नए साल के जश्न में 'आस्था' पर भारी न पड़े 'भीड़'—बांके बिहारी मंदिर की सख्त एडवाइजरी, "29 से 5 तक न आएं तो बेहतर", बुजुर्गों-बच्चों के लिए रेड अलर्टमथुरा के बांके बिहार मंदिर में भीड़ (File Photo) Via Ajj Tak
वृंदावन/मथुरा — साल 2025 अपने अंतिम पड़ाव पर है और नए साल 2026 के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। कान्हा की नगरी वृंदावन में हर साल की तरह इस बार भी आस्था का सैलाब उमड़ने को तैयार है। लेकिन अगर आप भी 31 दिसंबर या 1 जनवरी को ठाकुर बांके बिहारी (Banke Bihari) के दर्शन कर नए साल की शुरुआत करने का प्लान बना रहे हैं, तो रुकिए और प्रशासन की इस चेतावनी को ध्यान से पढ़िए।
वृंदावन की संकरी गलियों में बढ़ती भीड़ और संभावित खतरों को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस ने एक 'हाई अलर्ट' जारी किया है। बांके बिहारी मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से एक विशेष अपील (Advisory) की है कि यदि बहुत जरूरी न हो, तो 29 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक वृंदावन आने से बचें। यह अपील किसी पाबंदी के तौर पर नहीं, बल्कि आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई है।
प्रशासन की अपील: "बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों को न लाएं"
मंदिर प्रशासन ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नए साल के मौके पर भीड़ का दबाव क्षमता से कई गुना अधिक हो जाता है। ऐसे में भगदड़ (Stampede) जैसी स्थिति बनने का खतरा हमेशा बना रहता है।
किसके लिए है खतरा? प्रशासन ने विशेष रूप से तीन श्रेणियों के श्रद्धालुओं को यात्रा न करने की सलाह दी है:
- छोटे बच्चे: भीड़ में बच्चों का दम घुटने या उनके खोने का डर सबसे ज्यादा होता है।
- बुजुर्ग: अधिक उम्र के लोगों के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना और धक्का-मुक्की सहन करना जानलेवा हो सकता है।
- बीमार व्यक्ति: जिन्हें सांस, दिल या चलने-फिरने की बीमारी है, उनके लिए यह समय वृंदावन आने के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है।
मंदिर प्रबंधन का कहना है, "ठाकुर जी भाव के भूखे हैं। भीड़ में फंसकर कष्ट पाने से बेहतर है कि आप घर पर ही मानसिक पूजा करें या भीड़ कम होने के बाद दर्शन के लिए आएं।"
ट्रैफिक का 'चक्रव्यूह': बाहरी वाहनों की नो-एंट्री
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मथुरा-वृंदावन पुलिस ने एक ठोस ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। अगर आप अपनी निजी कार से मंदिर के गेट तक जाने की सोच रहे हैं, तो यह मुमकिन नहीं होगा।
नियम और शर्तें:
- सख्ती का दौर: 25 दिसंबर से ही वृंदावन में बाहरी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती शुरू हो चुकी है, जो 2 जनवरी 2026 तक जारी रहेगी।
- पार्किंग व्यवस्था: बाहर से आने वाली बसों, कारों और टैक्सियों को शहर के बाहरी हिस्से (Outer Circle) में बनी पार्किंग में ही खड़ा कराया जाएगा। वहां से श्रद्धालुओं को मंदिर तक पैदल या ई-रिक्शा (सीमित संख्या में) के जरिए जाना होगा।
- पैदल मार्ग: मंदिर की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों और परिक्रमा मार्ग को 'नो व्हीकल जोन' बनाया गया है ताकि पैदल चलने वालों को सुविधा मिल सके।
सुरक्षा का सख्त पहरा: चप्पे-चप्पे पर पुलिस
भीड़ प्रबंधन के लिए केवल एडवाइजरी ही काफी नहीं है, इसलिए जमीनी स्तर पर भी कड़े इंतजाम किए गए हैं।
अतिरिक्त बल: मंदिर परिसर, आसपास की गलियों और यमुना घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवान तैनात किए गए हैं।सीसीटीवी निगरानी: पूरे क्षेत्र पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही है। सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे ताकि जेबकतरों और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जा सके।
सख्त कार्रवाई: ट्रैफिक विभाग ने साफ कर दिया है कि अगर कोई वाहन नो-पार्किंग जोन में खड़ा मिला या किसी ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भारी जुर्माना वसूला जाएगा।
क्यों होती है इतनी भीड़?
वृंदावन में नए साल पर भीड़ का बढ़ना अब एक परंपरा बन गई है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश से लाखों लोग 31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी को बांके बिहारी का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। बांके बिहारी मंदिर की गलियां (कुंज गलियां) बेहद संकरी हैं। जब लाखों लोग एक साथ वहां जमा होते हैं, तो ऑक्सीजन की कमी और घुटन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में भीड़ के दबाव के कारण कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने और बेहोश होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
स्थानीय निवासियों और दुकानदारों से सहयोग की अपील
प्रशासन ने न केवल बाहर से आने वालों, बल्कि स्थानीय निवासियों, होटल संचालकों और दुकानदारों से भी सहयोग की अपील की है। होटलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी क्षमता से अधिक बुकिंग न करें और आगंतुकों को पहले ही स्थिति से अवगत करा दें।
हमारी राय
आस्था का सम्मान सर्वोपरि है, लेकिन सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं। बांके बिहारी मंदिर प्रशासन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी एक स्वागत योग्य और जिम्मेदार कदम है। हम अक्सर देखते हैं कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन में चूक बड़े हादसों का कारण बनती है।
The Trending People का मानना है कि श्रद्धालुओं को प्रशासन की इस अपील को गंभीरता से लेना चाहिए। भक्ति का अर्थ केवल मंदिर की चौखट छूना नहीं है, बल्कि अनुशासन और धैर्य भी है। अगर आप बच्चों या बुजुर्गों के साथ हैं, तो 5 जनवरी के बाद का प्लान बनाना ही समझदारी होगी। भगवान हर जगह हैं, और वे निश्चित रूप से नहीं चाहेंगे कि उनके दर्शन के प्रयास में किसी भक्त को कष्ट हो। इसलिए इस नए साल पर 'सावधानी' को ही अपनी 'श्रद्धा' का हिस्सा बनाएं।
