कल है बसंत पंचमी, साल का पहला 'अबूझ मुहूर्त'—विवाह हो या गृह प्रवेश, बिना पंडित जी से पूछे करें शुभ काम; जानें 2026 की 5 जादुई तारीखें
नई दिल्ली, दिनांक: 22 जनवरी 2026 — भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में समय की गणना का विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग शुद्धि और शुभ मुहूर्त देखना हमारी परंपरा का अभिन्न अंग रहा है। लेकिन साल में कुछ दिन ऐसे भी आते हैं जो अपने आप में इतने पवित्र और सिद्ध होते हैं कि उस दिन ग्रहों की चाल या नक्षत्रों की गणना देखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। ऐसे ही दिनों को शास्त्रों में 'अबूझ मुहूर्त' (Abujh Muhurat) या 'स्वयंसिद्ध मुहूर्त' की संज्ञा दी गई है। साल 2026 में कल, यानी 23 जनवरी को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी (Basant Panchami) का पर्व ऐसा ही एक महासंयोग लेकर आ रहा है।
ज्ञान की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाने वाली बसंत पंचमी को विवाह, मुंडन, विद्यारंभ और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए साल का सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बसंत पंचमी के अलावा भी साल 2026 में 4 और ऐसी तिथियां हैं, जब आप आंख मूंदकर कोई भी नया काम शुरू कर सकते हैं? आइए विस्तार से जानते हैं इन तिथियों के महत्व और उनके पीछे के ज्योतिषीय विज्ञान को।
क्या होता है 'अबूझ मुहूर्त'? खगोलीय विज्ञान और आस्था का संगम
शास्त्रों के अनुसार, जब ग्रहों की स्थिति और तिथियों का संयोग अत्यंत शुभ और दोषरहित होता है, तो वह पूरा दिन 'अबूझ मुहूर्त' बन जाता है। सामान्य दिनों में हमें राहुकाल, भद्रा या अशुभ योगों का विचार करना पड़ता है, लेकिन अबूझ मुहूर्त वाले दिन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति इतनी बलवान होती है कि वे अन्य सभी दोषों का शमन कर देते हैं। ऐसे दिनों में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नई संपत्ति की खरीदारी, वाहन क्रय या नए व्यापार की शुरुआत जैसे कार्य बिना किसी हिचकिचाहट या ज्योतिषी सलाह के किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इन तिथियों पर शुरू किए गए कार्यों में कभी विघ्न नहीं आता और वे निर्विघ्न संपन्न होते हैं।
1. बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026): प्रेम और ज्ञान का उत्सव
साल 2026 का पहला और सबसे महत्वपूर्ण अबूझ मुहूर्त कल यानी 23 जनवरी को है। बसंत पंचमी को 'श्री पंचमी' और 'ऋषि पंचमी' भी कहा जाता है। यह दिन ऋतुराज बसंत के आगमन का सूचक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि में ध्वनि और ज्ञान का संचार करने के लिए मां सरस्वती की रचना की थी। इसलिए यह दिन विद्यारंभ और कला की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ है। विवाह के लिहाज से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि इसे प्रेम के देवता कामदेव और रति की पूजा का दिन भी कहा जाता है। कल देश भर में हजारों जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे।
2. फुलेरा दूज (19 फरवरी 2026): दोषमुक्त विवाह का महापर्व
बसंत पंचमी के बाद फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाने वाली फुलेरा दूज (Phulera Dooj) साल का दूसरा सबसे बड़ा अबूझ मुहूर्त है। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 फरवरी को मनाया जाएगा। ब्रज मंडल में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे सबसे बड़ा और दोषमुक्त मुहूर्त माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में विवाह का योग नहीं बन रहा हो या जिन्हें कोई शुभ तिथि नहीं मिल पा रही हो, वे इस दिन बिना सोचे-समझे विवाह के बंधन में बंध सकते हैं। 2026 में शादियों के लिए यह दिन अत्यंत उत्तम रहेगा और इस दिन को 'विवाह का महाकुंभ' भी कहा जा सकता है।
3. अक्षय तृतीया (19 अप्रैल 2026): कभी क्षय न होने वाला पुण्य
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) कहते हैं। साल 2026 में यह पावन पर्व 19 अप्रैल को पड़ेगा। 'अक्षय' का शाब्दिक अर्थ है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और शुरू किया गया कार्य अनंत गुना फल देता है। यह दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित है। सोना खरीदने, नया घर लेने, गृह प्रवेश करने और नए व्यापार का श्रीगणेश करने के लिए यह साल का सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन खरीदी गई संपत्ति में हमेशा वृद्धि होती है।
4. विजयादशमी (20 अक्टूबर 2026): विजय और सफलता की गारंटी
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि यानी दशहरा (Vijayadashami), जो 2026 में 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, एक शक्तिशाली अबूझ मुहूर्त है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और 'विजय' का प्रतीक है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था और देवी दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन शुरू किया गया कोई भी मिशन, मुकदमा या नया काम हमेशा सफल होता है। क्षत्रिय समाज में इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा की परंपरा है। नए वाहन की खरीदारी, इलेक्ट्रॉनिक्स और करियर से जुड़ी नई शुरुआत (जैसे नौकरी ज्वॉइन करना) के लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
5. देवउठनी एकादशी (20 नवंबर 2026): मांगलिक कार्यों का शंखनाद
साल का आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण अबूझ मुहूर्त देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) है, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की यह एकादशी 2026 में 20 नवंबर को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) से चार महीने की योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास कहते हैं। इस दौरान सभी मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जागते हैं और इसी के साथ शहनाइयां बजनी शुरू हो जाती हैं। इसे विवाह के लिए साल का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। तुलसी विवाह का आयोजन भी इसी दिन होता है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
अबूझ मुहूर्त भारतीय ज्योतिष विज्ञान की वह अद्भुत खोज है जो इंसान को अनिश्चितता के भंवर से निकालकर विश्वास के धरातल पर लाती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब हर किसी के पास समय की कमी है, ये 5 तिथियां एक 'यूनिवर्सल पास' की तरह काम करती हैं।
The Trending People का विश्लेषण है कि मुहूर्त का महत्व केवल ग्रह-नक्षत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक मनोवैज्ञानिक पहलू भी है। जब हम किसी कार्य को यह सोचकर शुरू करते हैं कि 'आज का दिन शुभ है', तो हमारा आत्मविश्वास और सकारात्मकता (Positivity) अपने आप बढ़ जाती है, जो सफलता की पहली सीढ़ी है। बसंत पंचमी से लेकर देवउठनी एकादशी तक, ये तिथियां हमें प्रकृति, ईश्वर और अपनी परंपराओं से जुड़ने का मौका देती हैं। तो अगर आप भी 2026 में कोई नई शुरुआत करना चाहते हैं, तो इन तारीखों को अपने कैलेंडर में अभी से मार्क कर लें।
