1 जनवरी को नहीं, इन देशों में अलग तारीखों पर होता है 'हैप्पी न्यू ईयर'—चीन में ड्रैगन तो थाईलैंड में पानी की बौछार, जानें दुनिया के अनोखे कैलेंडर
नई दिल्ली, दिनांक: 31 दिसंबर 2025 — जब पूरी दुनिया 31 दिसंबर की आधी रात को घड़ी की सुइयों के 12 पर मिलते ही आतिशबाजी और शैम्पेन के साथ नए साल (2026) का स्वागत करने के लिए बेताब है, तब पृथ्वी के कई कोने ऐसे भी हैं जिनके लिए यह महज एक और सामान्य दिन है। क्या आप जानते हैं कि ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian Calendar), जिसे हम फॉलो करते हैं, उसके अलावा भी दुनिया में कई प्राचीन कैलेंडर हैं जो आज भी चलन में हैं?
दुनिया के कई हिस्सों में नया साल 1 जनवरी को नहीं, बल्कि सौर मंडल, चंद्रमा की स्थिति, फसल चक्र और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर अलग-अलग महीनों में मनाया जाता है। आइए आज आपको एक सांस्कृतिक यात्रा पर ले चलते हैं और बताते हैं उन देशों के बारे में जहां 'नया साल' मनाने का अंदाज और तारीख, दोनों ही जुदा हैं।
1. चीन: लाल रंग और ड्रैगन का 'वसंत महोत्सव' (Lunar New Year)
दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश चीन 1 जनवरी को केवल एक आधिकारिक छुट्टी मानता है, लेकिन उनका असली जश्न 'लूनर न्यू ईयर' (चंद्र नववर्ष) पर होता है।
- तारीख: यह तारीख निश्चित नहीं होती। चीनी कैलेंडर के अनुसार, यह 21 जनवरी से 20 फरवरी के बीच आने वाली दूसरी अमावस्या (New Moon) से शुरू होता है।
- जश्न: इसे 'वसंत महोत्सव' (Spring Festival) कहा जाता है, जो पूरे 15 दिनों तक चलता है। इस दौरान चीन लाल रंग में रंग जाता है। लाल लालटेन, आतिशबाजी और भव्य ड्रैगन डांस इस त्योहार की पहचान हैं। यह समय परिवार के मिलन (Reunion) और पूर्वजों को याद करने का होता है।
2. थाईलैंड: पानी से धुलते हैं पाप (Songkran)
अगर आपको लगता है कि नया साल सिर्फ पार्टी है, तो थाईलैंड आपको गलत साबित कर देगा। वहां का पारंपरिक नया साल 'सोंगक्रान' (Songkran) कहलाता है, जो सौर कैलेंडर पर आधारित है।
- तारीख: यह हर साल 13 से 15 अप्रैल के बीच मनाया जाता है।
- परंपरा: सोंगक्रान को दुनिया की सबसे बड़ी 'वाटर फाइट' (Water Fight) कहा जाता है। लोग सड़कों पर निकलकर बाल्टियों और वाटर गन से एक-दूसरे पर पानी की बौछार करते हैं।
- महत्व: पानी को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि पानी डालने से पिछले साल के पाप और दुर्भाग्य धुल जाते हैं और आने वाला साल ठंडक व समृद्धि लेकर आता है।
3. इथियोपिया: 13 महीनों वाला अनोखा देश (Enkutatash)
अफ्रीका का यह देश समय के मामले में दुनिया से अलग ही चाल चलता है। इथियोपिया का अपना कैलेंडर है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 7-8 साल पीछे चलता है।
तारीख: यहां नया साल, जिसे 'एनकुटाटाश' (Enkutatash) कहते हैं, 11 सितंबर को मनाया जाता है।
कैलेंडर का गणित: इथियोपियाई कैलेंडर में 13 महीने होते हैं। पहले 12 महीने 30-30 दिन के होते हैं, और आखिरी 13वां महीना (पाग्यूम) 5 या 6 दिनों का होता है। यह दिन बारिश के मौसम के अंत और 'पीले डेजी फूलों' के खिलने का प्रतीक है।
4. भारत और नेपाल: अप्रैल में नई शुरुआत
भारत और नेपाल की सांस्कृतिक जड़ें इतनी गहरी हैं कि यहां अंग्रेजों का 1 जनवरी वाला नया साल केवल एक 'तारीख' है, जबकि असली 'वर्ष प्रतिपदा' वसंत ऋतु में आती है।
भारत: हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, नया साल चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से शुरू होता है (अक्सर मार्च या अप्रैल में)। महाराष्ट्र में इसे 'गुड़ी पड़वा', कर्नाटक-आंध्र में 'उगादी' और पंजाब में 'बैसाखी' (सौर नववर्ष) के रूप में मनाया जाता है। यह समय रबी की फसल कटने और प्रकृति के नवजीवन का होता है।
नेपाल: हमारा पड़ोसी नेपाल अपने आधिकारिक कैलेंडर के रूप में 'विक्रम संवत' (Vikram Samvat) को मानता है। वहां नया साल (नया वर्ष) अप्रैल के मध्य में धूमधाम से मनाया जाता है।
5. तिब्बत और श्रीलंका: आस्था और फसल का उत्सव
तिब्बत (Losar): बर्फ से ढके तिब्बत में नए साल को 'लोसर' (Losar) कहा जाता है। यह तिब्बती चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और अक्सर फरवरी या मार्च के महीने में पड़ता है। इस दौरान बौद्ध मठों में विशेष लामा नृत्य (Cham Dance) और प्रार्थनाएं की जाती हैं ताकि बुरी आत्माओं को दूर रखा जा सके।
श्रीलंका (Aluth Avurudda): श्रीलंका में सिंहली और तमिल समुदाय मिलकर अपना नया साल मनाते हैं, जिसे 'अलुथ अवुरुद्दा' कहते हैं। यह 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। ज्योतिषीय रूप से, यह वह समय है जब सूर्य मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करता है। यह त्योहार नई फसल और रसोई में चावल का पहला भोजन पकाने (दूध उबालने) की परंपरा के लिए जाना जाता है।
हमारी राय
नए साल का मतलब सिर्फ कैलेंडर बदलना नहीं है, बल्कि यह उम्मीद, नवीनीकरण और परंपराओं को जीने का अवसर है। चाहे वह चीन का लाल रंग हो, थाईलैंड का पानी, या भारत का गुड़ी पड़वा—हर संस्कृति हमें सिखाती है कि अंत और शुरुआत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
The Trending People का मानना है कि वैश्वीकरण के दौर में 1 जनवरी का जश्न मनाना अच्छा है, लेकिन अपनी जड़ों और पारंपरिक त्योहारों को याद रखना भी उतना ही जरूरी है। असली 'हैप्पी न्यू ईयर' वही है जो हमें प्रकृति और परिवार के करीब लाए। तो आज रात जश्न मनाइए, लेकिन अप्रैल में अपनी भारतीय परंपराओं के स्वागत के लिए भी तैयार रहिए।
