौजूदा बाजार कीमत करीब 2.8 अरब डॉलर आंकी जा रही है।
- राजस्व: ट्रंप ने कहा कि यह तेल बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा और इससे होने वाली आय का इस्तेमाल दोनों देशों के हितों के लिए किया जाएगा।
इसके साथ ही, ट्रंप ने घोषणा की है कि उनका प्रशासन अगले सप्ताह अमेरिकी तेल कंपनियों (जैसे शेवरॉन, एक्सॉनमोबिल) के साथ वेनेजुएला में निवेश को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा करेगा। इसका सीधा मतलब है कि वेनेजुएला के तेल कुओं पर अब अमेरिकी कंपनियों का नियंत्रण बढ़ने वाला है।
"कब्जा नहीं, दिशा देंगे": अमेरिका का दावा
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया को बताया है कि अमेरिका का उद्देश्य वेनेजुएला पर कब्जा करना नहीं है। हालांकि, ट्रंप के बयान और शर्तें यह संकेत देती हैं कि वे कराकस के भविष्य को दिशा देने में 'बिग ब्रदर' की भूमिका निभाएंगे। तेल राजस्व (Oil Revenue) के माध्यम से अमेरिका वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने की स्थिति में होगा। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला देश अब वाशिंगटन के इशारों पर अपनी ऊर्जा नीति तय करेगा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
यह घटनाक्रम आधुनिक इतिहास में 'गनबोट डिप्लोमेसी' का सबसे बड़ा उदाहरण है। मादुरो की गिरफ्तारी और उसके तुरंत बाद तेल पर नियंत्रण की शर्तें यह बताती हैं कि यह लड़ाई लोकतंत्र से ज्यादा 'ब्लैक गोल्ड' (तेल) की थी।
The Trending People का विश्लेषण है कि वेनेजुएला को चीन और रूस से दूर करना अमेरिका की एक बड़ी भू-राजनीतिक जीत होगी। इससे लैटिन अमेरिका में रूस और चीन का प्रभाव लगभग खत्म हो जाएगा। हालांकि, इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर सकारात्मक हो सकता है क्योंकि बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को फायदा होगा। लेकिन संप्रभुता (Sovereignty) के लिहाज से देखें तो वेनेजुएला अब अपनी शर्तें तय करने की स्थिति में नहीं बचा है। यह नई दुनिया की नई हकीकत है—जिसके पास ताकत है, वही नियम बनाता है।
