वैश्विक तूफानों के बीच भारतीय निर्यात की 'रफ्तार'—दिसंबर में 38.5 अरब डॉलर का कारोबार, लेकिन 'घाटे' ने दी नई चुनौती
नई दिल्ली, दिनांक: 15 जनवरी 2026 — वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाई अनिश्चितता, युद्ध के बादल और सप्लाई चेन की बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपना दमखसम दिखाया है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने नए साल की शुरुआत में एक मिश्रित तस्वीर पेश की है। जहाँ एक तरफ देश के वस्तु निर्यात (Merchandise Exports) में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ बढ़ते आयात (Imports) ने व्यापार घाटे (Trade Deficit) को एक चिंताजनक स्तर पर पहुंचा दिया है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल (Rajesh Agrawal) ने आंकड़ों को सार्वजनिक करते हुए बताया कि दिसंबर 2025 में देश का वस्तु निर्यात 1.87 प्रतिशत बढ़कर 38.5 अरब डॉलर हो गया है। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजारों में अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहे हैं, भले ही मांग में सुस्ती क्यों न हो।
निर्यात के आंकड़े: मंदी को मात देता 'मेड इन इंडिया'
वाणिज्य सचिव ने जोर देकर कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं (Global Uncertainties) के बावजूद भारत का निर्यात सकारात्मक वृद्धि (Positive Growth) दर्ज कर रहा है, जो भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लचीलेपन (Resilience) को दर्शाता है।
- दिसंबर का प्रदर्शन: दिसंबर 2025 में वस्तु निर्यात 38.5 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1.87% अधिक है।
- अप्रैल-दिसंबर का हाल: चालू वित्त वर्ष (2025-26) के पहले 9 महीनों (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान कुल निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है। यह निरंतरता इस बात का प्रमाण है कि पश्चिमी देशों में मंदी की आहट का भारतीय निर्यात पर बहुत गहरा असर नहीं पड़ा है।
आयात और घाटे का गणित: 25 अरब डॉलर का 'गैप'
सिक्के का दूसरा पहलू थोड़ा चिंताजनक है। निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ आयात में भी भारी उछाल आया है, जिससे देश का व्यापार संतुलन बिगड़ गया है।
- आयात में उछाल: दिसंबर 2025 में भारत का आयात बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया। तुलना करें तो दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 58.43 अरब डॉलर था। आयात में यह वृद्धि घरेलू मांग में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का परिणाम हो सकती है।
- व्यापार घाटा (Trade Deficit): निर्यात और आयात के बीच का अंतर, यानी व्यापार घाटा, समीक्षाधीन महीने में बढ़कर 25 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। यह एक बड़ा आंकड़ा है जो देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit - CAD) पर दबाव डाल सकता है।
850 अरब डॉलर का 'महा-लक्ष्य'
इन चुनौतियों के बीच सरकार अपने लक्ष्यों को लेकर बेहद आश्वस्त है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवाएं मिलाकर) 850 अरब डॉलर से अधिक रहने का अनुमान है।
- सेवा क्षेत्र का सहारा: सरकार को उम्मीद है कि वस्तु व्यापार में हुए घाटे की भरपाई सेवा क्षेत्र (Services Sector) के शानदार प्रदर्शन से हो जाएगी। आईटी और कंसल्टेंसी सेवाओं में भारत का दबदबा कायम है, जो कुल निर्यात के आंकड़ों को ऊपर ले जाएगा।
- रणनीति: सरकार नए बाजारों (जैसे लैटिन अमेरिका और अफ्रीका) की तलाश कर रही है और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का लाभ उठाने की कोशिश में है ताकि 850 अरब डॉलर का जादूई आंकड़ा पार किया जा सके।
वैश्विक चुनौतियां और भारत की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि लाल सागर (Red Sea) में संकट और पश्चिमी देशों में ब्याज दरों की ऊंची स्थिति ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में 1.87% की वृद्धि छोटी लग सकती है, लेकिन यह स्थिरता का संकेत है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मास्युटिकल्स जैसे सेक्टर्स ने निर्यात को संभाले रखा है, जबकि जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर में थोड़ी नरमी देखी जा रही है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
दिसंबर के व्यापारिक आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था 'ग्लोबल हेडविंड्स' (वैश्विक विपरीत हवाओं) का सामना मजबूती से कर रही है। निर्यात का सकारात्मक क्षेत्र में रहना एक बड़ी राहत है।
The Trending People का विश्लेषण है कि 25 अरब डॉलर का व्यापार घाटा एक 'रेड फ्लैग' है जिस पर नीति निर्माताओं को ध्यान देना होगा। आयात में बढ़ोतरी यह भी बताती है कि घरेलू खपत और विनिर्माण के लिए कच्चे माल की मांग बढ़ रही है, जो आर्थिक गतिविधि के लिहाज से अच्छा संकेत है। लेकिन अगर निर्यात की रफ्तार आयात से कम रही, तो यह रुपये की सेहत के लिए ठीक नहीं होगा। 850 अरब डॉलर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन सेवा क्षेत्र की 'संजीवनी' से इसे हासिल करना संभव है।
