दावोस में ट्रंप का 'शांति' का शंखनाद और हमास को 'मौत' का अल्टीमेटम—कहा "हथियार नहीं डाले तो उड़ा दिए जाओगे," गाजा पीस बोर्ड की हुई शुरुआत
दावोस/वाशिंगटन, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मध्य-पूर्व (Middle East) की शांति के लिए अपना सबसे बड़ा और आक्रामक पत्ता फेंक दिया है। गुरुवार को एक ऐतिहासिक और कूटनीतिक रूप से भारी-भरकम कार्यक्रम में ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर 'गाजा पीस बोर्ड' (Gaza Peace Board) की शुरुआत की घोषणा की। लेकिन शांति की इस पहल के साथ ही उन्होंने फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह हमास (Hamas) को अब तक की सबसे सीधी और भयानक चेतावनी भी दे डाली। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर हमास हथियार नहीं छोड़ता और सरेंडर नहीं करता, तो उसका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा।
शांति और युद्ध की इस मिली-जुली भाषा ने वैश्विक नेताओं को चौंका दिया है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से इतर आयोजित 'बोर्ड ऑफ पीस चार्टर' की साइनिंग सेरेमनी की अध्यक्षता करते हुए ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में दावा किया कि उनके नेतृत्व में मध्य-पूर्व में शांति लौट रही है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि यह बैठक बेहद अहम है क्योंकि यह गाजा पीस बोर्ड के आधिकारिक गठन का मौका है, जो क्षेत्र के भविष्य की रूपरेखा तय करेगा।
अपने संबोधन में ट्रंप ने हमास के लिए कोई 'बैकडोर' या समझौते की गुंजाइश नहीं छोड़ी। उन्होंने साफ कर दिया कि हमास का निरस्त्रीकरण (Disarmament) किसी बातचीत का विषय नहीं है, बल्कि यह एक पूर्वशर्त है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमास हथियार छोड़ने पर सहमत नहीं होता, तो उन्हें उड़ा दिया जाएगा (Will be blown away)। यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका अब गाजा में हमास के अस्तित्व को स्वीकार करने के मूड में बिल्कुल नहीं है। ट्रंप का यह रुख इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आक्रामक सैन्य अभियान को खुला समर्थन देने जैसा है।
ट्रंप द्वारा प्रस्तावित यह 'गाजा पीस बोर्ड' केवल कागजी शेर नहीं होगा, बल्कि इसे व्यापक अधिकार दिए जाने की बात कही गई है। यह बोर्ड गाजा में युद्धविराम लागू करने, युद्धग्रस्त क्षेत्र के पुनर्निर्माण और सुरक्षा समन्वय की निगरानी के लिए एक तंत्र (Mechanism) के रूप में काम करेगा। इसका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि गाजा से दोबारा इजरायल पर कोई हमला न हो और मानवीय सहायता सही हाथों में पहुंचे। इसके साथ ही, भविष्य में इस बोर्ड का दायरा बढ़ाकर क्षेत्र से बाहर के संघर्षों को संबोधित करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा, जो इसे एक वैश्विक पुलिसिंग बॉडी जैसा रूप दे सकता है।
इस साइनिंग सेरेमनी की कूटनीतिक अहमियत तब और बढ़ गई जब ट्रंप के साथ मंच पर बहरीन और मोरक्को के नेताओं के साथ-साथ अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव भी मौजूद थे। इन मुस्लिम बहुल देशों के नेताओं की उपस्थिति ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वे अरब और मुस्लिम दुनिया को इजरायल के करीब लाकर हमास को अलग-थलग करना चाहते हैं। ट्रंप ने ऐलान किया कि वह स्वयं इस बोर्ड ऑफ पीस के प्रारंभिक अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे, जो यह दर्शाता है कि वे इस मुद्दे को अपनी व्यक्तिगत विरासत (Legacy) से जोड़कर देख रहे हैं।
दावोस में हुई इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो गई है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप शांति की पहल के नाम पर दबाव की नई रणनीति अपना रहे हैं। हमास को खत्म करने की धमकी और शांति बोर्ड का गठन एक विरोधाभास जैसा लगता है। सवाल यह भी है कि क्या हमास इस धमकी के आगे झुकेगा या यह संघर्ष को और खूनी बना देगा? वहीं, समर्थकों का मानना है कि ताकत की भाषा ही मध्य-पूर्व में शांति ला सकती है और ट्रंप ने सही नस पर हाथ रखा है। बहरहाल, दुनिया की नजरें अब इस बोर्ड के अगले कदम और हमास की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
डोनाल्ड ट्रंप का 'गाजा पीस बोर्ड' एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, लेकिन इसकी सफलता की राह में कांटों की कमी नहीं है। शांति कभी भी एकतरफा शर्तों पर नहीं आती। हमास को खत्म करने की धमकी देकर ट्रंप ने इजरायल को खुश तो कर दिया है, लेकिन इससे गाजा की आम जनता के मन में अमेरिका के प्रति अविश्वास और गहरा सकता है।
The Trending People का विश्लेषण है कि बहरीन और मोरक्को जैसे देशों को साथ लाकर ट्रंप ने 'अब्राहम अकॉर्ड्स' वाली अपनी पुरानी कूटनीति को फिर से जिंदा किया है। अगर यह बोर्ड वास्तव में गाजा के पुनर्निर्माण पर ध्यान देता है, तो यह एक गेमचेंजर हो सकता है। लेकिन अगर यह केवल हमास को कुचलने का एक और मंच बना, तो शांति दूर की कौड़ी साबित होगी। दुनिया को इंतजार है कि क्या यह 'पीस बोर्ड' वाकई शांति लाएगा या युद्ध का नया अध्याय लिखेगा।
