तलाक की पोस्ट" पर अपर्णा यादव का 'मौन व्रत'—पति के गंभीर आरोपों के बीच पहली बार दिखीं 'छोटी बहू', आयोग की बैठक छोड़ी पर खिचड़ी भोज में बांटी मुस्कान
लखनऊ, दिनांक: 22 जनवरी 2026 — उत्तर प्रदेश के सबसे रसूखदार सियासी घराने 'मुलायम परिवार' (Mulayam Family) के भीतर चल रही उथल-पुथल अब सोशल मीडिया से निकलकर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव (Prateek Yadav) द्वारा इंस्टाग्राम पर अपनी पत्नी अपर्णा यादव (Aparna Yadav) के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने और 'जल्द तलाक' की बात कहने के बाद से लखनऊ के सियासी और सामाजिक गलियारों में सन्नाटा खिंचा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद के बीच बुधवार को अपर्णा यादव पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आईं, लेकिन उनका अंदाज सवालों के घेरे में रहा।
पति के आरोपों पर सफाई देने या प्रतिक्रिया व्यक्त करने के बजाय, अपर्णा यादव ने एक सधी हुई 'चुप्पी' साधे रखी। हालांकि, उनकी गतिविधियों ने कई संकेत दिए। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष होने के बावजूद वे आयोग की महत्वपूर्ण कार्यशाला में तो नहीं पहुंचीं, लेकिन मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में आयोजित एक 'खिचड़ी भोज' में जरूर शामिल हुईं। उनकी यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि वे अपने सार्वजनिक जीवन को निजी विवादों से अलग रखने की कोशिश कर रही हैं।
खिचड़ी भोज में 'सेवा और समर्पण' का संदेश
बुधवार को जब मीडिया की निगाहें अपर्णा यादव को तलाश रही थीं, तब वे लखनऊ के माधव सेवा आश्रम में मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में आयोजित समरसता खिचड़ी भोज कार्यक्रम में भाग ले रही थीं।
सोशल मीडिया पोस्ट: कार्यक्रम के बाद अपर्णा ने अपने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम अकाउंट पर इसका एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा, "खिचड़ी भोज में सहभागिता कर सेवा, समर्पण और सामाजिक सद्भाव के भाव को अनुभव करने का अवसर मिला। इस प्रकार के आयोजन समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा और सहयोग की भावना को सुदृढ़ करते हैं। आयोजकों एवं सेवा कार्य से जुड़े सभी साथियों का हृदय से अभिनंदन।"
रणनीति: विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पारिवारिक कलह के बावजूद उनकी सामाजिक सक्रियता और 'सेवा भाव' में कोई कमी नहीं आई है। वीडियो में वे सामान्य और शांत नजर आ रही थीं।
महिला आयोग की बैठक से दूरी: क्या है वजह?
दूसरी ओर, अपर्णा यादव की अनुपस्थिति एक सरकारी कार्यक्रम में चर्चा का विषय बनी रही।
कार्यशाला: बुधवार को ही राज्य महिला आयोग के सभागार में समाज कल्याण विभाग की एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें आयोग के सभी पदाधिकारी मौजूद थे, लेकिन उपाध्यक्ष अपर्णा यादव नदारद रहीं।
अध्यक्ष का बयान: जब मीडिया ने आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान से अपर्णा के पारिवारिक विवाद और उनकी अनुपस्थिति पर सवाल किया, तो उन्होंने इसे 'निजी मामला' बताकर पल्ला झाड़ लिया। डॉ. चौहान ने कहा, "यह अपर्णा यादव का नितांत निजी और पारिवारिक मामला है। वे एक सक्षम और समझदार महिला हैं और अपने निर्णय लेने में पूरी तरह समर्थ हैं। उनकी अनुपस्थिति के बारे में मुझे फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।"
प्रतीक यादव का 'इंस्टाग्राम विस्फोट' और सन्नाटा
इस पूरे विवाद की जड़ दो दिन पहले प्रतीक यादव द्वारा किए गए इंस्टाग्राम पोस्ट में है। सोमवार को प्रतीक ने आठ घंटे के भीतर दो ऐसे पोस्ट किए जिन्होंने खलबली मचा दी।
आरोप: प्रतीक ने अपनी पत्नी अपर्णा पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा था कि वे जल्द ही तलाक (Divorce) लेने वाले हैं। यह पोस्ट मुलायम सिंह यादव के परिवार के किसी सदस्य द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई अब तक की सबसे चौंकाने वाली टिप्पणी थी।
चुप्पी: हालांकि, उन दो पोस्ट्स के बाद से प्रतीक यादव ने भी सोशल मीडिया पर चुप्पी साध ली है। मंगलवार और बुधवार को उनकी तरफ से कोई नया अपडेट नहीं आया। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या परिवार के बड़ों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत करने की कोशिश की है?
पारिवारिक कलह या राजनीतिक दांव-पेच?
अपर्णा यादव, जो भाजपा की नेता हैं और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं, अक्सर अपनी बेबाक राय के लिए जानी जाती हैं। लेकिन अपने ही घर में उठे इस तूफान पर उनकी खामोशी कई सवाल खड़े करती है। प्रतीक यादव, जो राजनीति से दूर रहते हैं और अपना जिम बिजनेस संभालते हैं, का अचानक इस तरह सार्वजनिक मंच पर आना सामान्य नहीं है। क्या यह केवल एक भावनात्मक आवेग था या इसके पीछे कोई गहरी दरार है?
हमारी राय (The Trending People Analysis)
किसी भी सार्वजनिक हस्ती का निजी जीवन जब चौराहे पर आता है, तो वह केवल गॉसिप नहीं, बल्कि एक सामाजिक विमर्श का मुद्दा बन जाता है। अपर्णा यादव का महिला आयोग की उपाध्यक्ष के पद पर होना इस मामले को और संवेदनशील बनाता है। एक तरफ वे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाली संस्था का प्रतिनिधित्व करती हैं, तो दूसरी तरफ उनका अपना वैवाहिक जीवन सवालों के घेरे में है।
The Trending People का विश्लेषण है कि अपर्णा यादव की चुप्पी एक परिपक्व कदम हो सकता है। सोशल मीडिया पर लड़ना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने खिचड़ी भोज में शामिल होकर यह दिखाने की कोशिश की है कि वे 'पब्लिक ड्यूटी' और 'प्राइवेट लाइफ' को अलग रख सकती हैं। हालांकि, प्रतीक यादव के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, देर-सवेर उन्हें अपना पक्ष रखना ही होगा, क्योंकि मौन अक्सर सहमतियों और असहमतियों के कई अर्थ निकाल देता है। फिलहाल, यह देखना होगा कि क्या यह रिश्ता संभलता है या लखनऊ की अदालतों की तरफ मुड़ता है।
