घर खरीदारों को मिलेगा तोहफा? रियल एस्टेट ने मांगी होम लोन पर 5 लाख की छूट, 90 लाख तक के घर को 'किफायती' मानने की अपील
नई दिल्ली, दिनांक: 23 जनवरी 2026 — आगामी केंद्रीय बजट से पहले देश के रियल एस्टेट सेक्टर ने सरकार के सामने अपनी उम्मीदों का पिटारा खोल दिया है। रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय 'नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल' (NAREDCO) ने वित्त मंत्रालय के सामने कई अहम और दूरगामी मांगें रखी हैं, जो सीधे तौर पर आम आदमी के घर के सपने और डेवलपर्स की वित्तीय सेहत से जुड़ी हैं। नारेडको ने सबसे जोरदार मांग आवास ऋण (Home Loan) पर ब्याज में मिलने वाली कर छूट की सीमा को बढ़ाने को लेकर की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा 2 लाख रुपये की सीमा अब नाकाफी है और इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए। इसके अलावा, रियल एस्टेट क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर 'उद्योग' (Industry Status) का दर्जा देने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई गई है।
नारेडको ने किफायती आवास (Affordable Housing) की परिभाषा में भी बड़े बदलाव की वकालत की है। संगठन का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में जमीन की कीमतों, निर्माण सामग्री और लेबर कॉस्ट में भारी उछाल आया है। ऐसे में, बदलते आर्थिक हालात को देखते हुए अब 90 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों को 'किफायती आवास' की श्रेणी में माना जाना चाहिए। वर्तमान में यह सीमा 45 लाख रुपये है, जो मेट्रो शहरों के लिए व्यावहारिक नहीं रह गई है। अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तो मध्यम वर्ग के एक बड़े हिस्से को कर लाभ और सब्सिडी का फायदा मिल सकेगा, जो अब तक इस दायरे से बाहर थे।
नारेडको के चेयरमैन और दिग्गज रियल एस्टेट कारोबारी निरंजन हीरानंदानी ने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र ने रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन किफायती आवास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी के लिए आवास सुनिश्चित करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए और आवास क्षेत्र को अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों (Infrastructure Sectors) के समान महत्व और वित्तीय सुविधाएं मिलनी चाहिए। हीरानंदानी ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि सरकार के पास पड़ी खाली और अनुपयोगी जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत किफायती और मध्यम आय वर्ग के लिए आवास निर्माण में किया जाना चाहिए। इससे जमीन की लागत कम होगी और घर सस्ते हो सकेंगे।
होम लोन पर ब्याज छूट की सीमा बढ़ाने के तर्क को मजबूती देते हुए नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि 2 लाख रुपये की कर छूट की सीमा करीब 12 साल पहले तय की गई थी। उस समय घरों की कीमतें और ब्याज दरें आज के मुकाबले काफी अलग थीं। पिछले एक दशक में महंगाई और प्रॉपर्टी के दामों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है, इसलिए अब समय आ गया है कि इस सीमा को संशोधित कर 5 लाख रुपये किया जाए। इससे घर खरीदारों के हाथ में ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम बचेगी और वे ईएमआई का बोझ आसानी से उठा सकेंगे। इसके अलावा, जैन ने किराये के आवास (Rental Housing) को बढ़ावा देने के लिए भी कर प्रोत्साहन की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा समय में किराये से मिलने वाला रिटर्न (Rental Yield) केवल 1 से 3 प्रतिशत है, जो डेवलपर्स के लिए रेंटल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को अव्यावहारिक बनाता है। सरकार को इस क्षेत्र में टैक्स हॉलिडे या अन्य छूट देनी चाहिए ताकि रेंटल हाउसिंग स्टॉक बढ़ सके।
नारेडको ने अपने ज्ञापन में रियल एस्टेट को 'उद्योग' का दर्जा देने की मांग को फिर से दोहराया है। संगठन का कहना है कि इससे डेवलपर्स को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सस्ती दरों पर कर्ज मिल सकेगा। अभी उन्हें कमर्शियल दरों पर कर्ज लेना पड़ता है, जिससे प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाती है। उद्योग का दर्जा मिलने से जमीन, निर्माण सामग्री और अन्य कच्चे माल के लिए फंडिंग आसान हो जाएगी, जिसका सीधा लाभ घर खरीदारों को कीमतों में कमी के रूप में मिलेगा। नारेडको का अनुमान है कि 2030 तक भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर का आकार 1,000 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और यह रोजगार व जीडीपी में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है, इसलिए इस फैसले को अब टाला नहीं जाना चाहिए। इस मौके पर नारेडको ने शहरी एवं रियल एस्टेट विकास सम्मेलन 2026 के आयोजन की भी घोषणा की, जो 13-14 फरवरी को नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित किया जाएगा।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
रियल एस्टेट सेक्टर की ये मांगें समय की नजाकत को देखते हुए जायज लगती हैं। 2 लाख की छूट सीमा वास्तव में पुरानी हो चुकी है, खासकर जब मेट्रो शहरों में एक 2BHK फ्लैट की कीमत भी करोड़ रुपये के आसपास है। किफायती आवास की परिभाषा को 45 लाख से 90 लाख करना मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत होगी।
The Trending People का विश्लेषण है कि अगर सरकार इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाती है, तो इससे न केवल रियल एस्टेट में जान आएगी, बल्कि सीमेंट, स्टील और पेंट जैसे 250 से अधिक सहायक उद्योगों को भी बूस्ट मिलेगा। घर खरीदारों के लिए बजट 2026 एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। देखना होगा कि वित्त मंत्री इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरती हैं।
