ईरान–वेनेजुएला हथियार सौदे पर अमेरिका सख्त, 10 कंपनियों पर प्रतिबंध
नई दिल्ली — अमेरिका ने ईरान और वेनेजुएला के बीच कथित हथियार और ड्रोन व्यापार को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए 10 कंपनियों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान ने वेनेजुएला को पारंपरिक हथियारों के साथ ईरानी डिजाइन के लड़ाकू ड्रोन सप्लाई किए, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है।
अमेरिकी विदेश विभाग और वित्त विभाग के मुताबिक, वेनेजुएला स्थित एक कंपनी करोड़ों डॉलर के ईरानी ड्रोन सौदे में शामिल थी। इन ड्रोन का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिसे अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती मान रहा है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने प्रतिबंधित सैन्य गतिविधियां दोबारा शुरू कीं, तो उसे पहले से भी ज्यादा कड़े नतीजे भुगतने होंगे।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि पहले के हमलों के बाद ईरान वैकल्पिक सैन्य ठिकानों की तलाश कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन मध्य-पूर्व में शांति के लिए ईरान के प्रभाव को सीमित करना जरूरी है।
हमारी राय
ईरान और वेनेजुएला के कथित हथियार और ड्रोन सौदे पर अमेरिका का सख्त रुख यह दिखाता है कि वैश्विक राजनीति में सुरक्षा और प्रभाव की लड़ाई कितनी तेज हो चुकी है। अमेरिका का कहना है कि ऐसे सौदे न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाते हैं, बल्कि उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। प्रतिबंधों का मकसद ईरान के सैन्य विस्तार और उसके प्रभाव को सीमित करना है, लेकिन इतिहास बताता है कि सिर्फ प्रतिबंधों से स्थायी समाधान नहीं निकलता।
डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी और साथ ही बातचीत की पेशकश यह संकेत देती है कि अमेरिका दबाव और कूटनीति—दोनों रास्ते खुले रखना चाहता है। मध्य-पूर्व पहले ही तनाव से भरा हुआ है और किसी भी नई सैन्य गतिविधि का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। हमारी राय में, शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ संवाद और अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान ही दीर्घकालिक शांति की कुंजी है। एकतरफा कार्रवाई की बजाय बहुपक्षीय कूटनीति ज्यादा असरदार साबित हो सकती है।
