सावधान! आपके हाथ-पैर दे रहे हैं किडनी खराब होने के 'साइलेंट सिग्नल'—सूजन और खुजली को न समझें आम बात, जानलेवा हो सकती है लापरवाहीImage source: freepik.com
नई दिल्ली — मानव शरीर एक जटिल मशीन है, और किडनी (Kidney) इसके सबसे महत्वपूर्ण 'फिल्टर' हैं। जब तक ये सुचारू रूप से काम करती हैं, हमें इनकी अहमियत का अंदाजा नहीं होता, लेकिन जरा सी खराबी शरीर में जहर घोलने के लिए काफी होती है। मेडिकल साइंस में किडनी की बीमारी को अक्सर 'साइलेंट किलर' (Silent Killer) कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण तब तक स्पष्ट नहीं होते जब तक कि काफी नुकसान न हो चुका हो।
हालांकि, हमारा शरीर बीमारी के शुरुआती दौर में ही कुछ संकेत देने लगता है। विशेष रूप से हमारे हाथ और पैर किडनी की सेहत का हाल बयां करते हैं। अगर आप भी पैरों में सूजन, रात में मांसपेशियों में ऐंठन या त्वचा में अजीब सी खुजली महसूस कर रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए। ये लक्षण किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट का रेड अलर्ट हो सकते हैं।
किडनी: शरीर का 'मास्टर केमिस्ट'
किडनी केवल खून साफ करने का काम नहीं करती, बल्कि यह शरीर का संतुलन बनाए रखने वाला मुख्य अंग है।
- फिल्ट्रेशन: यह खून से अपशिष्ट पदार्थों (Waste Products) और अतिरिक्त तरल को छानकर यूरिन के जरिए बाहर निकालती है।
- इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस: शरीर में नमक, पानी और मिनरल्स (जैसे कैल्शियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस) का सही स्तर बनाए रखना इसकी जिम्मेदारी है।
- हार्मोन उत्पादन: किडनी एरिथ्रोपोइटिन (Erythropoietin) जैसे हार्मोन बनाती है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण में मदद करते हैं।
जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में विषाक्त पदार्थ (Toxins) जमा होने लगते हैं, जिसका असर बाहरी अंगों पर दिखने लगता है।
1. पैरों और टखनों में सूजन (Edema): सबसे आम संकेत
किडनी खराब होने का सबसे पहला और स्पष्ट संकेत अक्सर पैरों और टखनों में सूजन के रूप में सामने आता है।
- पिटिंग एडिमा (Pitting Edema): इसे पहचानने का एक आसान तरीका है। अगर आप अपने पैर या टखने की सूजन वाली जगह को उंगली से कुछ सेकंड के लिए दबाते हैं और वहां गड्ढा बन जाता है जो तुरंत नहीं भरता, तो यह चिंता का विषय है।
- कारण: जब किडनी शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी को फिल्टर करने में असमर्थ हो जाती है, तो यह तरल (Fluid) गुरुत्वाकर्षण के कारण पैरों, टखनों और कभी-कभी हाथों व चेहरे में जमा होने लगता है। इसे वाटर रिटेंशन कहते हैं।
2. मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव (Muscle Cramps)
क्या आपको अक्सर रात के समय पैरों में तेज ऐंठन महसूस होती है? यह केवल थकान नहीं हो सकती।
- इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है।
- असर: फॉस्फोरस का स्तर बढ़ने और कैल्शियम का स्तर घटने से मांसपेशियों की नसों में खिंचाव पैदा होता है। यह दर्दनाक ऐंठन (Cramps) आमतौर पर पिंडलियों (Calves) में महसूस होती है और नींद में खलल डालती है।
3. त्वचा में खुजली और सूखापन (Skin Rashes)
त्वचा शरीर का आईना होती है। अगर किडनी खून से टॉक्सिन्स को बाहर नहीं निकाल पाती, तो ये विषैले तत्व त्वचा के नीचे जमा होने लगते हैं।
- यूरेमिक प्रुरिटस: मेडिकल भाषा में इसे 'यूरेमिक प्रुरिटस' (Uremic Pruritus) कहते हैं। इससे त्वचा बेहद रूखी (Dry) हो जाती है और उसमें असहनीय खुजली होती है।
- लक्षण: लगातार खुजली करने से त्वचा पर लाल चकत्ते, दाने या खरोंच के निशान बन सकते हैं। यह कोई सामान्य स्किन एलर्जी नहीं होती, बल्कि अंदरूनी गंदगी का संकेत है। मॉइस्चराइजर लगाने के बाद भी अगर राहत न मिले, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
4. हाथ-पैर का सुन्न होना या झनझनाहट (Numbness)
किडनी डैमेज का असर हमारे नर्वस सिस्टम पर भी पड़ता है। इसे 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी' (Peripheral Neuropathy) कहा जाता है।
- संवेदना: इसके कारण हाथों और पैरों में अजीब सी झनझनाहट (Tingling), सुई चुभने जैसा अहसास या सुन्नपन (Numbness) महसूस होता है।
- कमजोरी: यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो हाथों की पकड़ कमजोर हो सकती है और चलने-फिरने में दिक्कत आ सकती है। यह इस बात का संकेत है कि टॉक्सिन्स अब नसों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सावधानी ही बचाव है: कब कराएं जांच?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण लगातार बना रहे, तो उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
- तुरंत एक्शन: किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT/RFT), यूरिन टेस्ट और ब्लड प्रेशर की जांच कराएं।
- हाई रिस्क ग्रुप: जिन्हें डायबिटीज (Diabetes) या हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) है, उन्हें इन संकेतों को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए क्योंकि वे किडनी फेलियर के सबसे बड़े रिस्क जोन में होते हैं।
हमारी राय
सेहत को लेकर 'चलता है' वाला रवैया ही सबसे बड़ी बीमारी है। किडनी हमारे शरीर का एक ऐसा योद्धा है जो चुपचाप अपना काम करता रहता है, लेकिन जब यह थक जाता है, तो शरीर ढहने लगता है। हाथ-पैरों में सूजन या खुजली को हम अक्सर मौसम या थकान का असर मानकर टाल देते हैं, लेकिन यही गलती महंगी पड़ती है।
The Trending People की सलाह है कि अपने शरीर की भाषा को समझना सीखें। साल में कम से कम एक बार फुल बॉडी चेकअप जरूर कराएं। पर्याप्त पानी पीना, नमक का कम सेवन और नियमित व्यायाम किडनी को लंबी उम्र देने के मूल मंत्र हैं। याद रखें, इलाज से बेहतर बचाव है, और सही समय पर पहचान ही जीवनदान है।

