एमपी में नए साल की 'डबल डोज'—बुजुर्गों की पेंशन होगी दोगुनी, कॉलेज स्टूडेंट्स की 'बंक' पर लगेगा 'सार्थक' लॉक
भोपाल, दिनांक: 30 दिसंबर 2025 — नया साल 2026 मध्य प्रदेश के लाखों लोगों के लिए मिली-जुली खबरें लेकर आ रहा है। एक तरफ जहां राज्य सरकार बुजुर्गों और दिव्यांगों की झोली भरने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कॉलेज में मटरगस्ती करने वाले छात्रों पर नकेल कसने का 'डिजिटल प्लान' भी तैयार हो चुका है। मोहन यादव सरकार जल्द ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन (Social Security Pension) में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। साथ ही, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अब 'सार्थक ऐप' (Sarthak App) को हथियार बनाया जाएगा।
सामाजिक न्याय और उच्च शिक्षा विभाग की ओर से आए इन बयानों ने प्रदेश की प्रशासनिक दिशा स्पष्ट कर दी है—'कल्याण के साथ अनुशासन'। आइए जानते हैं सरकार के पिटारे में और क्या-क्या है।
पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी: 600 नहीं, अब मिलेंगे 1200 रुपये?
प्रदेश के लाखों निराश्रितों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए राहत की बड़ी खबर है। महंगाई के इस दौर में 600 रुपये की मामूली पेंशन ऊंट के मुंह में जीरे के समान थी, जिसे सरकार अब बढ़ाने जा रही है।
- दावा: सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने दावा किया है कि पेंशन राशि बढ़ाने के लिए विभागीय स्तर पर लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं और फाइलें प्रक्रिया में हैं।
- निर्णय जल्द: उन्होंने संकेत दिए हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कभी भी इस पर अंतिम मुहर लगा सकते हैं।
- गणित: वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों में अधिकतम 600 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। राज्य का अंशदान बढ़ने के बाद यह राशि 800 से 1200 रुपये तक होने की प्रबल संभावना है।
यह कदम लोकसभा चुनावों के बाद सरकार की छवि को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है। मंत्री ने दिव्यांगजनों के लिए रोजगार, सहायक उपकरण वितरण और स्मार्ट क्लास जैसी योजनाओं को भी अपनी उपलब्धियों में गिनाया।
कॉलेजों में 'डिजिटल हाजिरी': अब नहीं चलेगा 'बंक' का बहाना
अगर आप कॉलेज स्टूडेंट हैं और क्लास बंक करके दोस्तों के साथ घूमने का प्लान बनाते हैं, तो सावधान हो जाइए। सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन लाने के लिए तकनीक का सहारा लिया है।
- सार्थक ऐप: उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले सत्र से प्रदेश के सभी कॉलेजों में विद्यार्थियों की उपस्थिति 'सार्थक ऐप' के जरिए दर्ज होगी। यह जीपीएस आधारित सिस्टम हो सकता है, जिससे छात्र कॉलेज परिसर में रहकर ही हाजिरी लगा पाएंगे। इससे 'प्रोक्सी' अटेंडेंस और बंक मारने की संस्कृति पर पूर्ण विराम लगेगा।
- नवाचार: मंत्री ने बताया कि शोध (Research) को बढ़ावा देने के लिए सभी पीजी कॉलेजों में रिसर्च सेंटर बनेंगे। इसके अलावा, तकनीकी शिक्षा में समय की मांग को देखते हुए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ड्रोन टेक्नोलॉजी के कोर्स पढ़ाए जाएंगे।
- अतिथि विद्वान: एक और राहत की खबर यह है कि अतिथि विद्वानों (Guest Faculties) को बाहर नहीं किया जाएगा, बल्कि उनका समायोजन होगा।
उज्जैन को सौगात: आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए उज्जैन में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किया जाएगा। साथ ही, आयुष के सभी कॉलेज अब 100 सीटर होंगे, जिससे डॉक्टरों की कमी पूरी होगी।
नीली क्रांति: मछली पालन अब सिर्फ 'भोजन' नहीं, 'पर्यटन' भी
सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र (Fisheries Sector) को लेकर भी एक अनूठा विजन पेश किया है। अब मछली पालन को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर इसे पर्यटन (Tourism) से जोड़ा जाएगा।
- आंकड़े: मछुआ कल्याण राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने बताया कि पिछले दो सालों में प्रदेश में मत्स्य उत्पादन 3.41 लाख टन से बढ़कर 4.45 लाख टन हो गया है।
- टूरिज्म का तड़का: प्रदेश में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क, रिसर्च सेंटर, टनल एक्वेरियम (Tunnel Aquarium) और इनक्यूबेशन यूनिट जैसे नवाचार किए जा रहे हैं।
सोच: पर्यटक अब रंग-बिरंगी मछलियों को देखने टनल एक्वेरियम आएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। सरकार मत्स्य महासंघ के जरिए ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी जोर दे रही है।
हमारी राय
मध्य प्रदेश सरकार के ये फैसले 'वेलफेयर' और 'डेवलपमेंट' का संतुलित मिश्रण हैं। पेंशन बढ़ाना एक मानवीय कदम है जिसकी सख्त जरूरत थी। 600 रुपये में आज के दौर में गुजारा नामुमकिन है। वहीं, 'सार्थक ऐप' से हाजिरी लगाना शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने में मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते इसे सही नीयत और तकनीकी दक्षता के साथ लागू किया जाए।
The Trending People का मानना है कि मछली पालन को पर्यटन से जोड़ना एक 'आउट ऑफ द बॉक्स' आइडिया है। अगर मध्य प्रदेश में सिंगापुर या दुबई की तर्ज पर टनल एक्वेरियम बनते हैं, तो यह राज्य के पर्यटन मानचित्र को बदल सकता है। कुल मिलाकर, 2026 की शुरुआत एमपी के लिए उम्मीदों भरी है, अब देखना यह है कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी जल्दी उतरती हैं।

